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आईएमपीसीएल के निजीकरण के खिलाफ भड़का आक्रोश: कर्मचारियों ने किया धरना-प्रदर्शन, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी – Madhya Pradesh Voice

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आईएमपीसीएल के निजीकरण के खिलाफ भड़का आक्रोश: कर्मचारियों ने किया धरना-प्रदर्शन, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी


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02/06/2026 11:24 AM Total Views: 438406

न्यूज़ डेस्क/नई दिल्ली। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अधीन संचालित और लंबे समय से मुनाफे में चल रही नवरत्न कंपनियों में शुमार ‘इंडियन मेडिसिन फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (आईएमपीसीएल – IMPCL) के निजीकरण का कड़ा विरोध शुरू हो गया है। केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ कंपनी के कर्मचारियों ने मोर्चा खोलते हुए फैक्ट्री गेट पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

इस आंदोलन को अब केवल कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, स्थानीय व्यापारियों और आम जनता का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिससे यह मुद्दा और भी गरमा गया है।

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आंदोलन के मुख्य बिंदु और आपत्तियां

धरना स्थल पर आयोजित विशाल सभा में वक्ताओं ने सरकार की इस नीति की कड़ी आलोचना की। प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे इस प्रकार हैं। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि आईएमपीसीएल कोई घाटे का सौदा नहीं है। यह लंबे समय से निरंतर लाभ कमाने वाली एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) की कंपनी है। आयुर्वेदिक दवाओं के उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादन के साथ-साथ इसने इस पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को संभाले रखा है।

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संपत्तियों के अवमूल्यन (Undervaluation) का गंभीर आरोप

कर्मचारियों ने आयुष मंत्रालय, नीति आयोग और वित्त मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े किए हैं। उनका सीधा आरोप है कि निजीकरण की इस प्रक्रिया में कंपनी की बेशकीमती भूमि, विशाल भवन, करोड़ों की मशीनरी और अन्य अचल संपत्तियों का वास्तविक बाजार मूल्य काफी कम आंका गया है, ताकि इसे निजी हाथों में आसानी से सौंपा जा सके।

इस फैसले से न केवल कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरियां दांव पर लग गई हैं, बल्कि इससे जुड़े हजारों स्थानीय परिवारों की आजीविका पर भी सीधा प्रहार होगा। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी दहशत है कि निजीकरण के बाद रोजगार के अवसर पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे।

सरकार की नीतियों के खिलाफ लामबंद हुआ समाज

इस धरने की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें समाज का हर वर्ग जुड़ रहा है। स्थानीय व्यापारियों और समाजसेवियों का मानना है कि आईएमपीसीएल केवल एक फैक्ट्री नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र की जीवन रेखा है। यदि इसे निजी हाथों में सौंपा गया, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा जाएगी।

सरकार को सीधी चेतावनी: “फैसला वापस लें, अन्यथा होगा उग्र आंदोलन”

प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों से मांग की है कि आईएमपीसीएल के निजीकरण के इस जनविरोधी फैसले को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। कर्मचारी यूनियनों और प्रदर्शनकारियों ने सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि उनकी जायज मांगों की अनदेखी की गई और निजीकरण की प्रक्रिया को नहीं रोका गया, तो वे अपने इस शांतिपूर्ण आंदोलन को एक उग्र और राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बदलने के लिए विवश होंगे।

फिलहाल, फैक्ट्री गेट पर तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आयुष मंत्रालय और सरकार इस बढ़ते जन-आक्रोश पर क्या कदम उठाती है।

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