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सारणी उप डाकघर बना शोपीस: एक हफ्ते से राउटर खराब, कुर्सियां खाली, जनता पाथाखेड़ा के चक्कर काटने को मजबूर – Madhya Pradesh Voice

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सारणी उप डाकघर बना शोपीस: एक हफ्ते से राउटर खराब, कुर्सियां खाली, जनता पाथाखेड़ा के चक्कर काटने को मजबूर


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10/10/2026 12:40 AM Total Views: 486509

चेन्नई से राउटर आने के इंतजार में अटका कामकाज, उप डाकपाल ने साधी चुप्पी

सारणी। सारणी नगर का उप डाकघर इन दिनों बदइंतजामी और विभागीय लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। जरूरी डाक सेवाओं और लेनदेन के लिए यहां पहुंचने वाले उपभोक्ताओं को केवल निराशा और परेशानी ही हाथ लग रही है। कार्यालय की खाली कुर्सियां और धूल फांकते कंप्यूटर खुद चीख-चीख कर यहां की लचर व्यवस्था की कहानी बयां कर रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक सरकारी उप डाकघर की व्यवस्था कब पटरी पर लौटेगी और आम जनता को इस परेशानी से कब निजात मिलेगी?

डिजिटल दौर में तकनीकी लाचारी का बहाना 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सारणी उप डाकघर का इंटरनेट राउटर पिछले लगभग एक सप्ताह से खराब पड़ा है, जिसके चलते पूरे कार्यालय का कामकाज ठप हो गया है। आज के डिजिटल दौर में, जहां हर काम पलक झपकते ऑनलाइन हो जाता है, वहां एक राउटर जैसी बुनियादी तकनीकी खराबी को एक सप्ताह तक दूर न कर पाना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विभागीय सूत्रों का अजीबोगरीब तर्क है कि नया राउटर चेन्नई से आएगा। इसके लिए उप डाकपाल (सब-पोस्टमास्टर) को प्रतिवेदन बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजना होगा। यह तर्क अपने आप में हास्यास्पद है। क्या इतने बड़े विभाग के पास आपात स्थिति के लिए एक अतिरिक्त राउटर (बैकअप) की व्यवस्था तक नहीं है? या फिर जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर इस मामले में लापरवाही बरत रहे हैं?

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सारणी का काम पाथाखेड़ा में, जनता हो रही परेशान 

समस्या का त्वरित समाधान करने के बजाय, विभाग ने ‘जुगाड़’ की व्यवस्था अपना ली है। सारणी का कामकाज पाथाखेड़ा स्थित डाकघर के एक अलग कक्ष में मात्र एक ऑपरेटर को बैठाकर संचालित किया जा रहा है। इसका सीधा खामियाजा सारणी के उन सैकड़ों वृद्धजनों, महिलाओं और आम हितग्राहियों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें अपने छोटे-छोटे कामों के लिए बेवजह पाथाखेड़ा के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब सारणी में बकायदा उप डाकघर का भवन और अमला मौजूद है, तो तकनीकी खराबी की आड़ में जनता को दर-दर क्यों भटकाया जा रहा है?

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खाली कुर्सियां खोल रही हैं कर्मचारियों की पोल 

कुप्रबंधन का आलम केवल राउटर तक सीमित नहीं है। कार्यालय के भीतर की तस्वीरें गवाही दे रही हैं कि कुर्सियां खाली पड़ी हैं। कामकाज ठप होने की आड़ में कर्मचारियों की मौजूदगी भी सवालों के घेरे में है। क्या राउटर खराब होने का मतलब यह है कि कर्मचारी कार्यालय में अपनी सेवाएं ही न दें?

जिम्मेदारों की रहस्यमयी चुप्पी 

उप डाकघर में आने वाले हितग्राहियों को समयबद्ध सेवाएं देना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। तकनीकी खराबी आने पर उसका त्वरित निराकरण करना उप डाकपाल का दायित्व है। इस पूरे मामले में जब जिम्मेदार सारणी उप डाकपाल से उनका पक्ष जानने के लिए ‘मध्यप्रदेश voice’ द्वारा कॉल के माध्यम से संपर्क किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना ही मुनासिब नहीं समझा। उनकी यह चुप्पी कई संदेहों को जन्म देती है।

क्या खराब राउटर की सूचना समय रहते वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई थी? यदि दी गई, तो एक सप्ताह बीतने पर भी समाधान क्यों नहीं हुआ? और यदि सूचना नहीं दी गई, तो इस घोर लापरवाही का जिम्मेदार कौन है?

अब देखना यह होगा कि डाक विभाग के उच्चाधिकारी इस खबर के बाद कब नींद से जागते हैं और सारणी की जनता को इस अघोषित ‘तकनीकी लॉकडाउन’ से कब मुक्ति दिलाते हैं।

इनका कहना है :—

  • राउटर बहुत महंगा आता है इसलिए समय लग सकता अधिकारियों से बातचीत चल रही है। और असुविधा के लिए हमने पाथाखेड़ा में अलग से एक काउंटर बनाकर एक ऑपरेटर बैठा दिया गया है।
सतीश पान्कर, प्रभारी पोस्टमास्टर

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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