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आग का गोला बनी इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल, दिव्यांग युवक की दर्दनाक मौत; मौके पर ‘सिस्टम’ रहा मौजूद, फिर भी शव वाहन के लिए तरसते रहे परिजन – Madhya Pradesh Voice

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आग का गोला बनी इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल, दिव्यांग युवक की दर्दनाक मौत; मौके पर ‘सिस्टम’ रहा मौजूद, फिर भी शव वाहन के लिए तरसते रहे परिजन


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30/01/2026 11:06 PM Total Views: 492165

सारणी। नगर के जयस्तंभ चौक पर आज रात एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी जिसने पूरे शहर का दिल दहला दिया। जयस्तंभ से दमुआ मुख्य मार्ग पर पुलिया के पास एक इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल में अचानक आग लग जाने से एक दिव्यांग युवक की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई। घटना जितनी भयावह थी, उसके बाद की प्रशासनिक सुस्ती उतनी ही शर्मनाक रही।

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खौफनाक मंजर: कराहने की आवाज और धुएं का गुबार

घटना रात करीब 8:10 बजे की बताई जा रही है। जयस्तंभ चौक से दमुआ जाने वाले मार्ग पर एक बंद दुकान के पीछे अंधेरे में यह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक राहगीर वहां से गुजर रहा था तभी उसे एक पलटी हुई ट्राईसाइकिल के पीछे से किसी के कराहने की आवाज सुनाई दी।

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अनहोनी की आशंका में जब वह पास गया, तो देखा कि एक युवक के शरीर से धुआं निकल रहा था और वह आग की लपटों में घिरा था। राहगीर ने तुरंत शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया, लेकिन जब तक मदद पहुंचती, आग ने अपना विकराल रूप दिखा दिया था और युवक बुरी तरह जल चुका था। मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान सुनील लोखंडे (पिता बलराम लोखंडे), निवासी वार्ड क्रमांक 4, सारणी के रूप में हुई है।

सूचना मिलते ही सारणी थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और घटनास्थल को सील कर जांच शुरू कर दी। पुलिस हर एंगल से मामले की तफ्तीश कर रही है।

बैटरी ब्लास्ट की आशंका,आत्मदाह का संदेह: 

स्थानीय लोगों का एक समूह मान रहा है कि इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल की बैटरी में शॉर्ट सर्किट या ब्लास्ट होने से आग लगी, जिससे सुनील को संभलने का मौका नहीं मिला। वहीं, कुछ दबी जुबान में इसे खुद को आग लगाने (आत्महत्या) का मामला भी बता रहे हैं। असली वजह फॉरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आ पाएगी। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

संवेदनहीनता की हद: शव वाहन के लिए 1 घंटे तक तरसते रहे परिजन

इस पूरी घटना का सबसे दुखद पहलू प्रशासनिक अव्यवस्था के रूप में सामने आया। घटना की खबर लगते ही नगर पालिका अध्यक्ष और नगर पालिका के कई कर्मचारी मौके पर पहुंच गए थे। जनप्रतिनिधियों और सरकारी मुलाजिमों की मौजूदगी के बावजूद, “सिस्टम” पूरी तरह लाचार नजर आया।

मृतक के परिजन अपने बेटे का शव उठाने के लिए बिलखते रहे, शव मुंह के बल पड़ा रहा लेकिन शव वाहन सूचना देने के 1 घंटे बाद मौके पर पहुंचा। यह देरी तब हुई जब शहर के प्रथम नागरिक (नपा अध्यक्ष) स्वयं घटनास्थल पर मौजूद थे। लोगों का कहना है कि अगर वीआईपी मौजूदगी में यह हाल है, तो आम आदमी की सुध लेने वाला कौन है? परिजनों की चीत्कार और प्रशासन की यह सुस्ती वहां मौजूद भीड़ में चर्चा और आक्रोश का विषय बनी रही।

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