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सारनी में फिर लौटेगी रौनक: 660 मेगावाट इकाई के लिए भेल को 684 करोड़ का अग्रिम भुगतान, 57 माह में बदलेगी क्षेत्र की तकदीर – Madhya Pradesh Voice

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सारनी में फिर लौटेगी रौनक: 660 मेगावाट इकाई के लिए भेल को 684 करोड़ का अग्रिम भुगतान, 57 माह में बदलेगी क्षेत्र की तकदीर


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28/11/2025 2:06 PM Total Views: 339111

सारनी के लिए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत, ‘पावर हब’ की वापसी से पलायन पर लगेगा ‘फुल स्टॉप’

बैतूल/सारनी। विद्युत नगरी सारनी के इतिहास में एक बार फिर सुनहरे अक्षरों में नया अध्याय लिखा जा रहा है। जिस सारनी को कभी अपनी चमक और धमक के लिए जाना जाता था, वह अब फिर से गुलजार होने की दहलीज पर है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) ने सारनी और चचाई में प्रस्तावित 660-660 मेगावाट की दो नई ताप विद्युत इकाइयों के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

कंपनी ने निर्माण कार्य के लिए देश की प्रतिष्ठित संस्था भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL – भेल) को 684 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया है। यह भुगतान केवल एक वित्तीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए ‘संजीवनी’ है। 29 सितंबर 2025 को जारी ‘नोटिफिकेशन ऑफ अवॉर्ड’ (NOA) के बाद इस भुगतान ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि अगले 57 महीनों में सारनी की आबोहवा बदलने वाली है।

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परदेस में पसीना बहाने वाले अब ‘घर’ में कमाएंगे

इस परियोजना का सबसे बड़ा सामाजिक प्रभाव क्षेत्र के रोजगार पर पड़ेगा। पिछले कुछ वर्षों में सारनी और आसपास के बैतूल जिले से बड़ी संख्या में युवाओं और मजदूरों का पलायन हुआ है। रोजगार की तलाश में लोग पुणे, मुंबई और गुजरात जाने को मजबूर थे।

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लेकिन अब, 660 मेगावाट की इस विशाल परियोजना के शुरू होने से हजारों हाथों को काम मिलेगा।

निर्माण कार्य शुरू होते ही सिविल वर्क, फैब्रिकेशन और लॉजिस्टिक्स में हजारों मजदूरों की आवश्यकता होगी। जो मजदूर बाहर जाकर 12-12 घंटे खट रहे थे, उन्हें अब अपने परिवार के पास रहकर रोजगार मिलेगा। बेरोजगारों को सहारा: तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों पर स्थानीय युवाओं के लिए अवसर खुलेंगे। यह प्रोजेक्ट क्षेत्र की बेरोजगारी पर करारा प्रहार साबित होगा।

57 माह का लक्ष्य: जून 2030 तक तैयार होगा ‘पावर हाउस’

अग्रिम भुगतान के साथ ही दोनों परियोजनाओं की ‘प्रभावी तिथि’ (Effective Date) 29 सितंबर 2025 निर्धारित हो गई है। भेल के साथ हुए अनुबंध के अनुसार, अगले 57 महीनों में यानी जून 2030 तक दोनों इकाइयों का निर्माण, परीक्षण और सफल परिचालन पूरा करना होगा।

भेल इस प्रोजेक्ट के तहत बॉयलर, टरबाइन, जनरेटर और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी संरचनाओं का निर्माण करेगा। समय सीमा तय होने से यह स्पष्ट है कि निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चलेगा, जिससे क्षेत्र में गतिविधियों का दौर लगातार बना रहेगा।

बाजार होंगे गुलजार: फिर से ‘चमन’ होगा सारनी

इस परियोजना का असर केवल पावर प्लांट के गेट के भीतर तक सीमित नहीं रहेगा। अर्थशास्त्रियों और स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि इससे सारनी का पूरा बाजार फिर से खड़ा हो जाएगा। किराया और आवास: बाहर से आने वाले इंजीनियरों और कर्मचारियों के कारण मकानों की मांग बढ़ेगी।

किराना, कपड़े, ट्रांसपोर्ट और होटल व्यवसाय में भारी उछाल आएगा। वीरान पड़ी संपत्तियों के दाम फिर से बढ़ने की उम्मीद है।

सारनी, जो धीरे-धीरे सूना होता जा रहा था, अब फिर से चमन होने की राह पर है। यह परियोजना क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश लेकर आएगी।

अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक: भविष्य की ऊर्जा

पर्यावरण और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, सारनी और चचाई (अमरकंटक) में बनने वाली ये इकाइयां ‘अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक’ पर आधारित होंगी। उच्च दक्षता: ये इकाइयां कम कोयले में अधिक बिजली पैदा करेंगी। भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से सभी आवश्यक स्वीकृतियां मिल चुकी हैं, जिससे काम में कोई बाधा नहीं आएगी।

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