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भाजपा के ‘गढ़’ में विकास का सन्नाटा: एकतरफा वोट देने वाले चोपना की बदहाली पर विधायक, जनप्रतिनिधि और प्रशासन मौन – Madhya Pradesh Voice

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भाजपा के ‘गढ़’ में विकास का सन्नाटा: एकतरफा वोट देने वाले चोपना की बदहाली पर विधायक, जनप्रतिनिधि और प्रशासन मौन


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16/08/2026 4:45 PM Total Views: 489763

गड्ढों में तब्दील मुख्य मार्ग, 5 वर्षों से उपेक्षा का शिकार पुनर्वास कैंप; कलेक्टर के दौरे के बाद भी नहीं बदले हालात

चोपना। घोड़ाडोंगरी ब्लॉक का ऐतिहासिक पुनर्वास क्षेत्र चोपना, जिसे राजनीतिक गलियारों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का अभेद्य गढ़ माना जाता है, आज बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। जिस क्षेत्र की जनता ने चुनाव दर चुनाव भाजपा की झोली में एकतरफा बहुमत डाला, वही चोपना आज सत्ता और शासन की उपेक्षा का शिकार होकर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों के मन में अब यह बड़ा सवाल गूंज रहा है—”क्या सत्ता में आते ही जनप्रतिनिधि अपने सबसे मजबूत जनाधार को भूल जाते हैं?”

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5 साल से बेहाल सड़कें, गड्ढों में तब्दील हुआ चोपना नंबर-1 का मुख्य मार्ग

चोपना क्षेत्र में विकास के दावों की पोल यहाँ की जर्जर सड़कें खोल रही हैं। विगत पाँच वर्षों से चोपना की सड़कों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। चोपना नंबर-1 के मुख्य मार्ग पर बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढे हो चुके हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी जोखिम उठाना पड़ रहा है। मानसूनी बारिश के बाद मार्ग पूरी तरह तहस-नहस हो चुका है। जलभराव और कीचड़ के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्कूली बच्चों, मरीजों और दैनिक यात्रियों के लिए इस मार्ग से निकलना किसी सजा से कम नहीं है।

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कलेक्टर के स्वागत की औपचारिकता पूरी, लेकिन ज़मीनी हकीकत जस की तस

विगत माह जिले के कलेक्टर डॉ. सोहन सोनवाने ने क्षेत्र का दौरा किया था। इस दौरान चोपना के नागरिकों ने अपनी समृद्ध बंगाली परंपरा और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के साथ उनका भव्य स्वागत किया था।

😲ग्रामीणों का तीखा सवाल जिस : “सड़क से होकर साहब का काफिला गुजरा, क्या उन्हें उन जानलेवा गड्ढों और टूटी सड़कों का एहसास नहीं हुआ? क्या अधिकारियों का दौरा केवल स्वागत सत्कार और औपचारिक बैठकों तक ही सीमित रह गया है?” दौरे के हफ्तों बाद भी सड़क सुधार की दिशा में एक भी कदम नहीं उठाया गया, जिससे प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 

सत्ता मिलते ही वादे भूले: विधायक और जनप्रतिनिधि सवालों के घेरे में

चोपना क्षेत्र के मतदाताओं ने क्षेत्रीय विकास की उम्मीद के साथ भाजपा की स्थानीय विधायक गंगा उइके को भारी मतों से विजयी बनाया था। लेकिन सत्ता की कुर्सी संभालते ही क्षेत्र की उपेक्षा ने जनता के भरोसे को तोड़ा है।

जन-आक्रोश: “अगर वोट हमारा है, तो विकास पर हक किसका?”

पुनर्वास कैंप चोपना के नागरिकों का कहना है कि जब-जब चुनाव आते हैं, बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन परिणाम शून्य रहता है। शासन, स्थानीय विधायक और जिला प्रशासन के इस उदासीन रवैये के खिलाफ ग्रामीणों में गहरा आक्रोश पनप रहा है।

यदि समय रहते चोपना नंबर-1 सहित पूरे क्षेत्र की मुख्य सड़कों का कायाकल्प नहीं किया गया, तो आने वाले समय में जनता का यह आक्रोश बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है, साथ ही आने वाले चुनाव में भाजपा को एक बड़ा झटका मिलने की आशंका भी जताई जा रही है।

 

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