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स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों की खुली पोल: शिक्षा के मंदिर में गंदगी का अंबार, बीमारियों के साये में सारणी का भविष्य – Madhya Pradesh Voice

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स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों की खुली पोल: शिक्षा के मंदिर में गंदगी का अंबार, बीमारियों के साये में सारणी का भविष्य


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08/07/2026 9:51 AM Total Views: 432481

नगर पालिका परिषद सारणी का उदासीन रवैया, शासकीय विद्यालय परिसर में पसरी गंदगी से विद्यार्थियों और शिक्षकों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा बड़ा खतरा।

सारनी। स्वस्थ शरीर और बेहतर शिक्षा ही किसी भी सशक्त युवा पीढ़ी और उज्ज्वल भविष्य की नींव होते हैं। यदि ये दोनों चीजें मजबूत हों, तो युवा अपने हर लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन, सारणी में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। स्वच्छता के नाम पर सुर्खियां बटोरने वाली और लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने वाली नगर पालिका परिषद सारणी अपने ही शहर के भविष्य (युवाओं) के स्वास्थ्य को लेकर घोर लापरवाही बरत रही है।

क्या है पूरा मामला?

नगर पालिका की अनदेखी और खोखले दावों का सबसे बड़ा उदाहरण सारणी का शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बना हुआ है, जो आज भी साफ-सफाई के भारी अभाव से जूझ रहा है। वर्तमान में मौसम तेजी से बदल रहा है। ऐसे में स्कूल के आसपास और शौचालयों में फैली भारी गंदगी संक्रमण और गंभीर बीमारियों को सीधा न्योता दे रही है।

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नगर पालिका क्षेत्र में साफ-सफाई को लेकर रुचि तो दिखा रही है, लेकिन यह केवल दिखावे और मुख्य मार्गों तक सीमित प्रतीत होती है। शिक्षा के इस मंदिर को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। इस अव्यवस्था और गंदगी की चपेट में आकर न केवल विद्यालय के सैकड़ों मासूम विद्यार्थी, बल्कि उन्हें शिक्षा देने वाले शिक्षक एवं शिक्षिकाएं भी गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं।

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प्राचार्य की गुहार, प्रशासन बेपरवाह

शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सारणी की प्राचार्य सरिता झारबडे ने इस गंभीर स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। प्रशासन की कार्यप्रणाली को उजागर करते हुए उन्होंने बताया:

“विद्यालय परिसर और विशेषकर शौचालयों के आसपास लगातार गंदगी बढ़ रही है। इसे लेकर मेरे द्वारा ठीक एक सप्ताह पूर्व ही नगर पालिका को साफ-सफाई के लिए बाकायदा लिखित आवेदन दिया गया था। इसके बावजूद, अब तक नगर पालिका प्रशासन द्वारा इस गंभीर समस्या की ओर कोई ध्यान आकर्षित नहीं किया गया है।”

प्राचार्य का स्पष्ट कहना है कि मौसम में हो रहे बदलाव और इस गंदगी के कारण विद्यालय में कई प्रकार की बीमारियां या संक्रमण फैलने की प्रबल आशंका बनी हुई है।

नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठते गंभीर सवाल

इस पूरी घटना ने नगर पालिका परिषद की जिम्मेदारी और नीयत पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बजट का सही उपयोग कहाँ? स्वच्छता के नाम पर जो लाखों-करोड़ों का भारी-भरकम बजट खर्च किया जा रहा है, उसका लाभ शहर के भविष्य (युवाओं) को क्यों नहीं मिल रहा?

क्या यह जिम्मेदारी नहीं? क्या शिक्षा के मंदिरों की साफ-सफाई और वहां स्वच्छता बनाए रखना नगर पालिका परिषद की प्राथमिक जिम्मेदारी नहीं है?

हादसे का इंतजार? क्या प्रशासन तब जागेगा जब कोई बड़ी बीमारी या संक्रामक महामारी विद्यालय के बच्चों को अपनी चपेट में ले लेगी?

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि लगातार उठती मांगों के बाद भी क्या नगर पालिका प्रशासन अपनी गहरी नींद से जागता है, या फिर सारणी के युवाओं का स्वास्थ्य और भविष्य यूं ही भगवान भरोसे छोड़ दिया जाएगा। समय रहते यदि विद्यालय परिसर में स्वच्छता अभियान नहीं चलाया गया, तो इसके गंभीर परिणाम पूरे शहर को भुगतने पड़ सकते हैं।

इनका कहना है:—

शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सारणी के परिसर में साफ सफाई को लेकर निर्देशित कर दिया गया है। जल्द से जल्द विद्यालय परिसर पर नियमित रूप से साफ सफाई की ओर ध्यान दिया जाएग।

किशोर वर्दे, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद सारणी 

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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