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प्रकृति के लिए विचार प्रारम्भ करना किसान संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य: श्री मोहन नागर


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24/05/2025 7:30 PM Total Views: 440150

बैतूल में कृषक उन्मुखीकरण कार्यशाला का सफल आयोजन; नर्मदापुरम और हरदा के 100 से अधिक किसानों ने मूंग के विकल्प और जैविक खेती पर की गहन चर्चा


बैतूल। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद और भारत भारती शिक्षा समिति के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार, 24 मई को बैतूल स्थित भारत भारती परिसर में एक दिवसीय कृषक सम्मेलन सह-कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य कृषकों को रसायन मुक्त मूंग उत्पादन के साथ-साथ इसकी वैकल्पिक फसलों को उपजाने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करना था, ताकि मिट्टी के स्वास्थ्य, मानव जीवन और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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कार्यशाला का शुभारंभ मां भारती के समक्ष अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त श्री मोहन नागर उपस्थित रहे। उनके साथ जन अभियान परिषद के शासी निकाय सदस्य श्री सुजीत जी शर्मा और श्री बुधपाल ठाकुर, श्री अनिल अग्रवाल तथा मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड भी मौजूद थे।

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प्रकृति और कृषि के संतुलन पर जोर:

श्री मोहन नागर उद्घाटन सत्र में उपस्थित कृषकों को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर ने मिट्टी सुपोषण, मानव स्वास्थ्य और स्वस्थ पर्यावरण की दिशा में इस आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस पहल में कृषक समुदाय की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। श्री नागर ने इस बात पर जोर दिया कि हमारा शरीर ऋतुओं के अनुसार ढला है, और हमारी कृषि भी उसी अनुसार होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “प्रकृति के लिए विचार प्रारम्भ करना इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य है।” उन्होंने किसानों को रसायन मुक्त मूंग की खेती के लिए पशु संपदा और गो माता पालन को पुनः अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसान अपने बाड़े में पशुपालन पुनः शुरू करें, जिससे हमें रासायनिक मुक्त मूंग की कृषि को सहारा मिल सके।

रसायन मुक्त कृषि समय की मांग: डॉ. बकुल लाड

कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड ने अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल को रेखांकित करते हुए कहा कि अच्छे मानव स्वास्थ्य के लिए रसायन मुक्त मूंग उत्पादन और मूंग फसल की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए जागरूकता बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि कृषि में अत्यधिक रसायनों के उपयोग से जैव विविधता, कृषि भूमि, जल, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसी कारण जैविक एवं प्राकृतिक कृषि की ओर बढ़ना हमारी वर्तमान आवश्यकता बन गई है।

मूंग की फसल में सहायक मित्र कीट एवं शत्रु कीट की बताई पहचान

कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों ने भी किसानों को महत्वपूर्ण जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विजय वर्मा ने मूंग उत्पादक किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी कृषि जल, जलवायु, जमीन, जानवर और जंगल पर निर्भर करती है, और इनके असंतुलन से जमीन की सेहत बिगड़ गई है। उन्होंने गोबर को जमीन के लिए ‘अमृत’ बताया और इसके वर्तमान में उपयोग न होने से धरती की सेहत बिगड़ने पर चिंता व्यक्त की। कृषि विज्ञान केंद्र, नर्मदापुरम के कीट वैज्ञानिक श्री ब्रजेश शर्मा ने किसानों को मूंग की फसल में सहायक मित्र कीटों और शत्रु कीटों की पहचान विस्तार से बताई, जिससे किसान अपनी फसल को नुकसान से बचा सकें और प्राकृतिक तरीकों से कीट नियंत्रण कर सकें। किसान कल्याण तथा कृषि विभाग के उपसंचालक डॉ. आनंद कुमार बड़ोनिया ने भी इस किसान उन्मुखीकरण कार्यशाला में किसानों को मूंग में रसायनों के दुष्प्रभावों जैसे कैंसर के मरीजों की बढ़ती संख्या से अवगत कराया। उन्होंने किसानों को रसायन मुक्त मूंग उगाने या उसके विकल्प के रूप में अन्य फसलों को लगाने पर प्रोत्साहित किया।

किसानों ने जैविक खेती को भी देखा और समझा कार्यशाला के दौरान बैतूल, नर्मदापुरम और हरदा से आए कृषकों को भारत-भारती परिसर में की जा रही जैविक खेती का सीधा अवलोकन कराया गया। किसानों ने यहां की जा रही जैविक कृषि पद्धतियों को देखा और वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों से उनकी कार्यप्रणाली को समझा। यह अनुभव किसानों के लिए बेहद उपयोगी रहा, जिससे वे अपने खेतों में भी इन विधियों को अपनाने के लिए प्रेरित हुए।

कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में बैतूल, नर्मदापुरम और हरदा के कृषकों, कृषि वैज्ञानिकों सहित कुल 100 से अधिक लोगों ने सहभागिता की। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद से संभाग प्रभारी श्री सैयद जाफरी, तथा हरदा, नर्मदापुरम और बैतूल के जिला एवं विकासखण्ड समन्वयकों ने भी इस आयोजन में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की, जिससे यह कार्यशाला सफल रही।

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