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10 साल से फरार अंतर्राष्ट्रीय टाइगर तस्कर ‘यांगचेन’ गिरफ्तार; -7 डिग्री तापमान में MP टाइगर फोर्स का साहसिक ऑपरेशन – Madhya Pradesh Voice

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10 साल से फरार अंतर्राष्ट्रीय टाइगर तस्कर ‘यांगचेन’ गिरफ्तार; -7 डिग्री तापमान में MP टाइगर फोर्स का साहसिक ऑपरेशन


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05/12/2025 4:11 PM Total Views: 491992

भोपाल/नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश वन विभाग ने वन्यजीव अपराधों के खिलाफ एक ऐतिहासिक और निर्णायक जीत हासिल की है। ‘स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स’ (STSF) मध्य प्रदेश और ‘वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो’ (WCCB) नई दिल्ली की संयुक्त टीम ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए, 10 साल से फरार अंतर्राष्ट्रीय बाघ तस्कर यांगचेन लाचुंगपा को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी भारत-चीन सीमा के पास सिक्किम की बेहद दुर्गम और बर्फीली पहाड़ियों से की गई है।

-7 डिग्री तापमान और कठिन चुनौतियां: कैसे हुआ ‘ऑपरेशन लाचुंग’

यह ऑपरेशन किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था। यांगचेन लाचुंगपा, जो पिछले एक दशक से जांच एजेंसियों को चकमा दे रही थी, सिक्किम के उत्तर जिले के सुदूरवर्ती इलाके ‘लाचुंग’ (मंगन) में छिपी हुई थी। 2 दिसंबर 2025 को जब संयुक्त टीम ने दबिश दी, तब वहां का तापमान -7 डिग्री सेल्सियस था। कड़ाके की ठंड और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद, टीम ने योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी की। कई महीनों की कड़ी मेहनत और खुफिया जानकारी (Intelligence) जुटाने के बाद यह कार्रवाई संभव हो सकी। इस ऑपरेशन में स्थानीय सिक्किम पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही, जिसके सहयोग से टीम ने आरोपी को धर दबोचा।

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कौन है यांगचेन लाचुंगपा? (इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस)

यांगचेन लाचुंगपा मूल रूप से तिब्बत की निवासी है, जो भारत में मुख्य रूप से दिल्ली और सिक्किम में रहती थी। वह वन्यजीव अपराध की दुनिया का एक बड़ा नाम है। यांगचेन उस सिंडिकेट की एक अहम कड़ी है, जिसका जाल भारत, नेपाल, भूटान और चीन तक फैला हुआ है। उसके नेटवर्क और अपराध की गंभीरता को देखते हुए, भारत सरकार के अनुरोध पर इंटरपोल ने उसके खिलाफ ‘रेड नोटिस’ जारी किया था, ताकि दुनिया के किसी भी कोने से उसे गिरफ्तार किया जा सके। उसे पहली बार सितंबर 2017 में पकड़ा गया था, लेकिन कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलते ही वह फरार हो गई। 2019 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, तब से वह लगातार एजेंसियों को गुमराह कर रही थी।

क्या है 2015 का सतपुड़ा टाइगर रिजर्व मामला?

इस गिरफ्तारी की जड़ें जुलाई 2015 में नर्मदापुरम (होशंगाबाद) के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में हुए एक बड़े खुलासे से जुड़ी हैं। उस समय एसटीआर (STR) में बाघ और पेंगोलिन के अवैध शिकार का मामला सामने आया था। जांच में पता चला कि शिकार किए गए बाघों की हड्डियां और पेंगोलिन के स्केल नेपाल के रास्ते चीन भेजे जा रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन मुख्यालय ने इसकी जांच एसटीएसएफ (STSF) को सौंपी थी।

देश का पहला मामला: पूरा सिंडिकेट हुआ ध्वस्त

यह प्रकरण भारतीय वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक “मील का पत्थर” साबित हुआ है। यह देश का संभवतः पहला ऐसा मामला है जिसमें शिकारियों से लेकर कूरियर, बिचौलिए और अब अंतर्राष्ट्रीय सरगना तक—पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया गया है। इस गिरोह के अब तक 31 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूर्व में गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायालय द्वारा सजा भी सुनाई जा चुकी है, जो जांच एजेंसी की गुणवत्तापूर्ण विवेचना का प्रमाण है।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

गिरफ्तारी के बाद, आरोपी यांगचेन को गंगटोक के न्यायालय में पेश किया गया। वहां मध्य प्रदेश शासन की ओर से ठोस पक्ष रखते हुए 3 दिसंबर 2025 की रात को ट्रांजिट वारंट प्राप्त किया गया। उसे कड़ी सुरक्षा के बीच मध्य प्रदेश लाया जा रहा है। आज उसे नर्मदापुरम (होशंगाबाद) की विशेष अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड की मांग की जाएगी, ताकि सिंडिकेट के बचे हुए तारों और अंतर्राष्ट्रीय संपर्कों का खुलासा हो सके।

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