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कलेक्टर महोदय, चोपना पंचायत की भी लीजिये सुध! कागजों पर बने खेल मैदान और जलकूप, पीएम आवास में बड़ा फर्जीवाड़ा – Madhya Pradesh Voice

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कलेक्टर महोदय, चोपना पंचायत की भी लीजिये सुध! कागजों पर बने खेल मैदान और जलकूप, पीएम आवास में बड़ा फर्जीवाड़ा


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25/04/2026 9:34 PM Total Views: 423742

सारनी। चोपना पंचायत इन दिनों भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का गढ़ बन चुकी है। क्षेत्र में विकास के नाम पर केवल सरकारी राशि की खुली लूट हो रही है। इस त्रस्त पंचायत के ग्रामीणों ने अब सीधे जिले के कलेक्टर से गुहार लगाई है कि वे एक नजर चोपना पंचायत पर भी डालें, ताकि यहां वर्षों से जमे भ्रष्ट तंत्र का पर्दाफाश हो सके और आम जनता को राहत मिल सके।

नाममात्र के सरपंच, पंचायत चला रहे ‘रमे हुए खिलाड़ी’

इस पंचायत की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां के चुने हुए सरपंच केवल नाममात्र के हैं। उन्हें न तो पंचायत के विकास कार्यों की जानकारी है और न ही जमीनी हकीकत की; उनका काम केवल दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने तक सीमित रह गया है। पंचायत का पूरा नियंत्रण उन लोगों के हाथ में है जो खुद को पंचायत का अघोषित ‘मुखिया’ मानते हैं।

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ये तथाकथित मुखिया सरेआम चौक-चौराहों पर खड़े होकर खुलेआम व्यवस्था को चुनौती देते हैं। उनका दावा है कि भ्रष्टाचार को कोई नहीं रोक सकता, क्योंकि वे सचिव, इंजीनियर, सीईओ से लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों तक सभी को अपना ‘हिस्सा’ पहुंचाते हैं। उनका सीधा और बेखौफ कहना है कि अखबारों में खबरें छपने से उनका कुछ नहीं बिगड़ता, क्योंकि अधिकारी खुद ही मामले को दबा देते हैं।

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धरातल से गायब, केवल कागजों पर पूरे हुए प्रोजेक्ट

चोपना पंचायत में भ्रष्टाचार का स्तर इस कदर बढ़ चुका है कि कई निर्माण कार्य सिर्फ कागजों पर ही शुरू होकर वहीं पूरे हो गए हैं। पंचायत में युवाओं के लिए खेल का मैदान बनाया गया, लेकिन यह केवल सरकारी फाइलों में ही बनकर तैयार हुआ है। जमीन पर इसका कोई अस्तित्व नहीं है। पंचायत क्षेत्र में एक डैम का निर्माण किया गया था, लेकिन इसके निर्माण में इतनी अनियमितताएं हुईं कि मजबूरी में इसे तोड़ना पड़ गया। ग्रामीणों के लिए बनाया गया जलकूप भी केवल सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, जबकि वास्तविकता में ऐसा कोई जलकूप धरातल पर है ही नहीं।

पीएम आवास योजना में खुला खेल: 50 हजार में अपात्र हुए पात्र

घोटालों की इस सूची में सबसे गंभीर मामला प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का है। आरोप है कि इस योजना का लाभ उन गरीबों तक नहीं पहुंच रहा जो इसके असल हकदार हैं। खुलेआम 50-50 हजार रुपये की रिश्वत लेकर अपात्र लोगों को कागजों पर पात्र बनाकर योजना का लाभ दिया जा रहा है। ग्रामीणों का स्पष्ट दावा है कि यदि निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाए कि चोपना में किन-किन लोगों को आवास आवंटित हुए हैं, तो एक ऐसा उथल-पुथल मचाने वाला सच सामने आएगा जिसकी शासन-प्रशासन ने कल्पना भी नहीं की होगी।

प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग

चोपना पंचायत का दर्द पंचायत की ही फाइलों में दफन है। अब तक किसी भी बड़े अधिकारी का ध्यान इस ओर आकर्षित नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई ईमानदार अधिकारी इस पंचायत के घोटालों की फाइलें खोल ले, तो वह भ्रष्टाचार के मामलों की गिनती नहीं कर पाएगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या जिला कलेक्टर इस मामले का संज्ञान लेकर चोपना पंचायत में व्याप्त इस संगठित भ्रष्टाचार पर कोई कठोर कदम उठाते हैं, या सिस्टम के ये ‘रमे हुए खिलाड़ी’ एक बार फिर व्यवस्था को अपनी जेब में रखने में कामयाब हो जाते हैं।

अगले अंक में देखे:— पंचायत में हुए घोटाले का उजागर करेंगे!

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