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मौत के साये में नौनिहालों का भविष्य: चोपना का 40 वर्ष पुराना प्राथमिक विद्यालय बना जर्जर खंडहर – Madhya Pradesh Voice

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मौत के साये में नौनिहालों का भविष्य: चोपना का 40 वर्ष पुराना प्राथमिक विद्यालय बना जर्जर खंडहर


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30/07/2026 7:24 AM Total Views: 443707

प्रवीर कुमार, 7489579303

चोपना। सरकारी स्कूल गरीब और निर्धन परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं, लेकिन जब सिस्टम की लापरवाही और अधिकारियों की अनदेखी हावी हो जाए, तो शिक्षा का मंदिर ही बच्चों के लिए खतरे का सबब बन जाता है। ऐसा ही एक जीता-जागता और खौफनाक उदाहरण घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के ग्राम पंचायत चोपना में देखने को मिल रहा है। यहां का शासकीय प्राथमिक शाला (नंबर 1) अब एक जर्जर खंडहर में तब्दील हो चुका है, जहां मात्र चार बच्चों को शिक्षा देने के लिए दो शिक्षिकाएं और एक रसोइया तैनात हैं।

निजी स्कूलों की भेंट चढ़ा सरकारी स्कूल का अस्तित्व

आज से करीब 40 वर्ष पूर्व स्थापित इस ‘चोपना नंबर 1’ प्राथमिक शाला का अपना एक गौरवशाली इतिहास रहा है। एक समय था जब यहां सैकड़ों की तादाद में बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते थे और स्कूल परिसर बच्चों की चहचहाहट से गूंजता रहता था। लेकिन समय के साथ चोपना क्षेत्र की हर गली और मोहल्ले में निजी स्कूलों की बाढ़ आ गई। प्राइवेट स्कूलों की चकाचौंध और सरकारी तंत्र की उदासीनता के कारण इस स्कूल का अस्तित्व लगभग खत्म हो गया है और आज यह मात्र चार बच्चों तक सिमट कर रह गया है।

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कलेक्टर के दौरे में भी रहा उपेक्षित, जनप्रतिनिधियों ने साधी चुप्पी

हाल ही में जिले के कलेक्टर महोदय ने चोपना पंचायत का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था का तो जायजा लिया, लेकिन पंचायत भवन के ठीक पीछे स्थित इस खंडहरनुमा प्राथमिक शाला की ओर उनका ध्यान ही नहीं गया।

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सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि मौके पर मौजूद किसी भी स्थानीय जनप्रतिनिधि या शिक्षक ने कलेक्टर महोदय को इस जर्जर भवन की खस्ताहाल स्थिति से अवगत कराने की जहमत नहीं उठाई। यह चुप्पी किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसी है।

क्या मौत के साये में शिक्षा देना उचित है?

आज सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि क्या महज खानापूर्ति के लिए इन चार मासूम बच्चों को मौत के साये में बिठाकर शिक्षा देना न्यायसंगत है? भवन की दीवारें और छत इस कदर जर्जर हो चुके हैं कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। दो शिक्षिकाएं और एक महिला कर्मचारी भी हर दिन इसी डर के साये में अपना समय काट रही हैं।

समाधान की मांग: अन्य स्कूलों में हो विलय

जब स्कूल पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका है और छात्रों की संख्या न के बराबर है, तो प्रशासन को तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाने चाहिए। इस प्राथमिक शाला को वार्ड में संचालित हो रहे किसी अन्य सुरक्षित शासकीय स्कूल में मर्ज (विलय) कर देना चाहिए।

इससे न केवल इन चार बच्चों को अन्य सैकड़ों बच्चों के साथ एक सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा, बल्कि वे मौत के साये से भी बाहर आ सकेंगे। प्रशासन और शिक्षा विभाग को किसी अनहोनी का इंतज़ार किए बिना इस दिशा में तुरंत संज्ञान लेने की आवश्यकता है।

इनका कहना है :—

कक्षा 1 से आठ तक बीआरसी देखते है जिसमें जर्जर भवन और छात्रों की कमी को लेकर उनके माध्यम से जिले के अधिकारी तक जानकारी दे दी गई है, जैसे ही मरम्मत राशि आवंटित होगी उपयंत्री के माध्यम से मरम्मत कार्य किया जाएगा।

दिनेश मानकर, ब्लाक शिक्षा अधिकारी घोड़ाडोंगरी

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