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चोपना में घोर भ्रष्टाचार: 4 लाख के कुएं में सिर्फ 3 फीट गड्ढा, 70 हजार उड़ाए; ग्रामीणों ने उखाड़ा सरकारी गिट्टी! – Madhya Pradesh Voice

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चोपना में घोर भ्रष्टाचार: 4 लाख के कुएं में सिर्फ 3 फीट गड्ढा, 70 हजार उड़ाए; ग्रामीणों ने उखाड़ा सरकारी गिट्टी!


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15/10/2025 2:28 AM Total Views: 437242

मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं की धज्जियां उड़ाई जा रही

बैतूल/चोपना। बैतूल जिले की घोड़ाडोंगरी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत चोपना एक बार फिर भ्रष्टाचार की दलदल में फंसी नजर आ रही है। घुसपैठी ठेकेदारों की चांदी कट रही है, जबकि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। निर्माण कार्यों के नाम पर सिर्फ कागजों में खानापूर्ति कर सरकारी पैसों का बंदरबांट किया जा रहा है। इसका ताजा और चौंकाने वाला उदाहरण चोपना नंबर 3 में नित्यानंद सरकार के घर के सामने बनाए जा रहे कुएं के निर्माण में सामने आया है, जहां 4 लाख रुपये के प्रस्तावित इस जल स्रोत को सिर्फ तीन फीट गहरा खोदकर ही छोड़ दिया गया, और फर्जी बिलों के माध्यम से करीब 70 हजार रुपये का भुगतान भी निकाल लिया गया।

4 लाख के कुएं में सिर्फ 3 फीट की खुदाई, 70 हजार का गबन!

यह मामला 2022 में स्वीकृत हुए कुएं के निर्माण से जुड़ा है। करीब 4 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस कुएं के निर्माण कार्य की शुरुआत हुई, लेकिन ठेकेदार ने सिर्फ तीन फीट का गड्ढा खोदकर ही इतिश्री कर ली। नियमानुसार, कुआं जलस्तर तक पहुंचना चाहिए ताकि उसका उपयोग हो सके, लेकिन यहां तो महज खानापूर्ति की गई। आरोप है कि इस अधूरे निर्माण कार्य के लिए न केवल फर्जी मस्टररोल तैयार किए गए, बल्कि गिट्टी जैसे निर्माण सामग्री के नाम पर भी सिर्फ खानापूर्ति की गई। इन फर्जीवाड़े के बूते करीब 70 हजार रुपये की राशि की निकासी भी कर ली गई, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि कुआं आज भी अधर में लटका हुआ है।

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3 साल बाद भी अधूरा, ग्रामीणों ने शुरू की गिट्टी की चोरी!

सबसे चिंताजनक बात यह है कि 2022 में स्वीकृत यह निर्माण कार्य आज 2025 में भी अधूरा पड़ा है। तीन साल बीत जाने के बाद भी पंचायत ने इसे पूरा करने की जहमत नहीं उठाई। अधूरे पड़े इस निर्माण स्थल पर जो थोड़ी-बहुत गिट्टी सामग्री लाई गई थी, वह भी अब ग्रामीणों द्वारा अपने निजी उपयोग के लिए घर ले जाई जा रही है। यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि न तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता का कोई ध्यान रखा गया और न ही सरकारी संपत्ति की सुरक्षा का। यह ग्रामीण स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही धांधली और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है।

मनरेगा योजनाओं पर भी सवालिया निशान

यह मामला सिर्फ एक कुएं के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के कार्यान्वयन पर भी सवालिया निशान लगाता है। आरोप है कि ऐसी योजनाओं के नाम पर पंचायत में बैठे दलाल अपनी जेबें भर रहे हैं और जमीनी स्तर पर काम करने वाले मजदूरों को भी उनका उचित मेहनताना नहीं मिल पा रहा होगा। पंचायत में ‘घुसपैठी ठेकेदारों’ की मौजूदगी और उनकी मनमानी, स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी संदेह पैदा करती है।

जांच की मांग, जनता में आक्रोश

चोपना के ग्रामीणों में इस भ्रष्टाचार को लेकर भारी आक्रोश है। वे मांग कर रहे हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और गबन की गई राशि की वसूली की जाए। यह घटना बैतूल जिले में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करती है और इस पर तत्काल अंकुश लगाने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कार्रवाई करता है और कब तक चोपना के ग्रामीणों को इस अधूरे कुएं और अन्य अधूरी योजनाओं से मुक्ति मिलती है।

इनका कहना है :

  • जीस शासकीय भूमि पर कूप निर्माण किया जा रहा है। उसी के सामने रहने वाले नित्यानंद सरकार द्वारा आपत्ति उठाई गई है। जिसके चलते कूप निर्माण कार्य अधूरा रह गया है। जल्द ही नित्यानंद सरकार से बात करके निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

प्रदीप विश्वास, जनपद सदस्य चोपना

  • मैने चार्ज अभी लिया हु, मैने इस काम के लिए कई बार सीईओ मैडम को लिखकर दिया हु अभी तक 61 कम इनकंप्लीट है। इस कुप निर्माण कार्य का काम जनपद सदस्य महोदय जी ने अपने हाथ में लिया था जो आज तक पूर्ण नहीं हो पाया। मैंने मूल्यांकन कर सीईओ मैडम को दे दिया है जो भी इसके जिम्मेदार होंगे उस पर कार्रवाई होगी। 

विनोद चौरसिया, सचिव ग्राम पंचायत चोपना

  • नित्यानंद सरकार के घर के पास 4 लाख की लागत से कूप निर्माण 2022 में प्रस्तावित हुआ था जो आज तक पूर्ण नहीं हो पाया है। मनरेगा के अंतर्गत इस कार्य में न तो रोजगार का लाभ मिला और नाही जल कूप की सुविधा। जबकि 70 हजार का भुगतान भी हो चुका है।

विद्युत बिस्वास, ग्रामीण चोपना 3

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