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दो पंचायतों के बीच फंसी किसानों की राह: सुखाढाना ने बनाई सड़क, सलैया पंचायत बेपरवाह, जनसुनवाई में गूंजेगा मुद्दा – Madhya Pradesh Voice

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दो पंचायतों के बीच फंसी किसानों की राह: सुखाढाना ने बनाई सड़क, सलैया पंचायत बेपरवाह, जनसुनवाई में गूंजेगा मुद्दा


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12/09/2026 9:03 PM Total Views: 472889

सारनी। खेत तक पहुंचने के लिए सड़क किसी भी किसान के लिए सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि उसकी मेहनत, रोजी-रोटी और उम्मीद की डोर होती है। लेकिन सारनी क्षेत्र के ग्राम पंचायत सुखाढाना और सलैया के बीच रहने वाले दर्जनों किसानों के लिए यही ‘उम्मीद की डोर’ अब भारी परेशानी और आक्रोश का कारण बन गई है। दोनों पंचायतों की सीमा से गुजरने वाले मेढ़ा मार्ग (खेत सड़क) के अधूरे निर्माण को लेकर सलैया पंचायत के सरपंच और सचिव के खिलाफ किसानों में भारी नाराजगी है। अपनी इसी व्यथा को लेकर किसान मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचकर मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं।

सुखाढाना ने पेश की नजीर, सलैया के हिस्से में बदहाली

किसानों के अनुसार, इस मार्ग का एक हिस्सा सुखाढाना पंचायत में और दूसरा हिस्सा सलैया पंचायत के अंतर्गत आता है। ग्राम पंचायत सुखाढाना ने अपने हिस्से में विधायक निधि और पंचायत की उपलब्ध राशि से करीब 3.50 लाख रुपए की लागत से 110 मीटर लंबी सीसी सड़क का निर्माण पूरा कर लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्य सरपंच संतोष काजले के विशेष प्रयासों से संभव हो सका। दूसरी ओर, सलैया पंचायत के हिस्से का रास्ता आज भी बदहाल और कीचड़युक्त है। किसानों का सीधा सवाल है कि जब एक पंचायत अपने किसानों के हित में सड़क बना सकती है, तो दूसरी पंचायत इतनी लापरवाह और गंभीर क्यों नहीं है?

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रोजी-रोटी पर मंडरा रहा संकट, हो रहा आर्थिक नुकसान

सड़क खराब होने का सबसे बड़ा खामियाजा उन किसान परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, जिनकी आजीविका खेत और शहर के बाजार पर निर्भर है। किसान दुर्गेश यादव का दर्द इस बदहाली की गवाही देता है। वे प्रतिदिन दूध लेकर शहर जाते हैं, लेकिन खराब रास्ते के कारण कई बार मोटरसाइकिल का संतुलन बिगड़ जाता है। दूध गिरने से उन्हें सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। बारिश के दिनों में यह कच्चा और उबड़-खाबड़ रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे किसानों का खेतों तक पहुंचना और कृषि उपकरण ले जाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

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जनपद से लेकर पंचायत तक शिकायत, लेकिन समाधान शून्य

रितेश खखरे, कमलेश पटैया और प्रहलाद खखरे सहित अन्य किसानों का आरोप है कि इस विकराल समस्या की जानकारी पंचायत स्तर से लेकर जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी तक के अधिकारियों को दी जा चुकी है। इसके बावजूद समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। किसानों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि पंचायत प्रतिनिधियों को इस सड़क निर्माण से कोई ‘व्यक्तिगत लाभ’ नहीं दिख रहा है, जिसके चलते जानबूझकर काम को टाला जा रहा है। जबकि सरकारी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य ही किसानों को उनके खेतों तक सुगम आवागमन की सुविधा देना है।

अब आर-पार की लड़ाई के मूड में किसान

किसानों का स्पष्ट कहना है कि यह सड़क किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे गांव के विकास से जुड़ी है। प्रशासन से गुहार लगाने के लिए किसानों ने अब आगे की रणनीति तय कर ली है। किसान लामबंद होकर जनसुनवाई में अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे। ग्राम पंचायत सलैया में प्रस्तावित जिला कलेक्टर की चौपाल में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि कलेक्टर की चौपाल के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। जब सुखाढाना पंचायत अपने हिस्से का 110 मीटर का रास्ता बनाकर किसानों को राहत दे सकती है, तो सलैया पंचायत अपने हिस्से की राह का निर्माण कब करेगी? अन्नदाताओं की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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