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बैतूल से सीएम हाउस तक 480 किमी की पदयात्रा: आशा-आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के हक की लड़ाई में निष्कासित छात्र नेता का ‘पॉलिटिकल स्टंट’? – Madhya Pradesh Voice

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बैतूल से सीएम हाउस तक 480 किमी की पदयात्रा: आशा-आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के हक की लड़ाई में निष्कासित छात्र नेता का ‘पॉलिटिकल स्टंट’?


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06/04/2026 9:04 AM Total Views: 415950

बैतूल। हमारे देश और प्रदेश की स्वास्थ्य एवं पोषण व्यवस्था की नींव कही जाने वाली आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिकाएं अपने हकों की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतर आई हैं। 1 अप्रैल 2026 को बैतूल से शुरू हुई यह पदयात्रा 10 अप्रैल 2026 को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास (सीएम हाउस) पहुंचेगी। 480 किलोमीटर का यह मुश्किल सफर 116 घंटे में तय किया जाएगा। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य इन महिला कार्यकर्ताओं को विनियमित से ‘नियमित कर्मचारी’ का दर्जा दिलाना है। हालांकि, महिलाओं के इस जायज और कड़े संघर्ष के पीछे एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम भी सुर्खियों में है, जो इस आंदोलन के नेतृत्वकर्ता पर कई सवाल खड़े कर रहा है।

स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़: वर्षों की निस्वार्थ सेवा और सरकारी उपेक्षा

गांव-गांव और घर-घर जाकर ये महिलाएं गर्भवती माताओं की देखभाल, बच्चों के टीकाकरण, पोषण अभियान और स्वास्थ्य जागरूकता जैसे अति-महत्वपूर्ण कार्यों को पूरी निष्ठा से निभा रही हैं। इन अमूल्य सेवाओं के बावजूद जमीनी सच्चाई बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद ये न्यूनतम मानदेय पर काम करने को मजबूर हैं। सामाजिक सुरक्षा नदारद क्योंकि इनके पास स्थायी नौकरी की सुरक्षा, पेंशन, बीमा और स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। वर्षों की निस्वार्थ सेवा के बदले इन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा तो दूर, प्रशासनिक उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है।

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आंदोलन की प्रमुख मांगो में आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं/सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। और उन्हें नियमित वेतनमान (Pay Scale) के दायरे में लाया जाए। साथ ही पेंशन, बीमा और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। एवं कार्य के अनुसार उचित सम्मान और पारिश्रमिक तय किया जाए।

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हक की लड़ाई या ‘टीआरपी’ का खेल? आंदोलन की राजनीतिक ‘इनसाइड स्टोरी’

इस 480 किलोमीटर लंबी पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे रामकुमार नागवंशी अचानक से इस बड़े आंदोलन का चेहरा बन गए हैं। लेकिन, इस नेतृत्व के पीछे की कहानी कुछ और ही इशारा कर रही है। हाल ही में, बैतूल NSUI के जिलाध्यक्ष जैद खान ने रामकुमार नागवंशी पर बड़ी कार्रवाई की है। नागवंशी को लगातार संगठन विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए जाने और NSUI की छवि धूमिल करने के स्पष्ट आरोपों के चलते संगठन से निष्कासित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के तहत नागवंशी से जे.एच. कॉलेज अध्यक्ष और NSUI जिला महासचिव का पद तत्काल प्रभाव से छीन लिया गया है।

कांग्रेस के गलियारों में क्या है चर्चा?

स्थानीय कांग्रेसियों और राजनीतिक जानकारों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि पदों से निष्कासित होने के बाद, राजनीतिक हाशिए पर जाने के डर से नागवंशी ने यह नया और आक्रामक रुख अपनाया है। माना जा रहा है कि यह पदयात्रा नागवंशी के लिए आशा कार्यकर्ताओं की चिंता से ज्यादा अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने और ‘टीआरपी’ (सुर्खियां) बटोरने का एक सोची-समझी रणनीति है। राजनीतिक हलकों में तंज कसा जा रहा है कि नागवंशी बैतूल में रहकर आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा की तर्ज पर अपनी एक नई छवि गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वे लगातार मीडिया और जनता के बीच प्रासंगिक बने रह सकें।

एक तरफ आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगें पूरी तरह जायज और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी हैं। दूसरी तरफ, इस आंदोलन का नेतृत्व एक ऐसे युवा नेता के हाथों में है जिस पर अपने ही संगठन से गद्दारी और राजनीतिक ‘स्टंटबाजी’ के आरोप लग रहे हैं।

अब देखना यह है कि 10 अप्रैल को जब यह पदयात्रा सीएम हाउस पहुंचेगी, तो क्या सरकार इन महिलाओं की गुहार सुनेगी, या यह पूरा आयोजन महज एक निष्कासित नेता की राजनीतिक वापसी का ‘लॉन्चपैड’ बनकर रह जाएगा।

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