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गर्भवती महिलाओं की जांच में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई, तीन सीएचओ की सेवा समाप्ति की अनुशंसा – Madhya Pradesh Voice

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गर्भवती महिलाओं की जांच में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई, तीन सीएचओ की सेवा समाप्ति की अनुशंसा


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15/01/2026 12:01 AM Total Views: 339098

बैतूल। जिले में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, पंजीयन और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के चिन्हांकन में कोताही बरतने पर स्वास्थ्य अमले के विरुद्ध बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। यह मामला 13 जनवरी को कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी की अध्यक्षता में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में उजागर हुआ।

समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच नहीं की जा रही थी, हाई रिस्क मामलों की पहचान समय पर नहीं हो रही थी और आवश्यक स्वास्थ्य रिकॉर्ड भी अधूरे पाए गए। कलेक्टर ने इसे अत्यंत गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

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तीन सीएचओ की बर्खास्तगी की अनुशंसा

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े ने जांच के बाद तीन सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। इनमें मोनिका भूमरकर (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, बोदी जूनामानी), ज्योति धोटे (डेढ़पानी), संतोष बडकुले (चांदू रातामाटी) शामिल हैं।

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सीएमएचओ ने इन तीनों को कार्य के प्रति उदासीनता और गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए कलेक्टर से सेवा समाप्त (बर्खास्त) करने की अनुशंसा की है।

अन्य अधिकारियों पर भी गिरी गाज

इसके अलावा, सात अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है कि क्यों न उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

वहीं, तीन एएनएम संध्या कालभोर, उर्मिला इवने, गीता रघुवंशी पर भी कार्रवाई करते हुए उनकी दो-दो वेतन वृद्धि रोकी गई है। इन पर आरोप है कि इन्होंने गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन नहीं किया और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर लापरवाही बरती।इसके अतिरिक्त, तीन अन्य एएनएम को भी कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

कलेक्टर की सख्त निगरानी, मातृ मृत्यु दर पर नियंत्रण का प्रयास

कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मातृ स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान और उचित रेफरल सिस्टम सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

यह कार्रवाई जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और जवाबदेही तय करने की दिशा में प्रशासन के कड़े रुख को दर्शाती है। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में नियमित मॉनिटरिंग की जाए और जमीनी स्तर पर सेवाओं में सुधार सुनिश्चित किया जाए।

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