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सारणी: खाकी की नाक के नीचे चल रहा ‘जुए का महाकुंभ’, सिवानपाठ दुलारा बना जुआरियों का स्वर्ग – Madhya Pradesh Voice

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सारणी: खाकी की नाक के नीचे चल रहा ‘जुए का महाकुंभ’, सिवानपाठ दुलारा बना जुआरियों का स्वर्ग


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23/12/2025 8:56 AM Total Views: 492771

तीन थानों की सीमा पर बेखौफ सजी महफिल; विकास और आशिक बने जुआ फड़ के नए ‘कुबेर’

5000 रुपये ट्रिप पर ढोए जा रहे खिलाड़ी, बिरयानी-शराब और ‘हारे का पैसा’ वापसी जैसी वीआईपी सुविधाएं

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सारणी/घोड़ाडोंगरी। जिले के पुलिस कप्तान जहाँ एक ओर बड़े-बड़े मामलों का खुलासा कर कानून व्यवस्था चुस्त होने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सारणी, घोड़ाडोंगरी और चोपना पुलिस की नाक के नीचे जुए का एक ऐसा ‘हाई-प्रोफाइल’ फड़ संचालित हो रहा है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और सूचना तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिवानपाठ दुलारा के जंगलों और खेतों की आड़ में चल रहे इस महा-जुए ने महज एक हफ्ते में ही लाखों के वारे-न्यारे कर दिए हैं।

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तीन थानों की ‘सीमा’ का फायदा, बेखौफ संचालन

सूत्रों के मुताबिक, सिवानपाठ दुलारा का यह क्षेत्र सारणी, घोड़ाडोंगरी और चोपना पुलिस की सीमाओं के बीच स्थित है, जिसका फायदा जुआ माफिया बखूबी उठा रहे हैं। यहाँ बेखौफ होकर लाखों के दांव लगाए जा रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि जहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहां रोज शाम सजने वाली इस महफिल की भनक स्थानीय पुलिस को नहीं लग पा रही है—या फिर यह जानबूझकर साधी गई चुप्पी है?

विकास और आशिक: फड़ के नए ‘किंगपिन’

इस अवैध कारोबार की बागडोर मुख्य रूप से विकास और आशिक नामक व्यक्तियों के हाथों में बताई जा रही है। बताया जाता है कि पिछले एक हफ्ते से लगातार चल रहे इस फड़ ने इन दोनों संचालकों को लखपति बना दिया है। इनके हौसले इतने बुलंद हैं कि खुलेआम प्रशासन को चुनौती देते हुए जुआ खिलाया जा रहा है।

बिरयानी, दारू और रोस्ट चिकन: जुआरियों के लिए ‘फाइव स्टार’ सुविधाएं

यह कोई साधारण जुआ नहीं है, बल्कि यहाँ जुआरियों की आवभगत किसी वीआईपी से कम नहीं की जाती। खेल के दौरान खिलाड़ियों को लुभाने और उन्हें रोके रखने के लिए फड़ पर ही मुफ्त बिरयानी, शराब और चिकन रोस्ट जैसी सुविधाएं परोसी जा रही हैं। इस चकाचौंध के कारण न केवल स्थानीय, बल्कि दूसरे जिलों के बड़े जुआरी भी यहाँ खिंचे चले आ रहे हैं।

गाड़ी मालिकों की चांदी: 5000 रुपये प्रति ट्रिप

जुए के इस फड़ ने परिवहन का एक नया अवैध रोजगार भी खड़ा कर दिया है। दूर-दराज और बाहरी जिलों से खिलाड़ियों (कस्टमर) को फड़ तक लाने के लिए लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल हो रहा है। गाड़ी मालिकों को प्रति ट्रिप 5000 रुपये नकद दिए जा रहे हैं, जो उनके लिए अंधाधुंध कमाई का जरिया बन गया है।

शातिर चाल: ‘हारे का पैसा’ वापसी का लालच

इस जुआ फड़ की सबसे खास और शातिर बात इसका ‘लॉयल्टी प्रोग्राम’ है। यहाँ हारने वाले खिलाड़ी को निराश नहीं किया जाता, बल्कि उसे वापसी के लिए ‘हारे का पैसा’ (किराया-भाड़ा और कुछ रकम) वापस दिया जाता है। इस सहानुभूति के चलते जुआरी बार-बार अपनी किस्मत आजमाने और बर्बाद होने यहाँ पहुँच रहे हैं।

जिले के कप्तान की साख पर बट्टा

जिले में कानून का राज स्थापित करने वाले पुलिस अधीक्षक के लिए यह फड़ एक खुली चुनौती है। जब बड़े अपराधी पकड़े जा रहे हैं, तो लाखों का यह खुला खेल खुफिया तंत्र की नजरों से कैसे ओझल है? क्या स्थानीय पुलिस की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा आयोजन संभव है? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब जिले की जनता और प्रशासन दोनों को तलाशना होगा।

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