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सारणी में स्थानीय युवाओं के हक पर डाका: ठेका कंपनियों और जयचंदों की मिलीभगत से बाहरी मजदूरों की घुसपैठ


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05/06/2026 11:17 PM Total Views: 420828

विधायक का 70% स्थानीय रोजगार का वादा निकला खोखला; केवल ज्ञापन तक सीमित रहे युवा, ठेका कंपनियां उठा रहीं सीधा फायदा

सारनी। क्षेत्र में 660 मेगावाट के नए क्रिटिकल पावर प्लांट की स्थापना से वर्षों से बेरोजगारी की मार झेल रहे सारनी के युवाओं की आंखों में रोजगार की एक नई उम्मीद जागी थी। लेकिन विडंबना देखिए कि ‘जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं’ की कहावत को चरितार्थ करते हुए क्षेत्र के ही दो शातिर युवाओं ने इन उम्मीदों पर पानी फेरना शुरू कर दिया है। ये तथाकथित चाटुकार युवा चंद रुपयों के लालच में बाहरी क्षेत्रों से सस्ते मजदूर लाकर ठेका कंपनियों को सप्लाई कर रहे हैं, जिससे स्थानीय बेरोजगारों के मुंह का निवाला छिन रहा है।

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50 बाहरी मजदूरों को निजी मकान में छिपाया

विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन स्थानीय दलालों द्वारा हाल ही में बाहर से लगभग 50 मजदूरों की एक खेप सारनी लाई गई है। इन मजदूरों को गुपचुप तरीके से सारनी के ही अलग–अलग स्थानों पर निजी मकान में ठहराया गया है। यह स्पष्ट रूप से उन 50 क्षेत्रीय युवाओं के हकों पर सीधा डाका है, जो सालों से इस प्रोजेक्ट के शुरू होने और रोजगार मिलने की बाट जोह रहे थे। जिन युवाओं को प्लांट में काम मिलना चाहिए था, उनकी जगह अब बाहरी मजदूर ले रहे हैं।

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विधायक की चेतावनी को कंपनियों ने दिखाया ठेंगा

स्थानीय विधायक द्वारा क्षेत्र के युवाओं से किया गया वादा अब पूरी तरह से हवा-हवाई साबित हो रहा है। कुछ समय पूर्व विधायक ने कंपनियों को सख्त हिदायत दी थी कि प्रोजेक्ट में 70% रोजगार हर हाल में स्थानीय लोगों को देना ही होगा। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ठेका कंपनियां विधायक की इस चेतावनी को दरकिनार कर अपनी मनमानी पर उतारू हैं। आश्चर्य की बात यह है कि विधायक महोदय भी अपनी इस चेतावनी को जमीन पर लागू करवाने की अपनी जिम्मेदारी भूलकर खामोश बैठे हैं। जनप्रतिनिधियों के इस मौन से ठेका कंपनियों के हौसले बुलंद हैं।

युवाओं की चुप्पी बन रही कंपनियों का हथियार

सारनी के लिए यह सालों बाद आया सबसे बड़ा रोजगार परक प्रोजेक्ट है। इसके बावजूद स्थानीय बेरोजगार युवाओं में वह आक्रोश और एकजुटता नजर नहीं आ रही जो अपने हक की लड़ाई के लिए होनी चाहिए। ‘संघर्ष ही जीवन की पूंजी है’, इस मूल मंत्र को भूलकर यहां का युवा वर्ग केवल एक दिन रील बनाकर ज्ञापन सौंपने और अधिकारियों के कोरे आश्वासनों से ही संतुष्ट होकर घरों में बैठ जाता है। हकों की लड़ाई के लिए न कोई धरना है, न कोई बड़ा आंदोलन।

युवाओं की इसी निष्क्रियता का सीधा फायदा ठेका कंपनियां उठा रही हैं। वे बेखौफ होकर दलालों के माध्यम से बाहरी मजदूरों को ला रही हैं और कम रेट पर काम करवा कर अपना मुनाफा बढ़ा रही हैं।

संघर्ष नहीं किया तो हाथ मलता रह जाएगा स्थानीय युवा

क्षेत्र के बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि समय रहते जनप्रतिनिधियों ने प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और ठेका कंपनियों पर कड़ा दबाव नहीं बनाया, तो यकीनन इस क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलना नामुमकिन हो जाएगा। समय आ गया है कि स्थानीय युवा केवल रील बनकर ज्ञापन सौंपने की औपचारिकता से बाहर निकलें और अपने रोजगार के हक के लिए लेवर-लॉ के अनुसार श्रमविभाग एवं लेबर-कोर्ट में शिकायत कर कागजी कार्यवाही के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर संगठित आवाज बुलंद करें, अन्यथा यह विशाल प्रोजेक्ट सारनी के युवाओं के लिए सिर्फ एक छलावा बनकर रह जाएगा।

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