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लाखों के ‘पियाऊ’ पड़े सूखे, ठेकेदार खा रहे एसी की हवा और चाय वाले बुझा रहे जनता की प्यास! – Madhya Pradesh Voice

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लाखों के ‘पियाऊ’ पड़े सूखे, ठेकेदार खा रहे एसी की हवा और चाय वाले बुझा रहे जनता की प्यास!


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09/06/2026 12:58 AM Total Views: 422088

लोक योग के सामने होटल और रेहड़ी-पटरी वालों की इंसानियत के भरोसे राहगीर; जनता बोली- ‘ठेकेदार को पालने से अच्छा छोटे दुकानदारों को देते जिम्मा तो बचता 60% पैसा’

सारणी। चिलचिलाती धूप और आसमान से बरसती आग के बीच जहां आम राहगीर पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है, वहीं नगर पालिका परिषद सारणी की घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार का एक बड़ा ‘तमाशा’ महीनो से चला आ रहा है। मुख्य मार्गों और चौक-चौराहों पर जनता की प्यास बुझाने के नाम पर लाखों रुपये फूंक कर पियाऊ तो लगा दिए गए, लेकिन हकीकत यह है कि ये पियाऊ सिर्फ और सिर्फ ‘शोपीस’ बनकर रह गए हैं। धरातल पर स्थिति यह है कि प्यास से बेहाल राहगीरों को इन पियाऊ के मटके हमेशा खाली ही मिलते हैं।

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होटल के चक्कर काटने को मजबूर राहगीर, चाय वाले बन रहे सहारा

नगर पालिका के दावों की पोल खोलती इस भीषण गर्मी में ‘लोक योग’ के सामने का नजारा देखने लायक है। यहाँ लगे पियाऊ में पानी न होने के कारण लोग पास ही के एक होटल में जाकर पानी मांगने और पीने को मजबूर हैं। सबसे शर्मनाक बात यह है कि लाखों का टेंडर डकारने वाले ठेकेदार तो लापता हैं, लेकिन सड़क किनारे चाय बेचने वाले छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले अपनी इंसानियत के दम पर राहगीरों की प्यास बुझा रहे हैं।

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अब सवाल यह उठता है कि जब जनता की प्यास छोटे गरीब दुकानदार ही बुझा रहे हैं, तो फिर नगर पालिका ने लाखों रुपये का टेंडर किसके फायदे के लिए जारी किया था?

‘टेंडर लो, शोपीस बनाओ और बिल पास कराओ’ – यही है सारणी की हकीकत!

सारणी नगर पालिका में भ्रष्टाचार और कामचोरी का खेल नए स्तर पर पहुंच चुका है। टेंडर के अनुकूल काम न करना यहाँ के ठेकेदारों की फितरत बन चुकी है। सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार अच्छे से जानते हैं कि धरातल पर काम हो या न हो, उनकी ऊंची सेटिंग के कारण समय अवधि पूरी होते ही ऑडिट की औपचारिकता पूरी कर ली जाएगी। एक बंद कमरे की बैठक में जाकर टेबल के नीचे से सारे बिल आसानी से पास करा लिए जाएंगे। यही वजह है कि जनता धूप में झुलस रही है और ठेकेदार एसी की ठंडी हवा का आनंद ले रहे हैं।

जनता की खरी-खरी: रेहड़ी-पटरी वालों को जिम्मा देते तो बचता 60% पैसा

पियाऊ की यह दुर्दशा और सरकारी धन की खुली लूट देखकर अब स्थानीय नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा है। चौक-चौराहों पर चर्चा करते हुए जागरूक नागरिकों ने नगर पालिका को आईना दिखाते हुए कहा लाखों का टेंडर निकालकर सिर्फ चहेते ठेकेदारों की जेबें भरी जा रही हैं।

जनता का व्यावहारिक सुझाव है कि अगर नगर पालिका परिषद यह टेंडर न निकालकर, चौक-चौराहों पर मौजूद गरीब रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों को महज 5 हजार महीना भी देती, तो वे जिम्मेदारी से पानी की व्यवस्था करते। इस तरह गर्मी के तीन महीनों तक सारे पियाऊ पॉइंट सुचारू रूप से चलते और नगर पालिका के टेंडर अमाउंट का कम से कम 60% पैसा सीधे तौर पर बच जाता।

मौन प्रशासन पर उठ रहे सवाल

लाखों रुपये पानी की तरह बहाने के बाद भी जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है। नगर पालिका प्रशासन की यह चुप्पी साफ इशारा करती है कि कहीं न कहीं इस पूरे खेल में अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत है। अब देखना यह है कि इस खबर के बाद जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागते हैं या फिर सारणी की जनता इसी तरह प्यासी रहकर ठेकेदारों की जेबें भरती रहेगी।

👉🏽 खबरों से संबंधित चर्चा के लिए कमलेश पटेल उपन्यत्री नगर पालिका परिषद सारणी से उनके दूरभाष पर सपर्क करने का प्रयास किया गया किंतु उन्होंने हमारा फोन रिसीव नहीं किया

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