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सारणी में बेजुबानों की मौत का सिलसिला जारी: 15 दिन में दूसरे गोवंश की दर्दनाक मौत – Madhya Pradesh Voice

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सारणी में बेजुबानों की मौत का सिलसिला जारी: 15 दिन में दूसरे गोवंश की दर्दनाक मौत


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22/07/2026 1:28 AM Total Views: 440156

सड़कों पर बहता बेजुबानों का खून: शासन, प्रशासन के साथ-साथ पशुपालक भी बराबर के जिम्मेदार

सारणी। मध्य प्रदेश के सारणी क्षेत्र में सड़कों पर बेजुबान गोवंश की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शासन-प्रशासन के खोखले वादे और पशुपालकों की घोर लापरवाही के कारण मुख्य मार्ग गोवंशों के लिए कब्रगाह बनते जा रहे हैं। मंगलवार रात लगभग 11: 15 बजे बगडोना स्थित बालाजी सुपर बाजार के सामने हाईवे पर एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला, जहां एक बेकाबू ट्रक ने सड़क पर बैठे गोवंश को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए ट्रक को मौके पर ही रोक लिया और सारणी थाना पुलिस को सूचना दी। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने वाहन को जब्त कर लिया है और उसे पाथाखेड़ा चौकी ले जाया गया है, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। महज 15 दिनों के भीतर इस सारणी नपा क्षेत्र में यह दूसरी घटना है, जो प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली और खोखले दावों की पोल खोल रही है।

🔴 अतीत के पन्ने: जब 12 गोवंशों की गई थी जान

यह कोई पहली घटना नहीं है। ठीक 15 दिन पूर्व दमुआ नाके के पास भी एक वाहन से टकराकर एक गोवंश की जान जा चुकी है। लेकिन इससे भी भयावह घटना लगभग 1 वर्ष पूर्व बागडोना में ही घटी थी, जब एक बेकाबू ट्रक ने लगभग 12 गोवंशों को बुरी तरह कुचल दिया था। उस हृदय विदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था और हिंदू संगठनों ने सड़कों पर उतरकर भारी विरोध प्रदर्शन किया था।

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🔴 हवा-हवाई साबित हुए कलेक्टर के आदेश

पिछले वर्ष हुए उग्र विरोध प्रदर्शन के बाद जिला कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त निर्देश जारी किए थे। जिसमें नगर पालिका प्रशासन को सड़कों पर बैठे गोवंशों को सुरक्षित स्थानों या गौशालाओं में भेजने के सख्त निर्देश दिए गए थे। पशुपालकों पर पालतू जानवरों को आवारा छोड़ने पर भारी जुर्माना लगाने की बात कही गई थी।

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लेकिन वर्तमान स्थिति यहा हुई की शुरुआत के कुछ दिनों तक इन आदेशों का पालन होता दिखा, लेकिन महज 3 महीने बाद ही स्थिति ‘ढाक के तीन पात’ वाली हो गई। आज फिर से सड़कें गोवंशों से अटी पड़ी हैं और नतीजा हम 15 दिन के भीतर दो मौतों के रूप में देख रहे हैं।

🔴 आखिर इस हत्या का जिम्मेदार कौन?

गोवंश की इस दुर्दशा और लगातार हो रही मौतों के लिए किसी एक को नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए क्योंकि कलेक्टर के निर्देशों को ठंडे बस्ते में डालना प्रशासन की सबसे बड़ी विफलता है। गोवंश को सड़कों से हटाकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का अभियान पूरी तरह से बंद हो चुका है। और सबसे बड़े दोषियों में वो पशुपालक भी शामिल हैं जो दूध दुहने के बाद अपने गोवंश को बेसहारा सड़कों पर मरने के लिए छोड़ देते हैं। जब तक ऐसे मालिकों पर चिन्हित करके भारी जुर्माना और एफआईआर दर्ज नहीं होगी, यह सिलसिला नहीं थमेगा। जब तक हाईवे पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार पर लगाम कसने में ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। रात के अंधेरे में ओवरस्पीडिंग इन बेजुबानों की जान ले रही है।

सारणी और बगडोना की सड़कों पर गोवंश का खून बहना एक गंभीर चेतावनी है। यदि शासन, स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने अभी भी नींद से जागकर ठोस कदम नहीं उठाए, और आवारा छोड़ने वाले मालिकों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, तो भविष्य में ऐसी और भी दर्दनाक घटनाएं घटित होती रहेंगी। बेजुबानों की रक्षा केवल कागजी आदेशों से नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत पर सख्त कार्रवाई से ही संभव है।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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