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सारणी पावर प्लांट में ‘नॉट फॉर सेल’ कबाड़ की खुलेआम लूट: रंगे हाथों पकड़ाया गोरा कबाड़ी का ट्रैक्टर, फिर भी ‘सेटिंग’ के खेल में छूटा – Madhya Pradesh Voice

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सारणी पावर प्लांट में ‘नॉट फॉर सेल’ कबाड़ की खुलेआम लूट: रंगे हाथों पकड़ाया गोरा कबाड़ी का ट्रैक्टर, फिर भी ‘सेटिंग’ के खेल में छूटा


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29/09/2026 10:53 PM Total Views: 481970

सुरक्षा अधिकारी और पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल, एक्स-मैन गार्ड्स की मुस्तैदी पर फिरा पानी

सारणी। एमपीपीजीसीएल (MPPGCL) के सारणी स्थित पावर प्लांट में कबाड़ चोरी और मिलीभगत का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। कंपनी प्रबंधन को गुमराह कर, दमखम के साथ प्लांट में काम लेने और ‘नॉट फॉर सेल’ (Not For Sale) स्क्रैप को पार करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरी घटना के केंद्र में सारणी का मशहूर ‘स्क्रैप वेंडर’ है, जिसके ट्रैक्टर को कीमती कॉपर केबल के साथ रंगे हाथों पकड़े जाने के बावजूद, संदिग्ध परिस्थितियों में छोड़ दिया गया।

क्या है पूरा घटनाक्रम?

विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार शाम लगभग 6:30 बजे की है। प्लांट के सीएचपी (CHP) गेट नंबर 2 पर तैनात एमपीपीजीसीएल के मुस्तैद एक्स-आर्मी गार्ड्स ने एक ट्रैक्टर को संदिग्ध स्थिति में रोका। जांच करने पर ट्रैक्टर में एक ताले में बंद संदूक मिला, जिसमें प्लांट का कीमती कॉपर केबल भरकर परिवहन किया जा रहा था। गार्ड्स ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ट्रैक्टर को वहीं रोक लिया और इसकी आधिकारिक सूचना एमपीपीजीसीएल के सुरक्षा अधिकारी शरद राघव को दी गई।

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अधिकारी और कबाड़ी का आमना-सामना, और फिर ‘क्लीन चिट’

सूचना मिलते ही सुरक्षा अधिकारी शरद राघव मौके पर पहुंचे। दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह रही कि अधिकारी के पहुंचने के कुछ ही देर बाद, क्षेत्र का चर्चित स्क्रैप वेंडर भी वहां आ धमका। इसके बाद जो हुआ, उसने प्लांट की समूची सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मौके पर कुछ देर चली रहस्यमयी बातचीत और तथाकथित जांच के बाद, उस ट्रैक्टर को वहां से जाने दिया गया जिसे गार्ड्स ने घंटों की मशक्कत के बाद तांबा और पीतल ले जाने की आशंका में पकड़ा था।

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खाकी बनी रही मूकदर्शक

इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। सूचना मिलने पर सारणी पुलिस भी मौके पर पहुंची थी, लेकिन पुलिस ने इस पूरे मामले में केवल एक ‘मूकदर्शक’ की भूमिका निभाई। बिना कोई ठोस कार्रवाई या पूछताछ किए, पुलिस की टीम दबे पांव वहां से वापस लौट गई।

सीएचपी डिस्मेंटलिंग की आड़ में बड़ा खेल

सूत्र बताते हैं कि सीएचपी में चल रहे डिस्मेंटल के कार्य के दौरान कई ऐसे कीमती उपकरण और सामग्रियां छोड़ दी गई थीं, जिन्हें बेचा नहीं जाना था (नॉट फॉर सेल)। जैसे ही डिस्मेंटलिंग के मुख्य कार्य से प्रबंधन का ध्यान हटा, गोरा कबाड़ी ने अपना असली खेल शुरू कर दिया। 3 महीने के बड़े एक्सटेंशन में मौके का फायदा उठाकर प्लांट से लगातार महंगे कॉपर केबल, ट्रांसफार्मर, कॉपर वायर और अन्य कीमती मटेरियल को धीरे-धीरे गायब किया जा रहा है।

उठते हुए सुलगते सवाल:

जब एक्स-आर्मी गार्ड्स ने ट्रैक्टर को रंगे हाथों पकड़कर घंटों खड़ा रखा और पुख्ता सबूत होने की आशंका जताई, तो सुरक्षा अधिकारी और कबाड़ी के बीच ऐसा क्या समझौता हुआ कि ट्रैक्टर को मजबूरन छोड़ना पड़ा? ‘नॉट फॉर सेल’ मटेरियल से भरे उस बंद संदूक की पारदर्शी तरीके से जब्ती और निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की गई?

पुलिस के मौके पर पहुंचने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

फिलहाल, सारणी पावर प्लांट के गलियारों में यह कयास तेज हो गए हैं कि सीएचपी से हो रही इस ‘नॉट फॉर सेल’ कबाड़ की हेराफेरी की गाज जल्द ही एक बड़े अधिकारी पर गिरने वाली है। अब देखना यह है कि एमपीपीजीसीएल का उच्च प्रबंधन और सतर्कता विभाग इस खुलेआम हो रही लूट और सुरक्षा में सेंधमारी पर कोई सख्त कदम उठाता है, या फिर यह पूरा मामला भी रसूखदारों की मिलीभगत की भेंट चढ़ जाएगा।

इनका कहना है:—

सोमवार को हमें सीएचपी-2 के गेट से सूचना प्राप्त हुई की किसी ट्रैक्टर में कोई सामान ले जाया जा रहा है सूचना मिलते ही टीम के साथ मौके पर पहुंचे और एमपीपीजीसीएल के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर ठेकेदार द्वारा परिवहन किया जा रहे हैं समान की जांच करवाई गई उसके बाद ही ट्रैक्टर को छोड़ा गया। 

शरद राघव, सुरक्षा अधिकारी एमपीपीजीसीएल सारणी 

मेरे द्वारा ट्रैक्टर में हो रहे परिवहन सामान की जांच की गई जिसमें डिस्मेंटल कंपनी एडीफाई का ही समान अर्थिंग प्लेट और कुछ कॉपर के केवल पाया गया जो कि वास्तव में कंपनी का था इसलिए उन्हें छोड़ा गया। 

विजय नागलकर, जांच अधिकारी, एमपीपीजीसीएल सरनी

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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