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लूट की झूठी कहानी रचने वाले MPPGCL अधीक्षण अभियंता अब खुद के बुने जाल में बुरी तरह फंसते नजर आ रहे हैं!


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08/09/2026 11:22 PM Total Views: 469804

बेकसूरों को छुड़ाने का नाटक कर सहानुभूति बटोरने की जुगत में MPPGCL अधिकारी, युवाओं के भविष्य पर लगाया ‘लूट’ का दाग

नौकरी की तैयारी कर रहे युवक की 9 सितंबर को थी ‘वनरक्षक प्रहरी’ परीक्षा, झूठे मुकदमे ने छीना भविष्य; अधीक्षण अभियंता संजीव त्रिपाठी खंडवा सिंगाजी परियोजना ट्रांसफर

बैतूल/सारणी। ग्राम खैरवानी व तेंदूखेड़ा मार्ग पर हुई कथित लूट की मनगढ़ंत कहानी में अब शिकायतकर्ता अधीक्षण अभियंता (SE) संजीव त्रिपाठी की मुश्किलें लगातार विकराल रूप लेती जा रही हैं। रात के 8:30 बजे सड़क से 100 मीटर अंदर जंगल में शासकीय वाहन ‘MP GOV.’ MP04YC9652 का दुरुपयोग, महिला मित्र संग मौजूदगी और वायरल वीडियो में “पुलिस मत बुलाओ” की मिन्नतों की सच्चाई उजागर होने के बाद अधिकारी पूरी तरह बैकफुट पर आ गए हैं।

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अब अपनी कानूनी और सामाजिक गर्दन फंसती देख वे अदालत में हलफनामा पेश कर बेकसूर युवकों को रिहा कराने का प्रपंच रच रहे हैं। लेकिन जानकारों और पीड़ित परिवारों का स्पष्ट कहना है कि झूठे मुकदमे में जेल भिजवाने के बाद अब उन्हें छुड़ाने की औपचारिकता करना कोई अहसान या नेक काम नहीं है, बल्कि अधिकारी ने इन मासूमों की जिंदगी और दामन पर हमेशा के लिए ‘लूट’ जैसा संगीन दाग लगा दिया है।

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मासूम की मेहनत पर पानी फेरा: 9 सितंबर को थी वनरक्षक प्रहरी परीक्षा

अधिकारी की इस स्वार्थी चतुराई ने चार होनहार परिवारों की खुशियों और उनके भविष्य पर गहरा आघात किया है। झूठे मुकदमे में फंसाए गए चार युवकों में से एक युवक 9 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली ‘वनरक्षक प्रहरी’ की भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाला था। महीनों की कठिन मेहनत और उज्ज्वल भविष्य का सपना संजोए इस युवा की सारी तैयारी अधिकारी के एक झूठे आरोप की भेंट चढ़ गई। जेल की सलाखों और आपराधिक मुकदमे की औपचारिकता ने इस प्रतियोगी छात्र के करियर को बर्बाद करने की कगार पर ला खड़ा किया है। समाज में सवाल उठ रहा है कि क्या अधिकारी का एक हलफनामा इन युवाओं के खोए हुए मान-सम्मान और बर्बाद हुए करियर की भरपाई कर पाएगा?

नेताजी की शरण में बिसात: पुलिस पर ठीकरा फोड़ने की तैयारी

चर्चा है कि कानूनी दांव-पेंच में फंसने के डर से अधिकारी अब एक स्थानीय प्लांट में नो एंट्री चंदा नेता की शरण में पहुंच चुके हैं और सारा दोष पुलिस प्रशासन के मत्थे मढ़ने की नई पटकथा तैयार कर रहे हैं। अदालत में यह कहना कि युवकों ने लूट नहीं की थी और स्वयं के द्वारा सौंप गए हालफनामें में, सीधे तौर पर यह कबूलना होगा कि उन्होंने न्यायिक तंत्र, पुलिस और कानून को गुमराह कर चार मासूमों को गैरकानूनी रूप से सलाखों के पीछे धकेला था।

अदालत का समय नष्ट करने, झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने और बेकसूरों को प्रताड़ित करने के इस कृत्य पर कानूनविदों के अनुसार अधिकारी स्वयं भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 248 व अन्य सुसंगत धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं, जिसमें 5 वर्ष तक की कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

प्रशासनिक गाज: अधीक्षण अभियंता संजीव त्रिपाठी का खंडवा तबादला

शासकीय वाहन के अनैतिक दुरुपयोग, जंगल में महिला मित्र संग मौजूदगी के वायरल साक्ष्यों और कथित लूटकांड के खुलासे से महकमे की छवि धूमिल होने के बाद ऊर्जा प्रबंधन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। अधीक्षण अभियंता संजीव त्रिपाठी को तत्काल प्रभाव से सारणी से हटाकर श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना (खंडवा) स्थानांतरित कर दिया गया है।

हालांकि, क्षेत्र की जनता और पीड़ित परिजनों का कहना है कि केवल स्थानांतरण पर्याप्त नहीं है। शासकीय पद, संसाधन और वाहन का दुरुपयोग करने तथा निर्दोष युवाओं का जीवन बर्बाद करने वाले अधिकारी पर विभागीय जांच बैठाकर कठोर दंडात्मक कार्रवाई और आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।

साख बचाने की दोराहे पर खड़ी सारणी पुलिस

इस समूचे घटनाक्रम ने सारणी पुलिस की साख पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। यदि अधिकारी अब अपने पुराने बयानों से मुकरते हुए पुलिस पर दबाव का आरोप मढ़ते हैं, तो पुलिस को जनता के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि 18 अगस्त के प्रेस नोट में महिला की मौजूदगी क्यों छिपाई गई और मोबाइल से वीडियो डिलीट करने के आरोपों में कितनी सच्चाई है। क्षेत्र की जनता अब इस मामले में निष्पक्ष जांच और बेकसूरों को पूर्ण न्याय दिलाने की मांग कर रही है।

इनका कहना है:—

मामले में आगे की जो भी कार्रवाई होगी, वह पुलिस द्वारा की जाएगी। हमारी संबंधित थाना प्रभारी से बातचीत हुई है, लेकिन पुलिस की ओर से हमे किसी भी वाहन का नंबर उपलब्ध नहीं कराया गया है।

एस.के.लिल्लोरे चीफ इंजीनियर एमपीपीजीसीएल

दोनों पति-पत्नी हैं। उन्हें चार लोगों ने रास्ते में रोककर उनके साथ मारपीट की। मामले में पत्नी का बयान दर्ज कर उसी आधार पर मामला कायम किया गया था।

जैपाल इनवाती, थाना प्रभारी सारनी

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