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जल जीवन मिशन प्रबंधन एवं उपकरणों पर मध्यप्रदेश पेयजल अधिनियम-2024: प्रतिकूलता रोकने के लिए सख्त प्रावधान – Madhya Pradesh Voice

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जल जीवन मिशन प्रबंधन एवं उपकरणों पर मध्यप्रदेश पेयजल अधिनियम-2024: प्रतिकूलता रोकने के लिए सख्त प्रावधान


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27/11/2024 4:47 PM Total Views: 436289

पानी के दुरुपयोग पर सख्त कर्रवाई की जाएगी!

भोपाल। मध्यप्रदेश में जल प्रबंधन को सुधारने और पानी के दुरुपयोग को रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘मध्यप्रदेश पेयजल अधिनियम-2024’ के ड्राफ्ट को मंजूरी दी है, जिसमें महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। नए अधिनियम के तहत, यदि कोई व्यक्ति पानी की पाइपलाइन तोड़ता है या उसे नुकसान पहुंचाता है, तो उसे दो साल की जेल हो सकती है। इसके अलावा, पानी के मीटर या अन्य उपकरण चोरी करने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।

इस अधिनियम के अंतर्गत, उपभोक्ताओं को डिटेल में पानी का बिल दिया जाएगा, जो बिजली के बिल की तर्ज पर होगा। यह बिल मीटर किराया, फिक्स चार्ज और उपयोग में लिए पानी की मात्रा का शुल्क स्पष्ट रूप से बताएगा।

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पीएचई (लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी) विभाग द्वारा तैयार ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि पानी की पाइपलाइन से संबंधित सभी कार्य केवल लाइसेंसधारी प्लंबर द्वारा किए जाएंगे। सरकार, स्थानीय निकाय, और उपभोक्ताओं की जिम्मेदारियाँ स्पष्ट की जाएंगी, जिससे सभी स्तरों पर समन्वय और कार्यप्रणाली में सुधार होगा।

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समन्वय समस्याओं को हल करना प्राथमिकता

इस अधिनियम की आवश्यकता ऐसे समय में महसूस की गई है जब मध्यप्रदेश में हर घर में नल से जल योजना के अंतर्गत बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। मौजूदा स्थिति में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण कई बार जल आपूर्ति प्रारंभ नहीं हो पाती। नए अधिनियम में सभी पक्षों की भूमिकाएं स्पष्ट की गई हैं, जिससे विवाद की स्थिति से बचा जा सके।

निवेश की दिशा: घरेलू पानी के दुरुपयोग पर सख्ती

घरेलू पानी के कमर्शियल उपयोग पर सख्ती लागू की जाएगी। ऐसा करने पर 20 हजार रुपए तक की पेनाल्टी लगेगी। पानी का दुरुपयोग करने पर तीन महीने से तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, यदि परिसर में पानी की पाइपलाइन खराब है और जल बर्बाद हो रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित उपभोक्ता की होगी।

आगे की कार्रवाई

इस नए अधिनियम के अंतर्गत नॉन-कन्वेंशनल सोर्स व वीज़न के तहत डेडिकेटेड पॉवर ग्रिड की स्थापना की जाएगी। राज्य सरकार अब विशेष वाहन कंपनियों की स्थापना भी कर सकती है। पानी की सुरक्षा और प्रबंधन के लिए यह अधिनियम एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि मध्यप्रदेश जल संकट के समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगा।

इस अधिनियम का उद्देश्य न केवल जल की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है, बल्कि जल के प्रभावी प्रबंधन के लिए आवश्यक कदम उठाना भी है।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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