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सरकारी खजाने पर ‘रिटायर्ड’ डाका: रिटायरमेंट के बाद भी पूर्व सीएमओ मेश्राम की ‘साहबी’ बरकरार, सरकारी गाड़ी से निपटा रहे निजी काम


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06/08/2026 1:29 PM Total Views: 448912

प्रवीर कुमार, 7489579303

सारनी। कहते हैं कि सत्ता और सरकारी सुविधाओं का नशा आसानी से नहीं छूटता। नगर पालिका परिषद सारनी के पूर्व मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सी.के. मेश्राम इसका जीता-जागता उदाहरण बन गए हैं। 30 जून को सेवानिवृत्त होने के बावजूद मेश्राम का सरकारी सुविधाओं के भोग का मोह खत्म नहीं हो रहा है। आलम यह है कि रिटायरमेंट को एक महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन उन्होंने अब तक लाखों के टेंडर लगभग 45 हजार रुपए प्रतिमाह वाली सरकारी गाड़ी जो कि 6 माह के एक्सटेंशन ऑफ टाइम के लिए लगी वाहन नगर पालिका को वापस नहीं लौटाई है।

वर्तमान सीएमओ खा रहे धक्के, रिटायर्ड अधिकारी भर रहे फर्राटे

प्रशासनिक लापरवाही और मनमानी की हद यह है कि जिस सरकारी वाहन का इस्तेमाल नगर पालिका के विकास कार्यों और प्रशासनिक कार्यों के लिए होना चाहिए, उसमें बैठकर पूर्व सीएमओ अपने निजी और घरेलू काम निपटा रहे हैं। विडंबना देखिए कि एक तरफ वर्तमान प्रभारी सीएमओ बिना वाहन के सड़कों पर पैदल जूते घिसने को मजबूर हैं और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सेवानिवृत्त हो चुके मेश्राम सरकारी गाड़ी को अपनी “निजी जागीर” समझकर शान से घूम रहे हैं। यह सीधे तौर पर जनता की गाढ़ी कमाई और निकाय के खजाने का खुला दुरुपयोग है।

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कार्यालय छूट गया, तो गाड़ी को ही बना लिया ‘बंधक’

पूर्व सीएमओ की इस हठधर्मिता और मनमानी को लेकर नगर पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच खासी चर्चाएं और आक्रोश है। कर्मचारियों का कहना है कि मेश्राम जी जब पद पर थे, तब उनकी आदत देर रात तक कार्यालय में बेवजह बैठकर दूसरे कर्मचारियों को मानसिक रूप से परेशान करने की थी। अब चूंकि रिटायरमेंट के बाद उनका कार्यालय में बैठना संभव नहीं है, तो उन्होंने अपनी उसी ‘बॉस’ वाली सनक और रौब को कायम रखने के लिए सरकारी वाहन को ही जब्त कर अपने घर में खड़ा कर लिया है।

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जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठ रहे गंभीर सवाल

इस पूरे मामले ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। आखिर किस नियम के तहत एक सेवानिवृत्त अधिकारी को इतने लंबे समय तक सरकारी वाहन रखने की छूट दी गई है? क्या नगर पालिका प्रशासन इतना लाचार है कि वह अपनी ही गाड़ी वापस नहीं मंगवा पा रहा? पिछले एक महीने से पूर्व सीएमओ द्वारा निजी कार्यों के लिए फूंके जा रहे सरकारी डीजल का हिसाब कौन देगा? ऐसे अवैध रूप से किए गए ईंधन व वाहन खर्च की वसूली मेश्राम की पेंशन या निजी खाते से करने की कार्रवाई क्यों शुरू नहीं हुई?

अब देखना यह है कि क्या उच्च अधिकारी इस मामले पर सख्ती दिखाते हुए तत्काल सरकारी वाहन की जब्ती की कार्रवाई करेंगे, या फिर नियमों को ताक पर रखकर पूर्व सीएमओ को यूं ही सरकारी सुविधाओं की मलाई खाने की खुली छूट दी जाती रहेगी। प्रशासन को चाहिए कि न केवल वाहन को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, बल्कि एक महीने तक हुए अवैध इस्तेमाल के एवज में पूर्व सीएमओ से वाहन और ईंधन खर्च की वसूली भी की जाए।

इनका कहना है

नगर पालिका परिषद सारणी की सीएमओ वाहन को सुरक्षा के उद्देश्य से पूर्व सीएमओ साहब के घर रखी गई है। 

हितेश शाक्य प्रभारी सीएमओ नगर पालिका परिषद सारणी

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