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‘डीएसपी के साले’ की संदिग्ध मौत से हड़कंप: पिपलानी थाने का घेराव, पुलिस पर हत्या का आरोप : कुणबी समाज और कांग्रेस ने घेरा प्रशासन – Madhya Pradesh Voice

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‘डीएसपी के साले’ की संदिग्ध मौत से हड़कंप: पिपलानी थाने का घेराव, पुलिस पर हत्या का आरोप : कुणबी समाज और कांग्रेस ने घेरा प्रशासन


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11/10/2025 11:52 AM Total Views: 491886

भोपाल। राजधानी भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र में युवक उदित गायकी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने एक बड़ा सियासी और सामाजिक बवाल खड़ा कर दिया है। मृतक के परिजन और कुणबी समाज के सैकड़ों लोगों ने शुक्रवार रात पिपलानी थाने का घेराव कर पुलिसकर्मियों पर सीधे हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की। यह मामला तब और भी गरमा गया जब यह खुलासा हुआ कि मृतक छात्र एक डीएसपी का साला है। पुलिस पर आरोप है कि वह मामले को दबाने और अपनी छवि बचाने के लिए मौत को ‘अटैक’ बताने पर जोर दे रही है, जबकि परिजनों का दावा है कि उदित की मौत पुलिसकर्मियों की निर्मम पिटाई से हुई है।

बैतूल के होनहार बेटे का संदिग्ध अंत:

मृतक उदित गायकी मूल रूप से बैतूल जिले का रहने वाला था और एक बेहद होनहार छात्र था। उसने हाल ही में वीआईटी कॉलेज से बीटेक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और गुरुवार को ही उसे अपनी डिग्री मिली थी। इस खुशी के जश्न में वह अपने दोस्तों के साथ था, तभी उसे पुलिस ने कथित तौर पर पकड़ा था। परिजनों के अनुसार, उदित को बेंगलुरु की दो प्रतिष्ठित कंपनियों से सालाना दस लाख रुपये और उससे अधिक के आकर्षक वेतन पैकेज वाली नौकरी के प्रस्ताव भी मिल चुके थे। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था, और उसके परिवार ने उसके उज्ज्वल भविष्य के अनमोल सपने संजोए थे, जो अब इस दुखद घटना के बाद अधूरे रह गए हैं।

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डीएसपी के रिश्तेदार की मौत, पुलिस पर गंभीर आरोप:

इस मामले की संवेदनशीलता तब कई गुना बढ़ गई जब यह सामने आया कि मृतक उदित गायकी के जीजा केतन अडलक बालाघाट में हॉकफोर्स में उप सेनानी (डीएसपी) के पद पर पदस्थ हैं। बावजूद इसके, परिजनों का आरोप है कि पुलिस अधिकारी दोषी आरक्षकों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं और मौत को मारपीट की बजाय स्वाभाविक ‘अटैक’ बताने का दबाव बना रहे हैं। समाज के लोगों का स्पष्ट आरोप है कि पुलिसकर्मियों की अमानवीय मारपीट ही उदित की मौत का कारण बनी है।

थाने का घेराव, कांग्रेस नेता की हुंकार:

उदित की मौत के बाद कुणबी समाज के सैकड़ों लोग शुक्रवार रात भोपाल के पिपलानी थाने पहुंचे और ‘पुलिस मुर्दाबाद’ के नारों के साथ जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज नहीं होता, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

इस घेराव में बैतूल से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे भी शामिल हुए। उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, “मध्य प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और पुलिस अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए अपने ही नागरिकों पर अत्याचार कर रही है। यह बेहद निंदनीय है।” पांसे ने भी दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी कार्रवाई, पुलिस की छवि पर सवाल:

सूत्रों के अनुसार, फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद, निलंबित दोनों आरक्षकों पर हत्या का प्रकरण दर्ज किए जाने की तैयारी चल रही है। हालांकि, पुलिस विभाग के भीतर ही कुछ अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ऐसा करने से पुलिस की छवि को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

यह घटना न केवल एक होनहार युवा के असामयिक निधन का दुखद किस्सा है, बल्कि पुलिस की जवाबदेही, मानवाधिकारों के हनन और कानून के समक्ष समानता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। सभी की निगाहें अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली पुलिस कार्रवाई पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि क्या न्याय की जीत होती है या रसूख और पद का प्रभाव।

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