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अधीक्षण अभियंता संजीव त्रिपाठी के साथ मौजूद महिला मित्र पर प्रबंधन की चुप्पी ?, MPPGCL में सुगबुगाहट तेज


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22/09/2026 12:42 AM Total Views: 476619

परिवार की महिला से पत्नी और अब महिला मित्र की चर्चा तक बदली कहानी

आखिर उस रात हुआ क्या था, कौन करेगा जांच ?

बैतूल/सारणी। तेंदूखेड़ा मार्ग पर कथित लूट की झूठी कहानी और शासकीय वाहन के दुरुपयोग के मामले में अधीक्षण अभियंता संजीव त्रिपाठी का खंडवा तबादला किए जाने के बाद अब यह प्रकरण मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के आंतरिक गलियारों में एक नया मोड़ ले चुका है। अब तक केवल शिकायतकर्ता अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब कंपनी परिसर में इस बात को लेकर तीव्र चर्चाएं हैं कि घटना के समय शासकीय वाहन में उनके साथ मौजूद महिला मित्र भी MPPGCL की ही कर्मचारी हैं। इसके बावजूद कंपनी प्रबंधन द्वारा की गई एकतरफा कार्रवाई ने पूरे प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

सहकर्मी की चुप्पी और सहभागिता पर गंभीर सवाल

कंपनी के भीतर और आम जनमानस में यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि जब घटनाक्रम पूरी तरह स्पष्ट था, तब उक्त महिला सहकर्मी ने सच्चाई सामने रखने के बजाय चार निर्दोष युवाओं को गंभीर आपराधिक मामले में फंसाने के पूरे घटनाक्रम में मूक सहमति क्यों दी ?

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जानकारों का कहना है कि यदि महिला कर्मी चाहतीं तो झूठी शिकायत और युवाओं के खिलाफ रची गई इस मनगढ़ंत कहानी को उसी समय रोक सकती थीं। लेकिन सच पर पर्दा डालने और निर्दोष युवाओं के भविष्य को दांव पर लगाने के इस कृत्य में उनकी मौन सहभागिता भी बराबर की मानी जा रही है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी हो जाता है कि चार युवाओं के करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा को आघात पहुँचाने वाले इस मामले में केवल संजीव त्रिपाठी पर ही प्रशासनिक कदम क्यों उठाया गया, जबकि कार में मौजूद उनकी सहकर्मी पर अब तक कोई विभागीय जांच या कार्रवाई क्यों नहीं हुई ?

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पहले परिवार की महिला, फिर पत्नी अब महिला मित्र का नाम सामने आने से कहानी पर सवाल

मामले में पुलिस की ओर से सामने आए अलग-अलग बयानों ने भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जानकारी में थाना प्रभारी की ओर से बताया गया था कि कथित लूट के समय संजीव त्रिपाठी के साथ परिवार की कोई महिला/रिश्तेदार मौजूद थी। इसके बाद सामने आया कि उनके साथ उनकी पत्नी थीं और उनके बयान भी लिए जा चुके हैं। दूसरी ओर, वायरल वीडियो सामने आने के बाद घटनास्थल और कथित लूट की कहानी के बीच भी कई सवाल उठे। अब जब विभागीय स्तर पर संजीव त्रिपाठी के साथ एक महिला मित्र की मौजूदगी की चर्चा सामने आ रही है, तो सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर उस रात वास्तविक घटनाक्रम क्या था ? पुलिस की शुरुआती जानकारी, बाद में सामने आया बयान और वायरल वीडियो इन तीनों के बीच कितना मेल है ?

उच्चाधिकारियों से सांठगांठ की चर्चाएं गर्म

MPPGCL कर्मचारियों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि उक्त महिला कर्मी ने प्रबंधन के कुछ उच्चाधिकारियों से संपर्क साधकर खुद पर होने वाली कार्रवाई को रुकवा लिया है। दबी जुबान यह बात तेजी से फैल रही है कि उक्त महिला कर्मी को संरक्षण देने के पीछे कार्यालय के किन रसूखदार अधिकारियों का हाथ है। कर्मचारियों के बीच यह सवाल आम हो चुका है कि आखिर कौन सा जिम्मेदार अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर इस पूरे प्रकरण में परदा डालने की कोशिश कर रहा है और किसके प्रभाव में आकर विभागीय मर्यादाओं को दरकिनार किया जा रहा है।

परिसर में इस बात की भी सुगबुगाहट है कि जिन अधिकारियों ने इस पूरे प्रकरण में उक्त सहकर्मी को बचाने में मदद की है, अब वे स्वयं भी चर्चाओं और संदेह के दायरे में आ चुके हैं। पूरे महकमे में यह बात हवा की तरह तैर रही है कि अंदरखाने सब जानते हैं कि किसका संरक्षण किसे मिला हुआ है, लेकिन सीधे तौर पर कोई भी उच्चाधिकारियों के खिलाफ जुबान खोलने का जोखिम नहीं उठाना चाहता।

एकतरफा कार्रवाई क्यों ?

जब दोनों ही कंपनी के जिम्मेदार पदों से जुड़े हैं और घटना स्थल पर दोनों की मौजूदगी के स्पष्ट साक्ष्य हैं, तो जांच की आंच केवल एक ही अधिकारी तक सीमित क्यों रखी गई ? महिला मित्र के टेबल बदलने से कार्यवाही के नाम पर सिर्फ औपचारिकता समझ में आ रहा है। विभागीय जांच से परहेज क्यों ? शासकीय संसाधनों के दुरुपयोग और संस्थागत अनुशासनहीनता से जुड़े इस मामले में महिला सहकर्मी की भूमिका की औपचारिक आंतरिक जांच क्यों नहीं बैठाई गई ?

न्यायिक और सामाजिक दायरे में बढ़ता आक्रोश

एक होनहार युवक की 9 सितंबर की प्रतियोगी परीक्षा छूटने और चारों युवाओं पर लगे झूठे मुकदमे के कलंक के बाद क्षेत्र में पहले से ही भारी आक्रोश है। अब कंपनी के अंदर से छनकर आ रही इस दोहरी नीति की खबरों ने आग में घी डालने का काम किया है।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


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