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विमान हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन; मौत से दो हफ्ते पहले किया था ‘100 करोड़ के घोटाले’ का दावा, अब फाइलों पर सस्पेंस – Madhya Pradesh Voice

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विमान हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन; मौत से दो हफ्ते पहले किया था ‘100 करोड़ के घोटाले’ का दावा, अब फाइलों पर सस्पेंस


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29/01/2026 12:49 AM Total Views: 489751

मुंबई/पुणे | महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार का 28 जनवरी को एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया। बारामती के पास हुए इस हादसे ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है। पवार के निधन के साथ ही 1999 की भाजपा-शिवसेना सरकार पर उनके द्वारा हाल ही में लगाए गए 100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोप अब एक अनसुलझी पहेली बनकर रह गए हैं।

हादसा और अंतिम संस्कार

अजित पवार 28 जनवरी की सुबह एक निजी विमान से यात्रा कर रहे थे, तभी बारामती के पास उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में अजित पवार समेत विमान में सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई। हादसे में अजित पवार के अलावा पायलट सुमित कपूर, को-पायलट शांभवी पाठक, और पवार के सहयोगी स्टाफ विदिप जाधव और पिंकी माली की भी जान गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अजित पवार का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में किया जाएगा। राज्य सरकार ने उनके सम्मान में राजकीय शोक की घोषणा की है।

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मौत से पहले का वह सनसनीखेज आरोप

इस हादसे से महज दो हफ्ते पहले, 13 जनवरी को अजित पवार ने एक बड़ा राजनीतिक धमाका किया था। उन्होंने 1995-1999 की भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। पवार ने दावा किया था कि 1999 में ‘पार्टी फंड’ जुटाने के लिए एक सिंचाई परियोजना की लागत में 100 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।

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पवार ने कहा था, “पुरंदर लिफ्ट सिंचाई योजना की फाइल 1999 में मेरे पास आई थी, जिसे 330 करोड़ रुपये की योजना बताया गया था। मैंने फाइल खारिज कर दी और जांच कराई तो पता चला कि यह काम 220 करोड़ रुपये में हो सकता था। 100 करोड़ रुपये पार्टी फंड के लिए और 10 करोड़ अधिकारियों के लिए जोड़े गए थे।” उन्होंने यह भी दावा किया था कि वह विवादित फाइल अभी भी उनके पास सुरक्षित है।

आरोपों पर पलटवार और पुराना इतिहास

पवार के इन आरोपों पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। तत्कालीन भाजपा-शिवसेना सरकार में सिंचाई मंत्री रहे एकनाथ खड़से ने पवार के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। खड़से ने कहा था कि पवार खुद सिंचाई विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं और जनता का ध्यान भटकाने के लिए पुरानी बातें उखाड़ रहे हैं।

गौरतलब है कि खुद अजित पवार पर भी सिंचाई घोटाले के कई आरोप लगे थे। नवंबर 2018 में एसीबी के तत्कालीन डीजीपी संजय बरवे ने हलफनामे में कहा था कि पवार ने सिंचाई ठेकों में दखलअंदाजी की थी, हालांकि एसीबी ने उन्हें आधिकारिक तौर पर आरोपी नहीं बनाया था।

अनसुलझे सवाल

अजित पवार के अचानक निधन के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उस ‘फाइल’ की चर्चा तेज हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या वह फाइल कभी सार्वजनिक हो पाएगी, या पवार के साथ ही वह राज भी हमेशा के लिए दफन हो गया है।

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