नमस्कार मध्यप्रदेश वॉइस न्यूज पोर्टल मे आपका स्वागत हैं, खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे  7489579303, 👉बैतूल जिले के हर तहसील में संवाददाता चाहिए। 📞 संपर्क करें।
सारनी का ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ या बदहाली का स्मारक? स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर मरीजों से छलावा! – Madhya Pradesh Voice

Madhya Pradesh Voice

Latest Online Breaking News

सारनी का ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ या बदहाली का स्मारक? स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर मरीजों से छलावा!


WhatsApp Icon

07/07/2026 1:09 AM Total Views: 489868

सारनी। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का नाम बदलकर ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ तो कर दिया है, लेकिन सारनी (पाठाखेड़ा) में यह सिर्फ एक दिखावटी शोपीस बनकर रह गया है। धरातल पर यहां की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से वेंटिलेटर पर हैं। मरीजों को इलाज के बजाय दर-दर की ठोकरें मिल रही हैं और स्टाफ सरकारी पगार पर नींद की झपकियां ले रहा है। यह स्थिति शासन और प्रशासन के उन तमाम दावों की पोल खोलती है, जिनमें ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं देने का ढिंढोरा पीटा जाता है।

यहां की जमीनी हकीकत बयां करती हैं।

पाथाखेड़ा का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अब मरीजों के इलाज का केंद्र कम और कर्मचारियों के आरामगाह में ज्यादा तब्दील हो गया है। मरीजों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात स्टाफ केवल अपनी पगार पक्की करने आता है। घंटों तक ओपीडी में डॉक्टर या जिम्मेदार कर्मचारी नदारद रहते हैं या नींद की झपकियां लेते हुए पाए जाते हैं। इलाज की आस में आए मरीजों को बिना उपचार के ही लौटना पड़ता है।

ताजा खबरों को देखने के लिए , यहाँ क्लिक करके हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें

‘शक्ल’ देखकर मिलती हैं दवाइयां, जीवनरक्षक इंजेक्शन नदारद

अस्पताल की कार्यप्रणाली में सबसे शर्मनाक पहलू यह सामने आया है कि यहां मरीजों की शक्ल और रसूख देखकर दवाइयां दी जाती हैं। आम और गरीब मरीजों को अक्सर बाहर के मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने की पर्ची थमा दी जाती है। बदलते मौसम में जहां बीमारियों का खतरा चरम पर है, वहीं इस अस्पताल में टिटनेस (TT) और रेबीज (Anti-Rabies) जैसी बुनियादी और आपातकालीन इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं हैं। मजबूरी में नगरवासियों और आसपास के ग्रामीणों को 15-20 किलोमीटर दूर घोड़ाडोंगरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का रुख करना पड़ता है।

Read Our Photo Story
यहाँ क्लिक करके हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

 गर्भवती महिलाओं की जान से हो रहा खिलवाड़

इस लचर व्यवस्था का सबसे बड़ा खामियाजा गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। प्रसव पीड़ा या जांच के लिए आने वाली महिलाओं को अक्सर अस्पताल के ताले लगे दरवाजों के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ता है। जब कंपाउंडर या नर्स की नींद खुलती है और वे आते हैं, तो बिना जांच किए ही महिलाओं को सीधे घोड़ाडोंगरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर कर दिया जाता है। इस घोर लापरवाही के कारण कई बार जच्चा और बच्चा दोनों की जान पर बन आती है, लेकिन प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठा है।

आंखों देखी हकीकत: सोमेश बड़वार की आपबीती

वार्ड क्रमांक एक के निवासी सोमेश बड़वार का मामला इस अस्पताल की कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। सोमेश अपने बच्चे को टिटनेस का इंजेक्शन लगवाने के लिए इस केंद्र पर पहुंचे थे। वहां मौजूद रिसेप्शनिस्ट ने उन्हें साफ शब्दों में बाहर से इंजेक्शन खरीदकर लाने को कह दिया।

जब सोमेश ने स्टाफ नर्स से इस अव्यवस्था की शिकायत की, तो नर्स ने गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए जवाब दिया, “ऊपर से ही इंजेक्शन नहीं भेजे जा रहे हैं, तो हम कहां से लाएंगे?”

शासन और प्रशासन की लचर व्यवस्था पर उठते सुलगते सवाल

पाथाखेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की यह दुर्दशा सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करती है।

नाम बदलने से क्या होगा? जब अस्पतालों में बुनियादी दवाइयां और इंजेक्शन ही नहीं हैं, तो उन्हें ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ का भव्य नाम देने का क्या औचित्य है?

स्टाफ पर कार्रवाई क्यों नहीं? ड्यूटी के समय सोने वाले और मरीजों से दुर्व्यवहार करने वाले लापरवाह कर्मचारियों पर स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी मेहरबान क्यों हैं?

सप्लाई चैन का बहाना या भ्रष्टाचार? अगर ‘ऊपर से’ टिटनेस और रेबीज के इंजेक्शन नहीं आ रहे हैं, तो इसका जिम्मेदार कौन है? क्या यह दवा खरीदी में किसी बड़े भ्रष्टाचार का संकेत है?

गर्भवती महिलाओं की मौत का इंतजार? क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या गर्भवती महिला की जान जाने का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही इस अस्पताल की व्यवस्था सुधारी जाएगी?

यह अस्पताल स्वास्थ्य विभाग की उस बीमार व्यवस्था का जीता-जागता उदाहरण है, जिसे खुद इलाज की सख्त जरूरत है। अगर प्रशासन ने समय रहते इस ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ की सुध नहीं ली, तो यह क्षेत्र के आम नागरिकों के लिए स्वास्थ्य का मंदिर नहीं, बल्कि बीमारियों और मुसीबतों का केंद्र ही साबित होगा।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


लाइव कैलेंडर

October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031