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सारनी में सुरक्षा गार्ड का शोषण: 12 घंटे की ड्यूटी, मात्र 6 हजार वेतन और 8 महीने के पीएफ का गोलमाल – Madhya Pradesh Voice

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सारनी में सुरक्षा गार्ड का शोषण: 12 घंटे की ड्यूटी, मात्र 6 हजार वेतन और 8 महीने के पीएफ का गोलमाल


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12/05/2026 10:51 AM Total Views: 435878

नगर पालिका ने नहीं सुनी गुहार, थक-हारकर पीड़ित ने खटखटाया जिला श्रम पदाधिकारी का दरवाजा

सारनी। सरकारी विभागों और निकायों में आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा के नाम पर कर्मचारियों के शोषण का एक गंभीर मामला सामने आया है। सारनी नगर पालिका में सुरक्षा गार्ड के पद पर तैनात एक कर्मचारी को न केवल न्यूनतम वेतन से वंचित रखा गया, बल्कि उसे 11 से 12 घंटे काम कराकर उसके हक़ का पीएफ (EPF) भी डकार लिया गया। नगर पालिका के अधिकारियों से बार-बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर, अब पीड़ित ने न्याय के लिए जिला श्रम पदाधिकारी, बैतूल की शरण ली है।

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क्या है पूरा मामला?

सारनी के फॉरेस्ट कॉलोनी (वार्ड क्र. 02) निवासी वामनराव झरबड़े ने 1 फरवरी 2022 से ‘श्री बर्फानी सिक्योरिटी सर्विस’ (जबलपुर) के माध्यम से सारनी नगर पालिका के विभिन्न पॉइंटों पर एक साल तक सुरक्षा गार्ड के रूप में सेवाएं दीं।

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शिकायतकर्ता वामनराव के अनुसार, सुरक्षा एजेंसी द्वारा उनसे प्रतिदिन 11 से 12 घंटे काम लिया गया। इस हाड़तोड़ मेहनत के एवज में उन्हें महीने के मात्र 6000 रुपये दिए गए। नियमों को ताक पर रखते हुए यह वेतन बैंक खाते में न डालकर, सीधे नकद (कैश) हाथों में थमा दिया गया, ताकि न्यूनतम वेतन के नियमों की चोरी की जा सके।

पीएफ के नाम पर बड़ा खेल

शोषण यहीं नहीं रुका। कर्मचारी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए काटे जाने वाले पीएफ (Provident Fund) में भी भारी अनियमितता बरती गई है। वामनराव ने बताया कि उनके 1 साल के कार्यकाल में एजेंसी द्वारा केवल 4 महीने की पीएफ राशि ही ईपीएफ अकाउंट में जमा की गई है। बाकी 8 महीने का पीएफ का पैसा कहाँ गया, इसका कोई हिसाब नहीं है।

नगर पालिका की अनदेखी, श्रम विभाग से आस

जब पीड़ित को अपने साथ हो रही इस धोखाधड़ी का अहसास हुआ, तो उसने सबसे पहले 24 मार्च 2026 को मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO), सारनी को लिखित शिकायत देकर ‘श्री बर्फानी सिक्योरिटी सर्विस’ के संचालक रितेश टंडन के खिलाफ कार्रवाई और अपने रुके हुए पैसे दिलाने की मांग की। लेकिन, नगर पालिका प्रशासन ने इस गंभीर मामले पर चुप्पी साधे रखी और कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

प्रशासनिक उदासीनता से परेशान होकर, वामनराव झरबड़े ने 6 अप्रैल 2026 को सीधे **जिला श्रम पदाधिकारी, बैतूल** को एक विस्तृत आवेदन सौंपा है। इस आवेदन के साथ उन्होंने अपने 12 महीने के बैंक स्टेटमेंट, 4 महीने की पीएफ रसीद और सीएमओ को दी गई शिकायत की प्रतियां भी संलग्न की हैं।

उठ रहे हैं गंभीर सवाल

इस मामले ने सरकारी निकायों में ठेका कर्मचारियों की स्थिति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या नगर पालिका को यह नहीं देखना चाहिए कि उनके परिसर में काम कर रहे सुरक्षा गार्ड्स को न्यूनतम वेतन मिल रहा है या नहीं? बैंक खाते की जगह कैश में सैलरी बांटने वाली एजेंसी पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? 8 महीने के पीएफ के पैसे का गबन करने वाली ‘श्री बर्फानी सिक्योरिटी’ को ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया?

अब देखना यह है कि जिला श्रम विभाग इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और गरीब सुरक्षा गार्ड को उसकी गाढ़ी कमाई का पैसा और न्याय कब तक मिल पाता है।

इस संबंध में चर्चा करने के लिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी सारणी सीके मेश्राम को उनके दूरभाष पर सम्पर्क किया लेकिन उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया।

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