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एमपीपीजीसीएल में नियमों को ताक पर रखकर 60 पार के बुजुर्ग मजदूरों से करवाया जा रहा जोखिम भरा काम – Madhya Pradesh Voice

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एमपीपीजीसीएल में नियमों को ताक पर रखकर 60 पार के बुजुर्ग मजदूरों से करवाया जा रहा जोखिम भरा काम


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15/07/2026 11:21 PM Total Views: 461106

सारनी। औद्योगिक क्षेत्र सारनी में जब से 660 मेगावाट की नई इकाई स्थापित करने का कार्य प्रारंभ हुआ है, तब से मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) प्रबंधन और सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विकास की आड़ में ठेकेदारों द्वारा मुनाफाखोरी और सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्लांट के भीतर एक बड़ा खेल चल रहा है, जहां चंद रुपयों बचाने के चक्कर में बुजुर्ग मजदूरों की जान जोखिम में डाली जा रही है।

नियमों का खुला उल्लंघन: 60 साल से ऊपर के मजदूर कर रहे काम

विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पावर प्लांट और कोल हैंडलिंग प्लांट (CHP) जैसे अत्यधिक संवेदनशील और जोखिम भरे क्षेत्रों में काम करने के कड़े नियम हैं। लेकिन, वर्तमान में पावर जनरेटिंग कंपनी में कार्यरत कुल ठेका मजदूरों में से लगभग 5% ऐसे हैं, जिनकी आयु 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है।

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नियमों के अनुसार भारी औद्योगिक क्षेत्रों में उम्र और शारीरिक योग्यता (मेडिकल फिटनेस) का विशेष ध्यान रखना अनिवार्य है। इसके बावजूद, इन बुजुर्ग मजदूरों को ठेकेदारों द्वारा प्लांट के अंदर धड़ल्ले से प्रवेश दिलाया जा रहा है।

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गेट पास और सुरक्षा विभाग की भूमिका पर उठते सवाल

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बिना उचित मेडिकल फिटनेस और आयु प्रमाण के इन मजदूरों को अंदर प्रवेश कैसे मिल रहा है?

कागजी परमिशन का खेल: कई मजदूरों को बिना वैध गेट पास के, केवल ‘कागजी परमिशन’ के आधार पर प्लांट और सीएचपी में प्रवेश करवाया जा रहा है।

मिलीभगत की आशंका: कुछ अकुशल और बुजुर्ग मजदूरों के बाकायदा गेट पास भी जारी कर दिए गए हैं। यह सीधे तौर पर सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और कांट्रेक्टर के साथ उनके अघोषित समझौते की ओर इशारा करता है।

नियामक मानकों को ताक पर रखकर बनाए गए इन गेट पास ने सुरक्षा विभाग की पोल खोल कर रख दी है। अगर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, तो प्लांट के अंदर काम कर रहे 60 पार के मजदूरों का यह आंकड़ा प्रबंधन की नींद उड़ा सकता है।

पेटी कांट्रैक्टरों की मनमानी और सस्ते श्रम का शोषण

मध्य प्रदेश शासन के इस महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र में सिविल कार्य के लिए मुख्य ठेकेदारों द्वारा छोटे स्तर पर ‘पेटी कांट्रेक्ट’ (Sub-contracts) दिए गए हैं। अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में पेटी कांट्रैक्टर सस्ते और छंटनी किए गए बुजुर्ग मजदूरों से भारी सिविल का कार्य करवा रहे हैं। भारी शारीरिक श्रम और ऊंचाई वाले कार्यों के लिए ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ अनिवार्य होता है, लेकिन ठेकेदारों द्वारा इसकी पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है।

प्रबंधन की तय हो जवाबदेही

श्रम और औद्योगिक सुरक्षा कानूनों के तहत, पेटी ठेकेदार मजदूरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होता है। लेकिन, यदि ठेकेदार सुरक्षा मानकों की अनदेखी करता है, तो मुख्य नियोक्ता यानी प्लांट प्रबंधन भी इसके लिए समान रूप से जवाबदेह है।

प्रबंधन और सुरक्षा विभाग इस तथ्य से मुंह नहीं मोड़ सकते कि पावर प्लांट जैसे भारी औद्योगिक क्षेत्र में यह सुनिश्चित करना उनकी कानूनी जिम्मेदारी है कि प्रत्येक मजदूर सौंपे गए काम के लिए मेडिकली फिट हो।

प्रशासन और उच्च अधिकारियों द्वारा एमपीपीसीएल निर्माण कार्य में चल रही इस लापरवाही की तत्काल उच्च स्तरीय जांच करें तो लगभग 5% ऐसे मजदूर सामने आएंगे जो 60 या 60 से ऊपर है। सुरक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए गेट पास और मजदूरों के मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट का कड़ाई से सत्यापन किया जाए, ताकि किसी बड़ी औद्योगिक दुर्घटना को समय रहते रोका जा सके।

इनका कहना है:—

प्लांट परिसर में कोई प्राइवेट हो या फिर टेंडर के अंतर्गत कार्य करने वाले मजदूर 60 वर्ष पूर्ण होने पर अंदर प्रवेश नहीं कर सकते है। सभी के दस्तावेजों के आधार पर उम्र देखकर ही गेट पास अप्रूवल किया जाता है।

शरद राघव, सुरक्षा अधिकारी एमपीपीजीसीएल सरनी

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