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भाजपा नेता रविंद्र देशमुख आत्महत्या मामले में कार्रवाई पर उठ रहे सवाल, क्या जिले के भाजपा वरिष्ठ पदाधिकारी दे रहे साथ?, इनकी भी कमजोरी है रंजीत के पास? – Madhya Pradesh Voice

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भाजपा नेता रविंद्र देशमुख आत्महत्या मामले में कार्रवाई पर उठ रहे सवाल, क्या जिले के भाजपा वरिष्ठ पदाधिकारी दे रहे साथ?, इनकी भी कमजोरी है रंजीत के पास?


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05/11/2024 5:44 PM Total Views: 420929

बैतूल/सारनी। भाजपा नेता रविंद्र देशमुख की आत्महत्या को एक महीना बीत चुका है, लेकिन इस गंभीर मामले में पुलिस की कार्रवाई सुस्त पड़ती दिख रही है। देशमुख के सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने 10 आरोपियों पर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है, लेकिन मुख्य आरोपी रंजीत सिंह, नाजिया बानो और प्रकाश शिवहरे जैसे प्रमुख संदिग्धों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

पुलिस की कार्रवाई में कमी

दिवाली से पहले पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन त्योहार के कारण कार्रवाई औपचारिकता में बदल गई। गिरफ्तारियों के लिए भेजी गई टीम आरोपियों को पकड़ने के बजाय लौट आई, और इस कारण से समाज की बढ़ती नाराजगी का सामना करना पड़ रहा। एसपी निश्चल एन झारिया ने इस मामले की जांच के लिए एएसपी कमला जोशी की अगुवाई में एक एसआईटी का गठन किया, लेकिन इस टीम की गतिविधियां भी अक्सर दिखावटी रह गई हैं।

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ईनाम की बढ़ोतरी और अभियुक्तों की अनुपलब्धत

पुलिस ने मामले में 6 आरोपियों को हिरासत में लिया है, लेकिन बाकी फरार आरोपियों पर ईनाम बढ़ाकर 5 हजार रुपए कर दिया गया। फिर भी, पुलिस को अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। क्या यह चंबल के डाकू से भी खतरनाक है? जिनको पकड़ना बैतूल पुलिस के लिए मुमकिन नहीं नामुमकिन साबित हो रहा है। दिवाली पूर्व की कार्रवाई के बाद से एसआईटी कि टीम वापस लौट आई है, और इससे चौकाने वाला सवाल उठता है कि इतनी लंबी अवधि के बाद भी प्रशासन कुछ नहीं कर पाई।

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सोशल मीडिया पर उठते सवाल

एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी न होना और पुलिस द्वारा दी जा रही दलीलें सोशल मीडिया पर नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बन गई हैं। नागरिक जानना चाहते हैं कि यदि आरोपी स्थानीय हैं, तो फिर उनकी गिरफ्तारी में इतनी बाधाएं क्यों आ रही हैं। जबकि आमआदमी पार्टी ने भाजपा नेता रविंद्र देशमुख को न्याय दिलाने के लिए अपने सिर तक मुंडवा लिए, बावजूद इससे ना प्रशासन को कोई फर्क पड़ा और ना ही अनुशासन का दम भरने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को। यह मुद्दा भविष्य में भाजपा को कुंबी व पवार समज से मिलने वाले वोट को निश्चित ही प्रभावित करेंगे।

गवाह को धमकाने की कोशिश, परिवार में दहशत

हाल ही में, मृतक रविंद्र देशमुख आत्महत्या कांड में आरोपियों द्वारा मुख्य गवाह उनकी पत्नी किरण देशमुख को डराने-धमकाने का मामला भी सामने आया है। पीड़ित परिवार इस समय खौफ के साए में जी रहा है।

एक घटनाक्रम में दो दिन पूर्व रात करीब 2:30 बजे, मृतक के घर के पास दो संदिग्ध बाइक सवार मंडराते हुए दिखाई दिए। इन संदिग्धों के चेहरे कपड़ों से ढके हुए थे और वे कुछ देर तक घर के गेट के पास खड़े रहे। पड़ोसियों को जब यह स्थिति संदिग्ध लगी, तो उन्होंने एक बार घर के बाहर की लाइट चालू और बंद की। जैसे ही लाइट दुबारा चालू हुई, बाइक सवार वहां से भाग निकले। इस घटना से यह आशंका जताई जा रही है कि आरोपियों की योजना गवाह किरण देशमुख को डराना या मामले से निपटने की हो सकती है। जिसकी सूचना मृतक के बड़े भाई ने पाथाखेड़ा पुलिस को दी है।

रविंद्र देशमुख के मामले में पुलिस के सुस्त रवैये और आरोपियों की गिरफ्तारी में असफलता से यह साफ होता है कि जांच प्रक्रिया में कुछ न कुछ कमी अवश्य है। प्रशासन का कोई अधिकारी उसके संपर्क में है या फिर प्रशासन स्वयं उसके दबाव में है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन को जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई करनी चाहिए, अन्यथा फरार चल रहे आरोपियों द्वारा मृतक रविंद्र देशमुख के परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना घटित करने से इनकार नहीं किया जा सकता।

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