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लाल फीताशाही पर प्रहार: परिवीक्षा अवधि के बाद कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए मोहन सरकार ने तय की 6 महीने की डेडलाइन – Madhya Pradesh Voice

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लाल फीताशाही पर प्रहार: परिवीक्षा अवधि के बाद कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए मोहन सरकार ने तय की 6 महीने की डेडलाइन


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06/06/2026 12:13 PM Total Views: 460401

भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए सेवा नियमों में एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रस्ताव रखा है। सालों से परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) पूरी होने के बाद भी अपने नियमितीकरण (कन्फर्मेशन) की फाइलों को लेकर दफ्तरों के चक्कर काटने वाले कर्मचारियों के लिए अब एक नई और पारदर्शी व्यवस्था लागू होने जा रही है।

राज्य सरकार ने ‘मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-2026’ का संशोधित मसौदा (ड्राफ्ट) जारी कर दिया है। इस नए ड्राफ्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब प्रोबेशन पूरा होने के बाद विभाग को कर्मचारी के नियमितीकरण पर अधिकतम 6 महीने के भीतर फैसला लेना अनिवार्य होगा।

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अधिकारियों की लेटलतीफी नहीं चलेगी, कर्मचारी स्वतः माने जाएंगे नियमित

वर्तमान व्यवस्था में कई बार ऐसा देखा जाता है कि प्रोबेशन अवधि समाप्त होने के बाद भी विभागीय प्रक्रियाओं या अधिकारियों की लेटलतीफी के कारण कर्मचारियों का नियमितीकरण सालों तक अटका रहता है। इससे कर्मचारियों को मानसिक तनाव के साथ-साथ आर्थिक नुकसान (जैसे इंक्रीमेंट या प्रमोशन में देरी) भी झेलना पड़ता है। लेकिन नए नियमों के अनुसार, यदि तय 6 महीने की सीमा के भीतर सक्षम अधिकारी द्वारा नियमितीकरण या सेवा समाप्ति पर कोई आदेश जारी नहीं किया जाता है, तो संबंधित कर्मचारी को स्वतः (Automatically) नियमित मान लिया जाएगा।

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नए सेवा नियमों की मुख्य बातें:

  • 6 महीने की सख्त डेडलाइन: परिवीक्षा अवधि के बाद निर्णय लेने के लिए विभाग के पास केवल 6 महीने का समय होगा।
  • स्वतः नियमितीकरण का लाभ: समय सीमा बीतने पर कर्मचारी अपने आप कन्फर्म माना जाएगा, जिससे प्रशासनिक लेटलतीफी पर लगाम लगेगी।
  • 15 जून तक मांगे गए सुझाव: सरकार ने इस संशोधित प्रारूप को सार्वजनिक कर दिया है और इस पर 15 जून तक सभी संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं।

गंभीर मामलों में कड़ी कार्रवाई: जहां यह नियम ईमानदार कर्मचारियों को राहत देगा, वहीं नए मसौदे में इस बात का भी स्पष्ट प्रावधान है कि गंभीर कदाचार या अनुशासनहीनता के मामलों में कर्मचारियों पर सख्त और त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम

जानकारों का मानना है कि मोहन सरकार का यह कदम प्रशासनिक ढांचे में जवाबदेही (Accountability) और पारदर्शिता (Transparency) लाएगा। इस फैसले से प्रदेश के लाखों युवा और नवनियुक्त कर्मचारी लाभान्वित होंगे, जो अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता के दौर से गुजरते हैं। 15 जून के बाद प्राप्त सुझावों की समीक्षा कर इन नियमों को अंतिम रूप देकर जल्द ही लागू किए जाने की संभावना है।

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