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“मोटा भाई की छपास रोग से मुक्ति की संघर्ष: नतमस्तक होकर इज्जत का पुनर्निर्माण, खोई हुई आबरू पाने के लिए दबे-कुचले के चरण वंदन मे लगे – Madhya Pradesh Voice

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“मोटा भाई की छपास रोग से मुक्ति की संघर्ष: नतमस्तक होकर इज्जत का पुनर्निर्माण, खोई हुई आबरू पाने के लिए दबे-कुचले के चरण वंदन मे लगे


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15/02/2025 9:54 AM Total Views: 363639

बैतूल/सारनी। ‘चोर-चोर मौसेरे भाई’ मुहावरा इन दिनों जिले के श्रम पदाधिकारियों पर पूरी तरह चरितार्थ हो रहा है। 2024 में हुई दो संदिग्ध मौतों के कारण बैतूल जिला प्रदेशभर में सुर्खियों में बना हुआ है। 7 अक्टूबर 2024 को भाजपा मंडल उपाध्यक्ष स्वर्गीय रविंद्र देशमुख की आत्महत्या के बाद सामने आए 6 पन्नों के सुसाइड नोट ने इस बात की पुष्टि कर दी कि कैसे श्रम विभाग के कुछ भ्रष्टाचारियों ने अपनी ब्लैकमेलिंग और अड़ीबाजी से दो परिवारों को तबाह कर दिया। इन घटनाओं ने जिले के आम नागरिकों को झकझोर दिया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों पर आरोप थे, वे अब फिर से श्रम विभाग में बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यह देख जनता का गुस्सा फूट पड़ा है और वह श्रम संगठन से घृणा करने लगी है।

सुप्रीम कोर्ट की शरण में आरोपी, 28 फरवरी को सुनवाई

रविंद्र देशमुख आत्महत्या केस में आरोपी मोटा भाई समेत तीन श्रम पदाधिकारी पुलिस से बचने के लिए लगातार इधर-उधर भागते रहे। जबलपुर हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद इनामी आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लगातार टल रही सुनवाई अब 28 फरवरी को होनी है, जिससे यह देखना दिलचस्प होगा कि “बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी?”

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छपास रोग की चपेट में मोटा भाई

फरारी काटने के बाद मोटा भाई अब अपनी खोई हुई इज्जत बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। जिस जनता को कभी वह तुच्छ समझता था, आज उसी के चरण वंदन करने में संकोच नहीं कर रहा। कहीं त्रिशूल यात्रा हाईजैक करने की कोशिश, तो कहीं अटल जयंती मनाने की जबरदस्ती भागीदारी। हर जगह खुद को प्रकट कर फोटो खिंचवाना और उसे सोशल मीडिया पर धड़ाधड़ अपलोड करवाना इनकी दिनचर्या बन चुकी है। दसवां, तेरहवीं और अंतिम यात्रा तक में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा कर साधु बनने का स्वांग रचने वाले मोटा भाई ने बेशर्मी की सभी हदें पार कर दी हैं। अगर यही घटना किसी आम आदमी के साथ होती तो वह समाज में मुंह दिखाने से पहले सौ बार सोचता, लेकिन मोटा भाई ने इसे भी अवसर बना लिया है।

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गणेश बिहारी का तीखा तंज

गणेश बिहारी से किसी ने पूछा कि वर्तमान में सबसे खतरनाक रोग कौन सा है? उन्होंने तुरंत उत्तर दिया— “छपास रोग!” यह एक ऐसा वायरस है, जो मीडिया समाजसेवा के नाम पर ब्लैकमेलिंग करने वालों को तेजी से अपनी गिरफ्त में लेता है। मोटा भाई जैसे नामचीन चेहरे इसी छपास रोग से पीड़ित हैं। यह एक असाध्य बीमारी है, जिसका इलाज संभव नहीं, क्योंकि स्वयं रोगी इसे खत्म नहीं करना चाहता। आज मीडिया और समाजसेवा की आड़ में ब्लैकमेलिंग का काला कारोबार करने वाले स्वयंभू समाजसेवी बने घूम रहे हैं। ऐसी स्थिति में इन्हें चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।

बदलते समीकरण और शर्मनाक चाटुकारिता

भाजपा कार्यालय से जिस व्यक्ति को मोटा भाई ने बेइज्जती कर निकाला था, आज वह उसी को अपना अभिभावक मानने लगा है। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर इतनी भयंकर चाटुकारिता के पीछे क्या कारण है? राजनीति के चाणक्य भी इस स्थिति पर शर्मिंदा हो जाएं, लेकिन मोटा भाई को कोई फर्क नहीं पड़ता। अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पाने के लिए वह किसी भी स्तर तक गिरने को तैयार है।

जनता की अदालत का फैसला?

अब सवाल यह है कि जनता इस छपास रोग पीड़ित मोटा भाई और उसके भ्रष्ट गिरोह को कब तक झेलती रहेगी? सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई और जनता की प्रतिक्रिया ही तय करेगी कि इनका भविष्य क्या होगा। यह देखना रोचक होगा कि क्या बेशर्मी की हदें पार कर चुके इन चेहरों को कभी वास्तविक न्याय का सामना करना पड़ेगा या वे फिर किसी न किसी बहाने से अपने काले कारनामों को छुपाने में सफल होंगे?

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