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तमिलनाडु कस्टोडियल डेथ: ‘रक्षक ही भक्षक बने’, साथनकुलम मामले में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा – Madhya Pradesh Voice

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तमिलनाडु कस्टोडियल डेथ: ‘रक्षक ही भक्षक बने’, साथनकुलम मामले में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा


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07/04/2026 4:18 PM Total Views: 492401

मदुरै। तमिलनाडु के बहुचर्चित और रूह कंपा देने वाले साथनकुलम कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) मामले में 6 साल बाद न्याय की जीत हुई है। सोमवार, 6 अप्रैल 2026 को मदुरै की फर्स्ट एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी 9 दोषी पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने इस क्रूर घटना को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभ) श्रेणी में रखा है।

अदालत के फैसले के मुख्य बिंदु

तत्कालीन इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर के. बालकृष्णन, पी. रघु गणेश और अन्य कांस्टेबलों सहित सभी 9 दोषियों को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी मानते हुए मृत्युदंड दिया गया है। अदालत ने दोषियों पर कुल 1.40 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह राशि पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी। इस मामले में कुल 10 पुलिसकर्मी आरोपी थे, जिनमें से एक (स्पेशल सब-इंस्पेक्टर पॉलदुरई) की अगस्त 2020 में ट्रायल के दौरान कोरोना संक्रमण से मौत हो गई थी।

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क्या था पूरा मामला?

यह दर्दनाक घटना जून 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान हुई थी। थूथुकुडी जिले के साथनकुलम में एक मोबाइल कारोबारी पी. जयराज (58 वर्ष) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31 वर्ष) को पुलिस ने महज इसलिए गिरफ्तार किया था क्योंकि उन पर तय समय के बाद भी अपनी दुकान खुली रखने का आरोप था।

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हिरासत के दौरान 19 और 20 जून की दरमियानी रात दोनों पिता-पुत्र को पुलिस स्टेशन में निर्दयता से पीटा गया और अमानवीय यातनाएं दी गईं। गंभीर चोटों के कारण अस्पताल में इलाज के दौरान 22 और 23 जून को दोनों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और इसके खिलाफ सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक भारी जनआक्रोश देखने को मिला था।

“खेत को बाड़ ने ही खा लिया” – अदालत की सख्त टिप्पणियां

जज जी. मुथुकुमारन ने सजा सुनाते हुए बेहद सख्त लहजे में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। फैसले की मुख्य टिप्पणियां में अदालत ने कहा कि जिन पर आम जनता की रक्षा की जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही अपने पद का दुरुपयोग किया। यह ऐसा मामला है जैसे “खेत की बाड़ ही फसल को खा जाए।” जज ने कहा कि यह एक ऐसा जघन्य अपराध है जिसने समाज की सामूहिक अंतरात्मा को हिला कर रख दिया है।

पिता और पुत्र दोनों की एक साथ निर्मम हत्या करके पुलिस ने एक पूरे परिवार की बुनियाद ही खत्म कर दी। अदालत ने जोर देकर कहा कि यह सजा एक नज़ीर बननी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी कोई क्रूरता दोबारा न हो।

न्याय की लंबी लड़ाई और सीबीआई जांच

शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की थी, लेकिन मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के स्वतः संज्ञान लेने और भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी। सीबीआई ने तेजी दिखाते हुए 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दायर की। पिछले लगभग 6 वर्षों में अदालत के सामने कुल 105 गवाहों को पेश किया गया, जिसके बाद वैज्ञानिक सबूतों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने यह ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है।

 

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