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छिंदवाड़ा के गाडरी ढाना में भीषण अग्निकांड: बिजली विभाग की लापरवाही ने निगली किसानों की फसलें – Madhya Pradesh Voice

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28/04/2026 3:33 PM Total Views: 461035

छिंदवाड़ा। जिले के खजरी क्षेत्र अंतर्गत आने वाले गाडरी ढाना में मंगलवार की सुबह एक बड़ा और हृदयविदारक अग्निकांड सामने आया। हवा में झूलते और जर्जर हो चुके बिजली के तारों से अचानक हुई जोरदार स्पार्किंग ने खेतों में भीषण आग लगा दी। देखते ही देखते इस आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास के कई खेतों को अपनी विनाशकारी चपेट में ले लिया। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और किसानों की बेबसी को उजागर कर दिया है।

इस भीषण आग में किसानों की खून-पसीने से तैयार “खड़ी फसलें” पूरी तरह जलकर राख हो गईं। खेतों में बिछाई गई महंगी “ड्रिप पाइपलाइन” और सिंचाई के आधुनिक उपकरण नष्ट हो गए। किसानों को लाखों रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ा है।

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बेबस दमकल विभाग और आग का तांडव

घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीमें आनन-फानन में मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। लेकिन, खेतों में मौजूद सूखी नरवाई (फसल के अवशेष) के कारण आग इतनी तेजी से फैली कि दमकल कर्मियों को इसे बुझाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। आग की भयावहता और तेज लपटों के आगे बचाव के प्रयास काफी देर तक नाकाफी साबित हुए। इस जद्दोजहद के बीच किसानों को अपनी आंखों के सामने अपनी महीनों की मेहनत को राख होते देखना पड़ा।

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मेंटेनेंस के नाम पर छलावा: बिजली विभाग कटघरे में

इस दर्दनाक घटना के बाद स्थानीय किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रशासन और विशेष रूप से बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। किसानों का स्पष्ट आरोप है कि विभाग द्वारा ‘मेंटेनेंस’ (रखरखाव) के नाम पर आए दिन घंटों बिजली कटौती की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। खेतों के ऊपर झूलते नंगे तार और खराब लाइनें सालों से मौत और तबाही का निमंत्रण दे रही हैं, लेकिन विभाग कोई सुध नहीं ले रहा है। यह आग कोई हादसा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है।

दोहरी मार झेलता अन्नदाता

आज का किसान चौतरफा संकट से घिरा हुआ है। एक तरफ प्राकृतिक आपदाएं और दूसरी तरफ फसल का उचित मूल्य न मिल पाना—खेती अब एक भारी घाटे का सौदा बन चुकी है। ऐसे में इस तरह की मानव-निर्मित आपदाएं उनकी कमर तोड़ रही हैं।

किसानों ने नरवाई प्रबंधन की सरकारी नीतियों पर भी तीखी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि सरकार नरवाई न जलाने का दबाव तो बनाती है, लेकिन इसके सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण के लिए कोई भी ठोस और व्यावहारिक व्यवस्था जमीनी स्तर पर उपलब्ध नहीं कराई गई है।

पीड़ित किसानों की मांगें

“सरकार और प्रशासन को इस घटना की गंभीरता को समझना चाहिए। हमारी मांग है कि प्रभावित किसानों के नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही, इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार बिजली विभाग पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसी नीतियां बनाई जाएं जिससे किसानों को सुरक्षा, सम्मान और एक स्थिर आय मिल सके।”

– राहुल कुमार वसूले (पीड़ित खेत मालिक)

इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन को अब कागजी खानापूर्ति से बाहर निकलकर ठोस कदम उठाने होंगे। किसानों की गाढ़ी कमाई को इस तरह सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ने से रोकने के लिए तुरंत जवाबदेही तय करनी होगी।

 

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