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लापरवाही की ‘सारणी’: 70 लाख का जनरेटर धूल खा रहा, मात्र 80 हजार के मेंटेनेंस बिना ठप पड़ा नपा का कामकाज, गर्मी और उमस में पसीने से तर-बतर हो रहे कर्मचारी और हितग्राही – Madhya Pradesh Voice

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लापरवाही की ‘सारणी’: 70 लाख का जनरेटर धूल खा रहा, मात्र 80 हजार के मेंटेनेंस बिना ठप पड़ा नपा का कामकाज, गर्मी और उमस में पसीने से तर-बतर हो रहे कर्मचारी और हितग्राही


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25/06/2026 1:47 PM Total Views: 428280

बिजली गुल होते ही बंद हो रहे सरकारी कंप्यूटर, दूर-दराज से आए लोग बिना काम लौट रहे वापस

बैतूल/सारनी। एक तरफ जहां पूरा इलाका भीषण गर्मी और उमस की मार झेल रहा है, वहीं दूसरी तरफ सारणी नगरपालिका परिषद में प्रशासनिक उदासीनता और घोर लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी पैसों का किस कदर दुरुपयोग होता है, इसकी बानगी यहां साफ देखी जा सकती है। नगरपालिका कार्यालय में बिजली गुल होने पर बैकअप के लिए करीब 70 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च कर एक बड़ा डीजल जनरेटर (डीजी) लगाया गया था, जो आज प्रशासनिक अनदेखी के कारण कबाड़ में तब्दील होने की कगार पर है। आश्चर्य की बात यह है कि यह कीमती जनरेटर पिछले कई दिनों से मात्र 80 हजार रुपये के मेंटेनेंस (रखरखाव) के अभाव में बंद पड़ा है।

कमरे में ‘अंगारे’, पसीने से तर-बतर कर्मचारी

नगरपालिका परिषद में काम करने वाले कर्मचारी इस भीषण उमस और गर्मी के बीच बंद कमरों में काम करने को मजबूर हैं। बिजली कटौती होते ही कार्यालय परिसर किसी भट्टी की तरह तपने लगता है। उमस के कारण न तो पंखे चलते हैं और न ही कूलर। इस दमघोंटू माहौल में कर्मचारी जैसे-तैसे बैठकर शासकीय कार्यों को निपटाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।

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जनता परेशान: बिना काम कराए लौटने को मजबूर हितग्राही

इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता और हितग्राहियों को भुगतना पड़ रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग दूर-दराज के क्षेत्रों से अपने जरूरी दस्तावेज (जैसे जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, राशन कार्ड, आधार सुधार या अन्य आवश्यक कार्य) बनवाने या सुधरवाने के लिए नगरपालिका आते हैं। हालत यह है कि जैसे ही बिजली गुल होती है, सारे कंप्यूटर और सर्वर ठप हो जाते हैं। घंटों इंतजार करने के बाद भी जब बिजली नहीं आती, तो हितग्राहियों को बिना काम करवाए ही मायूस होकर वापस लौटना पड़ता है। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।

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70 लाख के सिस्टम पर 80 हजार का ‘ग्रहण’

जनता के टैक्स के पैसों से 70 लाख रुपये का डीजी सेट इसलिए खरीदा गया था ताकि आपात स्थिति में भी शासकीय कार्य प्रभावित न हों और आम जनता को परेशानी न हो। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की सुस्ती के चलते मात्र 80 हजार रुपये का फंड जारी न होने से यह पूरी व्यवस्था ठप पड़ी है। लाखों की मशीनरी बंद पड़े-पड़े खराब हो रही है, लेकिन प्रबंधन मौन साधे बैठा है।

उठ रहे हैं गंभीर सवाल

इस पूरी अव्यवस्था ने नगरपालिका परिषद की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि जब बजट में लाखों-करोड़ों रुपये के प्रावधान होते हैं, तो मात्र 80 हजार रुपये के मेंटेनेंस के लिए फाइल क्यों अटकी हुई है? जनता को परेशान करने और शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने वाली इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है?

स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने मांग की है कि इस मामले को संज्ञान में लेते हुए जल्द से जल्द जनरेटर को सुधारा जाए, ताकि कर्मचारियों और कार्यालय आने वाले हितग्राहियों को इस नारकीय स्थिति से निजात मिल सके।

इनका कहना है:—

नया डिजी अभी नहीं लगेगा सिर्फ पैनल बुलाया है लगभग 60 हजार तक आयेगा और आज या जल ठीक कर देंगे।

📌 कमलेश पटेल उपयंत्री विद्युत विभाग नगर पालिका सारणी

अध्यक्ष जी ने बोला है नया लेलो  मै अभी नया डिजी देख रहा हु, फिलहाल अभी एक पैनल बुलाया है लगभग 65 हजार का जो कि डिजी में लगवाकर ठीक कर दिया जाएगा।

📌श्रीपत काटोलकर, लिपिक विद्युत शाखा

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