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सीहोर के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों पर बुलडोजर कार्रवाई: एक विस्तृत और प्रभावशाली ग्राउंड रिपोर्ट – Madhya Pradesh Voice

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सीहोर के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों पर बुलडोजर कार्रवाई: एक विस्तृत और प्रभावशाली ग्राउंड रिपोर्ट


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12/10/2026 11:38 PM Total Views: 487688

भोपाल। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अंतर्गत आने वाली हाई-प्रोफाइल बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में वन विकास निगम द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई ने पूरे प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस घटना ने प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री व क्षेत्र के सांसद शिवराज सिंह चौहान के तीखे तेवर ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।

क्या है पूरा घटनाक्रम?

कोसमी गांव में वन विकास निगम के अमले ने भारी पुलिस बल और जेसीबी मशीनों के साथ पहुंचकर कार्रवाई की। आरोप है कि वन विभाग ने यहां लंबे समय से निवास कर रहे बरेला आदिवासी समुदाय के 12 परिवारों के कच्चे-पक्के मकानों को जमींदोज कर दिया। केवल आशियाने ही नहीं उजड़े, बल्कि आदिवासियों के खेतों में लहलहा रही मक्का और तुअर की तैयार खड़ी फसलों पर ट्रैक्टर चलाकर उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया गया। हद तो तब हो गई जब ग्रामीणों के पीने और सिंचाई के एकमात्र साधन बने पानी के कुएं को भी मिट्टी से पाटकर पूरी तरह बंद कर दिया गया।

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मौके पर पहुंचे शिवराज, फूटा गुस्सा और धरने पर बैठे

घटना की जानकारी मिलते ही केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तत्काल कोसमी गांव पहुंचे। वहां प्रभावित महिलाओं और बच्चों को फफक-फफक कर रोते देख तथा तबाही का मंजर देखकर उनका गुस्सा फूट पड़ा। वे तुरंत पीड़ित परिवारों के साथ जमीन पर धरने पर बैठ गए।

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शिवराज सिंह चौहान ने इस पूरी कार्रवाई को “जुल्म की पराकाष्ठा” करार दिया। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि जब उन्होंने पहले ही जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी गरीब का घर नहीं उजड़ा जाना चाहिए, तो फिर यह कार्रवाई किसके इशारे पर और कैसे हुई? उन्होंने मौके पर वन विभाग और प्रशासन के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के मौजूद न होने पर भी गहरी नाराजगी जताई।

मुख्य सचिव को लगाई फटकार, दिए कड़े निर्देश

घटनास्थल पर ही केंद्रीय मंत्री ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन मिलाया और अपनी कड़ी नाराजगी दर्ज कराई। उन्होंने मुख्य सचिव को स्पष्ट निर्देश दिए:

  • दोषियों पर कार्रवाई: गरीबों के आशियाने उजाड़ने और फसलों को बर्बाद करने वाले वन विभाग के अमले व जिम्मेदार अधिकारियों पर तुरंत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
  • आवास और भोजन की व्यवस्था: जिन 12 आदिवासी परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके लिए सरकारी खर्च पर नए और पक्के मकान बनाए जाएं।
  • अस्थाई राहत: जब तक नए मकान बनकर तैयार नहीं हो जाते, तब तक सभी प्रभावित परिवारों के रहने, ठहरने और भोजन का पूरा मुकम्मल इंतजाम तुरंत किया जाए।

प्रशासनिक पक्ष और विभागीय तर्क

दूसरी ओर, वन विभाग और निगम प्रशासन का कहना है कि सीहोर के वन कक्ष क्रमांक 426 में वर्ष 2021 में प्लांटेशन किया गया था। विभाग के अनुसार इस क्षेत्र में कुछ परिवारों द्वारा प्लांटेशन को नष्ट कर अवैध रूप से खेती और झोपड़ी बनाकर अतिक्रमण किया गया था। नियमानुसार सभी को पहले वन अपराध के प्रकरण दर्ज कर बेदखली के नोटिस दिए गए थे, जिसके बाद यह वैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई है।

सियासत गरमाई, सरकार पर उठे सवाल

इस घटना को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में आदिवासियों पर लगातार अत्याचार बढ़ रहे हैं। वहीं, खुद सत्ताधारी दल के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय मंत्री द्वारा अपनी ही सरकार के अधिकारियों के खिलाफ इस तरह मोर्चा खोलना यह बताता है कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक समन्वय और संवेदनशीलता की कितनी कमी है।

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