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सारनी नगर पालिका का ‘नजरबंद जादू’ हुआ फेल: 17 लाख के स्वागत द्वार के नाम पर बड़ा घोटाला, जनता ने पकड़ी चोरी! – Madhya Pradesh Voice

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सारनी नगर पालिका का ‘नजरबंद जादू’ हुआ फेल: 17 लाख के स्वागत द्वार के नाम पर बड़ा घोटाला, जनता ने पकड़ी चोरी!


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27/04/2026 6:37 PM Total Views: 428449

सारनी। मध्य प्रदेश की ‘जादुई’ नगर पालिका परिषद सारनी का एक और अनोखा और शर्मनाक खेल अब जनता के सामने आ चुका है। स्वागत द्वार को लेकर चर्चा जोरों पर है कि नगर की सीमा के निर्धारण और सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों रुपये फूँकने की जो योजना बड़े जोर-शोर से शुरू की गई थी, वह अब खुलेआम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।

दिखावे का भूमिपूजन और बड़े-बड़े दावे

नगर पालिका ने सारनी की नगरीय सीमा प्रारंभ होने का संकेत देने के लिए दो स्वागत द्वार लगाने की योजना बनाई थी। इसके तहत “सारनी-दमुआ स्टेट हाईवे” पर गौशाला के समीप और “सारनी-आमला मार्ग” पर मोरडोंगरी पंचायत की सीमा के पास इन द्वारों का निर्माण होना था।

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इन दोनों स्वागत द्वारों के लिए “लगभग 17 लाख रुपये” का भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया गया। नगर पालिका अध्यक्ष किशोर बरदे, पार्षद छाया अतुलकर, प्रवीण सोनी, एल्डरमैन विनय मदने, गोलू राजपुत, राजू साहू, उपयंत्री रविंद्र वराठे, समय पाल सुनील सहारे, और दीपक अतुलकर सहित कई लोगों की मौजूदगी में पूरे तामझाम के साथ इस कार्य का भूमिपूजन किया गया। तब अध्यक्ष किशोर बरदे ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि इन द्वारों से नगर का सौंदर्यीकरण होगा और नागरिकों को सीमा का स्पष्ट संकेत मिलेगा।

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2 लाख का गेट और 17 लाख का बजट

नगर पालिका का असली ‘जादू’ तो निर्माण के बाद देखने को मिला है। आमला मार्ग (मोरडोंगरी रोड) पर एक स्वागत गेट का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। लेकिन 17 लाख के कुल बजट (यानी लगभग 8.5 लाख रुपये प्रति गेट) के हिसाब से जो भव्यता और गुणवत्ता इस गेट में होनी चाहिए थी, वह पूरी तरह नदारद है।

हैरानी की बात यह है कि सारणी–अमला मार्ग स्थित स्वागत द्वार रातों-रात बनकर तैयार हुए इस गेट को देखकर राह चलता “एक छोटा बच्चा भी यह बता दे कि इस गेट की लागत किसी भी हाल में 2 लाख रुपये से ज्यादा नहीं है।” न तो इसमें कोई विशेष वास्तुकला है, न ही उच्च गुणवत्ता का मटेरियल इस्तेमाल हुआ है। यह गेट चीख-चीख कर बता रहा है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर सरकारी खजाने में कैसे सेंध लगाई गई है।

आखिर किसकी जेब में गया बाकी का पैसा ?

नगर पालिका परिषद सारनी इस पूरे मामले में एक ‘नजरबंद जादू’ दिखाने की फिराक में थी। अधिकारियों और ठेकेदारों को लगा कि कागजों पर 17 लाख का बिल पास करवाकर वे आसानी से एक घटिया ढांचा खड़ा कर देंगे और किसी को भनक तक नहीं लगेगी।

किंतु, भ्रष्टाचार का यह जादू इस बार पूरी तरह बेअसर रहा। जनता अब जागरूक है और उनकी नजरों से यह घपला छिप नहीं सका। गेट की बदहाली और घटिया निर्माण ने इस पूरे घोटाले की पोल खोलकर रख दी है। अब शहर के आम नागरिक और राहगीर यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर 2 लाख के दिखने वाले इस साधारण गेट के लिए 17 लाख का भारी-भरकम बजट कैसे और क्यों पास किया गया? इस ‘जादुई’ बंदरबांट में किस-किस नेता और अधिकारी की जेबें गर्म हुई हैं, यह अब एक बड़ा सवाल बन चुका है।

इनका कहना है:—

  • मुझे इसकी लागत राशि की जानकारी नहीं है और स्वागत गेट में थोड़ा बहुत काम करना बाकी है
रविंद्र वराठे, उपयंत्री नगर पालिका परिषद सारणी 

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