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बैतूल स्वास्थ्य विभाग में ‘महाघोटाला’: CMHO डॉ. मनोज कुमार हुरमड़े पर लगे भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप, शासन ने थमाया नोटिस – Madhya Pradesh Voice

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बैतूल स्वास्थ्य विभाग में ‘महाघोटाला’: CMHO डॉ. मनोज कुमार हुरमड़े पर लगे भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप, शासन ने थमाया नोटिस


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19/07/2026 9:24 AM Total Views: 439292

बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर बड़े भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के कारण सुर्खियों में है। संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा ने बैतूल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज कुमार हुरमड़े को पद का दुरुपयोग करने, सरकारी धन का गबन करने और नियमों की धज्जियां उड़ाने के आरोप में नोटिस जारी किया है। इस खुलासे के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

संचालनालय द्वारा जारी आरोप पत्र में डॉ. हुरमड़े पर कई गंभीर और चौंकाने वाले मामले दर्ज किए गए हैं, जो विभाग में चल रहे ‘नौकरी और वेतन के खेल’ को उजागर करते हैं। वर्ष 2024-25 में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए शासन ने 5 जुलाई 2024 को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि भर्ती पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया या साक्षात्कार के जरिए होनी चाहिए। इसके बावजूद, डॉ. हुरमड़े ने बिना कोई विज्ञापन निकाले ‘ज्यूस इंटरप्राइजेस’ को सीधे कार्य सौंप दिया। यह सिविल सेवा आचरण नियमों का सीधा उल्लंघन है।

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यह आरोप सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है। जिले में केवल 250 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत थे, लेकिन डॉ. हुरमड़े ने लेखापाल भीमराव लोखंडे के साथ मिलकर दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में 450 कर्मचारियों का वेतन आहरित कर लिया। लगभग 200 ऐसे कर्मचारियों का वेतन निकाला गया, जिनका असल में कोई वजूद ही नहीं था। यह घोटाला विभाग के पिछले 2.14 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के मामले से भी बड़ा बताया जा रहा है।

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आरोप पत्र में स्पष्ट किया गया है कि भर्ती के लिए कोई विज्ञापन नहीं निकाला गया। इसके पीछे की मंशा दलालों और एजेंटों के माध्यम से प्रति व्यक्ति 1 लाख से 1.5 लाख रुपये वसूलना थी। साथ ही, आरोप है कि उन्होंने अपने ही रिश्तेदारों को नियमों को ताक पर रखकर नौकरी पर रख लिया।

पहले भी विवादों में रहा है कार्यकाल

डॉ. हुरमड़े के कार्यकाल में भ्रष्टाचार का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले उनके समय में ‘सार्थक ऐप’ (Sarthak App) से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है, जिसमें डॉक्टर अपनी ड्यूटी से 200 किलोमीटर दूर बैठकर भी ऐप के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। इन घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

प्रशासनिक एक्शन: 15 दिन का अल्टीमेटम

संचालनालय ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए डॉ. हुरमड़े को आरोप पत्र का 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब देने का निर्देश दिया है। उन्हें अपना पक्ष रखने और गवाह पेश करने का अवसर दिया गया है। यदि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जाएगी। उन पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 के उपनियम (i), (ii) और (iii) के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है।

इस महाघोटाले ने बैतूल स्वास्थ्य विभाग की छवि को पूरी तरह से धूमिल कर दिया है। अब जनता और शासन दोनों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस भ्रष्टाचार की जड़ें काटने के लिए सरकार आगे कितनी कठोर कार्रवाई करती है।

इनका कहना है

ऐसा कहना पूर्णतः निराधार है। सभी प्रक्रिया नियमानुसार की गयी है। जितने कर्मचारी काम कर रहे थे, उन्हीं का वेतन आहरण हुआ है। –

डॉ. मनोज हुरमाड़े, सीएमएचओ, बैतूल

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