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‘ढाई सौ किलो का मुक्का और 10 हजार लोग’ : SDOP को विधायक की खुली धमकी – Madhya Pradesh Voice

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‘ढाई सौ किलो का मुक्का और 10 हजार लोग’ : SDOP को विधायक की खुली धमकी


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21/04/2026 2:34 PM Total Views: 420860

भोपाल। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की पिछोर सीट से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में विधायक का तेवर बेहद आक्रामक है और वे पुलिस अधिकारियों को सीधे तौर पर धमकाते नजर आ रहे हैं।

एसडीओपी के बंगले को गोबर से भरने का अल्टीमेटम

विधायक लोधी ने करैरा के एसडीओपी (SDOP) को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ, तो वे 10 हजार लोगों** को साथ लेकर उनके बंगले पर पहुंचेंगे और पूरे बंगले को गोबर से भरवा देंगे। विधायक यहीं नहीं रुके, उन्होंने फिल्मी अंदाज में अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए कहा: “मेरा मुक्का पहले ढाई किलो का था, लेकिन अब यह ढाई सौ किलो का हो गया है। मैं उन्हें (अधिकारियों को) बेचैन कर दूंगा।”

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विवाद की जड़: बेटे पर पुलिसिया कार्रवाई

इस पूरे गुस्से की वजह विधायक के बेटे से जुड़ा एक कानूनी मामला है। हाल ही में विधायक के बेटे ने अपनी “थार गाड़ी” से पांच लोगों को टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना के बाद पुलिस ने मामले में सख्ती दिखाई, जो विधायक को नागवार गुजरी।

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विधायक लोधी का आरोप है कि पुलिस प्रशासन उन्हें निशाना बना रहा है और निष्पक्ष कार्रवाई के बजाय किसी ‘ऊपरी दबाव’ में काम कर रहा है।

दिल्ली और ‘महाराज’ पर उठाए सवाल

विधायक ने इस मामले में सीधे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और क्षेत्रीय दिग्गजों का नाम लेकर सनसनी फैला दी है। उन्होंने एसपी (SP) से सवाल किया कि आखिर उन्हें इस केस में निर्देश कहाँ से मिल रहे हैं?

लोधी ने तंज कसते हुए पूछा— “क्या निर्देश पीएम मोदी भेज रहे हैं, अमित शाह भेज रहे हैं या फिर महाराज (ज्योतिरादित्य सिंधिया) भेज रहे हैं?”

उन्होंने नाराजगी जताई कि जब पार्टी का नेतृत्व भोपाल में मौजूद है, तो दिल्ली से हस्तक्षेप की बातें क्यों की जा रही हैं? उन्होंने पुलिस से पूछा कि ऐसे विशेष निर्देश केवल उनके ही मामले में क्यों आ रहे हैं?

15 दिन का अल्टीमेटम

विधायक प्रीतम लोधी ने प्रशासन को “15 दिनों का समय” दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे जांच में सहयोग कर रहे हैं, लेकिन इस मामले में उन्हें प्रशासन से लिखित या मौखिक स्पष्टीकरण चाहिए कि आखिर किसके इशारे पर उन पर दबाव बनाया जा रहा है।

सत्ताधारी दल के विधायक द्वारा पुलिस अधिकारियों को इस तरह सार्वजनिक रूप से धमकाना मध्य प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। अब देखना यह है कि संगठन इस अनुशासनहीनता पर क्या रुख अपनाता है और पुलिस प्रशासन इस धमकी का जवाब कैसे देता है।

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