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बैतूल जेल में ‘तानाशाही’ का राज! जेलर तिवारी पर स्टाफ का सनसनीखेज आरोप, ‘कलेक्टर से ज़्यादा छुट्टियां, हरामखोर कहते हैं!’ – Madhya Pradesh Voice

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बैतूल जेल में ‘तानाशाही’ का राज! जेलर तिवारी पर स्टाफ का सनसनीखेज आरोप, ‘कलेक्टर से ज़्यादा छुट्टियां, हरामखोर कहते हैं!’


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18/04/2025 10:32 PM Total Views: 391677

” जेलर या हिटलर ” बैतूल जेल अधीक्षक की तानाशाही रवैय्या से स्टाफ परेशान, लापरवाही से एक बंदी ने लगाई फासी एक कैदी ने गवाई जान, सुधार केंद्र हुआ बदनाम!


बैतूल। बैतूल जिला जेल में हड़कंप! जेल स्टाफ ने कार्यवाहक जेल अधीक्षक योगेन्द्र कुमार तिवारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए महानिदेशक जेल मुख्यालय को लिखित शिकायत की है। स्टाफ का आरोप है कि जेलर तिवारी उन्हें नियमित मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं, जिससे जेल का माहौल दूषित हो गया है।

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‘अशोभनीय’ शब्दों पर भड़के अधीक्षक, प्रहरी को किया निलंबित!

सूत्रों के अनुसार, कार्यवाहक प्रमुख मुख्य प्रहरी मो इरशाद ने अधीक्षक से किसी बात को लेकर कुछ ‘अशोभनीय’ शब्द कह दिए, जिससे अधीक्षक आगबबूला हो गए। इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस हुई और कहासुनी इतनी बढ़ गई कि मो इरशाद अधीक्षक को मारने के लिए झपट पड़े।

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हालांकि, इस मुख्य घटना का कोई जिक्र किए बिना अधीक्षक महोदय ने मो इरशाद को एक अन्य प्रकरण में निलंबित कर दिया, जिसमें उनकी संलिप्तता स्पष्ट नहीं थी। इससे साफ जाहिर होता है कि अधीक्षक झूठे प्रकरण तैयार करने के आदी हैं।

‘चाय’ को बताया ‘मदिरा’, प्रहरी को किया प्रताड़ित!

एक अन्य घटना में, प्रहरी अजय दोहरे को निजी जातिगत भावनाओं के कारण ड्यूटी के उपरांत जेल गेट पर चाय पीने को गलत बताया गया। हद तो तब हो गई जब जेलर ने चाय को ‘लाल पेय पदार्थ (मदिरा)’ बताकर मनगढ़ंत प्रकरण बनाया और कर्मचारी से स्पष्टीकरण लिया। इस घटना से प्रहरी अजय दोहरे अत्यंत दुखी और असहाय महसूस कर रहे हैं।

“कलेक्टर से ज़्यादा छुट्टी, हरामखोर कहते हैं!”:

जेल स्टाफ ने अपनी शिकायत में कहा है कि जेलर तिवारी स्वेच्छाचारिता से कार्य करते हैं और करवाते हैं। कर्मचारियों को बिना किसी वैध कारण के घंटो कार्यालय में खड़ा कर अमर्यादित एवं अशोभनीय भाषा का प्रयोग कर परेशान करते हैं। स्टाफ ने आरोप लगाया है कि जेलर स्वयं प्रतिमाह अवकाश पर जाते हैं और मनमाने तरीके से विलंब से वापस आते हैं। अगर अवकाश अवधि के दस्तावेजों और मेन गेट आमद वापसी रजिस्टरों की जांच की जाए तो पता चलेगा कि हर बार कलेक्टर द्वारा स्वीकृत किए गए अवकाश से अधिक दिन उपभोग करने के बाद ही कर्तव्य पर उपस्थित होते हैं। स्टाफ ने आरोप लगाया कि जेलर अपने निजी अवकाश के दौरान एक सिपाही को साथ में ले जाते हैं, एवं उनकी अनुपस्थिति के दौरान भी एक सिपाही को बंगले पर ड्यूटी लगाई जाती है, जबकि यदि कोई महिला/पुरुष कर्मचारी अवकाश के लिए मांग करता है तो बल अपर्याप्त होना बताकर तमाम तरीकों से लज्जित करते हैं और कहते हैं कि “तुम्हारी कोई औकात नहीं है मेरे सामने खड़े होने की। तुम लोग हरामखोर हो, मुझे पता है तुम लोग कहां से आते हो।”

“वेतन रोक देते हैं, झूठे प्रकरण बनाकर फंसाते हैं!”:

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि यदि किसी कारणवश कोई कर्मचारी अपने कर्तव्य पर उपस्थित नहीं हो पाता है और वैध दस्तावेज प्रस्तुत करता है तब भी जेलर अनैतिक रूप से वेतन नहीं निकालते और कर्मचारी के खाते में अवकाश होने के उपरांत भी अवैतनिक किए जाने की कार्यवाही करते हैं, जिससे सभी कर्मचारी आर्थिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं।

चिकित्सक भी परेशान, बंदियों के उपचार में दिक्कत!

कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जेलर के अत्यंत निम्न स्तर के व्यवहार के कारण पहले ही संविदा जेल चिकित्सक डॉ राज पांडेय अपने कर्तव्य पर उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं, एवं अन्य जो मेडिकल स्टाफ कार्यरत है वे भी उनके दबाव में स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर पाते हैं जिससे जेल में बंदियों के उपचार संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं।

जेलर की लापरवाही से बंदी ने की आत्महत्या?

कर्मचारियों ने जेलर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी लापरवाही के चलते 12 जनवरी 2025 को एक बंदी संदीप सेमरे ने फांसी लगा ली। इस समय जेलर, कलेक्टर द्वारा स्वीकृत अवकाश के बाद बिना अवकाश स्वीकृत कराए मनमर्जी से अनुपस्थित थे और बंदी के फांसी लगाने की सूचना मिलने के बाद 12 जनवरी 2025 को प्रातः 05 बजे जेल पर उपस्थित हुए।

“तुम्हें फंसा दूंगा!”:

कर्मचारियों ने शिकायत में कहा है कि द्वारा समस्त स्टाफ को हमेशा धमकाया जाता है कि मैं तुम्हारे खिलाफ प्रकरण तैयार कर तुम्हारा नुकसान कर दूंगा और निजि द्वेष भावना से कई झूठे प्रकरण बनाकर कर्मचारियों को दंडित भी किया है। कर्मचारियों ने जेलर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने प्रहरी सुल्तान खान को एक पुराने प्रकरण में फंसा दिया, जबकि उस मामले में पहले ही निर्णय लिया जा चुका था।

कर्मचारियों में दहशत का माहौल!

इन घटनाओं के बाद बैतूल जेल के कर्मचारियों में दहशत का माहौल है। कर्मचारियों को डर है कि अगर उन्होंने अधीक्षक महोदय के खिलाफ आवाज उठाई तो उनके साथ भी ऐसा ही सलूक किया जाएगा।

क्या होगी कार्रवाई?

बैतूल जेल स्टाफ द्वारा की गई यह शिकायत बेहद गंभीर है। अब देखना यह है कि महानिदेशक जेल मुख्यालय इस मामले पर क्या कार्रवाई करते हैं और क्या बैतूल जेल में व्याप्त इस तानाशाही को खत्म किया जाता है या नहीं।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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