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चोपना में प्रशासन का बुलडोजर: 14 दुकानें जमींदोज, लेकिन क्या 80% अतिक्रमण पर होगी कार्रवाई या एक पर गाज गिराकर प्रशासन ने झाड़ा पल्ला? – Madhya Pradesh Voice

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चोपना में प्रशासन का बुलडोजर: 14 दुकानें जमींदोज, लेकिन क्या 80% अतिक्रमण पर होगी कार्रवाई या एक पर गाज गिराकर प्रशासन ने झाड़ा पल्ला?


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28/02/2026 7:10 PM Total Views: 386007

सारणी। बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी तहसील अंतर्गत चोपना में प्रशासन ने सरकारी भूमि पर बने एक बड़े कॉम्प्लेक्स पर सख्त कार्रवाई करते हुए 14 दुकानों को जमींदोज कर दिया है। भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की इस मुहिम को अंजाम दिया गया। लेकिन, बुलडोजर की इस गर्जना के शांत होते ही कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आम जनता अब पूछ रही है कि क्या प्रशासन ने महज एक व्यक्ति पर कार्रवाई कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली है?

दशक पुराना मामला और प्रशासन का एक्शन

यह कार्रवाई नायब तहसीलदार वृत्त चोपना के न्यायालय से जुड़े एक पुराने मामले में की गई है। राजस्व प्रकरण (रा.प्र.क. 10/अ-68/वर्ष 2015-16) के तहत 6 अक्टूबर 2016 को एक आदेश पारित किया गया था। इस आदेश में मौजा चोपना-1 स्थित खसरा नंबर 102, रकबा 0.690 हेक्टेयर की ‘चरनोई’ (सरकारी गोचर) भूमि पर तपन विश्वास द्वारा अवैध कब्जा कर दुकान/मकान बनाने की पुष्टि हुई थी।

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न्यायालय ने तब 40,000 रुपये का अर्थदंड लगाते हुए एक सप्ताह में अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। लेकिन, न तो जुर्माना भरा गया और न ही अतिक्रमण हटा। अंततः प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए अंतिम नोटिस जारी किया और 27 फरवरी 2026 तक का समय दिया। मियाद पूरी होने के बाद, 28 फरवरी 2026 को प्रशासन ने बलपूर्वक पूरी 14 दुकानों को ढहा दिया। नोटिस के अनुसार इस पूरी कार्रवाई का खर्च भी संबंधित व्यक्ति से ही वसूला जाएगा।

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चोपना का कड़वा सच: 80% बाजार अतिक्रमण की जद में

तपन विश्वास पर हुई यह कार्रवाई भले ही कागजों पर प्रशासन की मुस्तैदी दिखाती हो, लेकिन चोपना का जमीनी सच कुछ और ही है। एक अनुमान के मुताबिक, चोपना नंबर-01 के बाजार क्षेत्र का लगभग 80% हिस्सा अतिक्रमण की नींव पर ही बसा हुआ है। साल 2016 में हुई एक बड़ी कार्रवाई के दौरान लगभग 59 मकानों और दुकानों को अतिक्रमण के लिए नोटिस जारी किए गए थे, जिन पर आगे क्या हुआ, यह कोई नहीं जानता। आज इसी क्षेत्र में एक से बढ़कर एक आलीशान मकान और व्यावसायिक इमारतें तनी हुई हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ बड़ी संस्थाएं भी पूरी तरह से सरकारी जमीन पर धड़ल्ले से भवन निर्माण कर संचालित किए जा रहे हैं।

क्या प्रशासन ने कर लिया है ‘पल्ला झाड़’ अभियान?

अब सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह है कि क्या प्रशासन का यह डंडा केवल एक ‘विशेष व्यक्ति’ तक ही सीमित रहेगा? जब बाजार का 80% हिस्सा अवैध है, तो उन पर प्रशासन की यह मेहरबानी क्यों?

क्या प्रशासन और कानून ने सिर्फ एक व्यक्ति पर बल प्रयोग कर अपनी फाइलों का पेट भर लिया है? क्या उन रसूखदारों के आलीशान मकानों और अवैध रूप से चल रहे संस्थान पर भी आगे कोई कार्रवाई होने की उम्मीद है, या फिर यह पूरी कवायद सिर्फ खानापूर्ति के लिए की गई थी? प्रशासन की यह ‘सिलेक्टिव’ कार्रवाई निष्पक्षता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।

इनका कहना है 

  • धारा 248 के तहत प्रकरण दर्ज था, हाईकोर्ट के ऑर्डर के तहत ग्राम चोपना में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण था एक कॉम्प्लेक्स में 14 दुकानें की अतिक्रमण को हटाया गया है।

संध्या रावत, तहसीलदार घोड़ाडोंगरी

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