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सारनी एक्सपोज़: “नशे से दूरी” के नारों के बीच धड़ल्ले से बिक रहा मौत का जहर, वार्ड नंबर 1 बना अवैध शराब का गढ़ – Madhya Pradesh Voice

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सारनी एक्सपोज़: “नशे से दूरी” के नारों के बीच धड़ल्ले से बिक रहा मौत का जहर, वार्ड नंबर 1 बना अवैध शराब का गढ़


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29/07/2026 10:05 AM Total Views: 499333

सारणी। जिले के कप्तान (पुलिस अधीक्षक) लगातार “नशे से दूरी है जरूरी” का नारा देकर नशा मुक्ति अभियान चला रहे हैं, ताकि समाज को नशे के चंगुल से बचाया जा सके। लेकिन, सारनी में इस अभियान की जमीनी हकीकत रोंगटे खड़े करने वाली है। पुलिस के दावों और अभियानों को धता बताते हुए, सारनी के वार्ड क्रमांक 1 की झुग्गी-बस्तियों में युवा पीढ़ी और मजदूरों को गुड़ व नवसागर से बनी जानलेवा कच्ची शराब खुलेआम परोसी जा रही है।

वाइन शॉप के पीछे चल रहा मौत का व्यापार

वार्ड क्रमांक 1 में स्थित वाइन शॉप के ठीक पीछे वाले मोहल्ले में कानून का कोई खौफ नजर नहीं आता। यहाँ संत्री बाई, बिहारी और शंकर जैसे लोग बेखौफ होकर अवैध शराब का कारोबार चला रहे हैं। हालात यह हैं कि इन लोगों के बीच ज्यादा से ज्यादा शराब बेचने की होड़ (कंपटीशन) मची है, जिसके चक्कर में ये चंद रुपयों के लालच में लोगों को जहरीली शराब के रूप में सीधे ‘मौत का घूंट’ पिला रहे हैं। यही नहीं सस्ते और नशीली जहर के चलते मोहल्ले में सस्ते नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है। सुबह दोपहर शाम और रात चारों पहर शराबियों के आवागमन और गाली, गलौज से मोहल्ले के बच्चे एवं महिलाओं का घर से निकलना दुश्वार हो चुका है।

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ऐसे तैयार होता है ‘मौत का कॉकटेल’

मुनाफाखोरी के लिए शराब माफिया किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। यह शराब सिर्फ कच्ची नहीं, बल्कि खतरनाक रसायनों और दवाओं का मिश्रण है। जिसमें जाजबोरी और विक्रमपुर से अवैध शराब की खेप (केन का लॉट) 50 रुपए बोतल थोक में लाई जाती है। शराब में तेज नशा पैदा करने के लिए रासायनिक ताड़ी में इस्तेमाल होने वाली प्रतिबंधित नशे की गोलियों—जैसे नाइट्रोवेट (Nitrabet) और प्रॉक्सीवॉन (Proxyvon)—का पाउडर पानी में घोलकर मिला दिया जाता है। यह जहरीला मिश्रण पीने वालों के नर्वस सिस्टम पर सीधा वार करता है, जिससे तुरंत तेज नशा और नींद का झोंका आता है। इससे लोगों को असली और कड़क शराब पीने का एहसास होता है, जबकि असल में वे जहर पी रहे होते हैं।

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निशाने पर हैं जोखिम भरे काम करने वाले मजदूर

इस काले कारोबार का सबसे बड़ा और आसान शिकार वे गरीब प्रवासी मजदूर बन रहे हैं, जो सारनी में डिस्मेंटल (तोड़फोड़) जैसे अत्यधिक हाई-रिस्क (High-Risk) कार्यों में अपनी जान हथेली पर रखकर मजदूरी करते हैं। दिनभर की थकान मिटाने और सस्ते दामों के लालच में ये मजदूर इस जहरीली शराब का सेवन कर रहे हैं। अवैध विक्रेता इन्हीं की मजबूरी और अज्ञानता का फायदा उठाकर अपनी जेबें भर रहे हैं।

किडनी और लिवर फेल होने का सीधा खतरा

चिकित्सकीय दृष्टिकोण से इस जहरीली शराब का सेवन जानलेवा है। कच्ची शराब में नवसागर और प्रतिबंधित दवाओं (नाइट्रोवेट/प्रॉक्सीवॉन) का सीधा मिश्रण शरीर के अंगों को तेजी से तबाह करता है। इसका सेवन करने वालों में किडनी और लिवर के पूरी तरह से फेल होने की अत्यधिक संभावना बनी रहती है।

वार्ड नंबर एक की ये गलियां अब सिर्फ अवैध शराब बिकने के लिए ही बदनाम नहीं हैं, बल्कि ये खुलेआम लोगों की जान से खिलवाड़ कर रही हैं। यदि समय रहते पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग ने इस जमीनी हकीकत को स्वीकार कर इन विक्रेताओं पर सख्त शिकंजा नहीं कसा, तो सारनी में किसी बड़े शराब कांड (Tragedy) से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन को अब नारों और अभियानों से बाहर निकलकर ठेके की शराब बिकवाने से ज्यादा अवैध और जहरीली शराब बेचने वाले पर त्वरित और सख्त जमीनी कार्रवाई करने की जरूरत है।

इनका कहना है:—

वार्ड क्रमांक 1 सेंट्रल बैंक के पीछे वाले मोहल्ले और इटा भट्टा में कच्ची खतरनाक रसायन युक्त शराब बेची जा रही है मैने लोकेशन लिख ली है। मै इसको दिखावा लेती हु और आज भी स्टाफ गया हुआ है लेकिन मैं नहीं आई, मामले पर कार्यवाही की जाएगी।

लीला सिंह मुकाती, सहायक जिला आबकारी अधिकारी, बैतूल (ADO)

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