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13वें दिन जागा प्रशासन, ठेका मजदूरों के शोषण पर डब्लूसीएल और सिस्टम में हड़कंप – Madhya Pradesh Voice

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13वें दिन जागा प्रशासन, ठेका मजदूरों के शोषण पर डब्लूसीएल और सिस्टम में हड़कंप


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11/03/2026 6:45 PM Total Views: 416537

सारनी। वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (WCL) के पाथाखेड़ा क्षेत्र की कोयला खदानों में ठेका मजदूरों के अमानवीय शोषण और सीएमपीएफ (CMPF) में भारी अनियमितता का मामला अब एक जनांदोलन का रूप ले चुका है। लगातार 12 दिनों तक सिस्टम की बेरुखी और डब्ल्यूसीएल प्रबंधन की ‘कमीशन के दबाव’ में साधी गई रहस्यमयी चुप्पी के बाद, आखिरकार 13वें दिन (बुधवार) प्रशासन की नींद टूटी। मंगलवार को आक्रोशित मजदूरों द्वारा जिला मुख्यालय पर किए गए विशाल शक्ति प्रदर्शन और कलेक्टर-एसपी को सौंपे गए ज्ञापन के बाद, प्रशासनिक अमले को आंदोलन स्थल पर उतरना पड़ा।

यह सिर्फ वेतन विवाद नहीं है, बल्कि यह उन बेलगाम ठेकेदारों की तानाशाही का पर्दाफाश है जिन्होंने एक राष्ट्रीयकृत उपक्रम (WCL) में शासकीय कार्य की शांति भंग करने और औद्योगिक अस्थिरता पैदा करने का दुस्साहस किया है।

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प्रशासन की एंट्री: जमीन पर उतरे अधिकारी, सुनी मजदूरों की पीड़ा

बुधवार दोपहर लगभग 1 बजे, बैतूल जिला कलेक्टर श्री नरेन्द्र सूर्यवंशी के सख्त निर्देशों के बाद, श्रम अधिकारियों की टीम (श्रम अधिकारी अक्षय बनिया), नायब तहसीलदार संतोष पथोरिया, सारनी थाना प्रभारी जयपाल इवनाती और डब्ल्यूसीएल प्रबंधन के अधिकारी (एचआरएम विनायक शंकर, एन. रेड्डी, सुरक्षा अधिकारी प्रधान) आंदोलन स्थल पर पहुंचे।

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अधिकारियों ने क्षेत्र की तीनों कोयला खदानों में कार्यरत ठेका मजदूरों से सीधा संवाद किया। इस दौरान मजदूरों के दर्द का जो सैलाब उमड़ा, वह सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

प्रमुख मांगें और नेताओं का कड़ा रुख

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी प्रदीप नागले और पत्रकार मनोज पवार ने अधिकारियों के सामने दो टूक शब्दों में मजदूरों की मांगें रखीं। वहीं, मजदूर नेता संतोष देशमुख, बाबूलाल भारती, सत्यवान मंडल और धर्मेन्द्र चौरे ने एक बेहद खौफनाक सच्चाई उजागर की— महिला मजदूरों को डरा-धमकाकर उनके बैंक खातों में आया वेतन वापस (रिश्वत के रूप में) छीना जा रहा है। मजदूरों की प्रमुख मांगें है कि मजदूरों को उनके हक का पूरा और निर्धारित वेतन बिना किसी कटौती के सीधे बैंक खाते में दिया जाए। साथ ही सीएमपीएफ की पासबुक तुरंत बनाई जाए और अब तक काटे गए अंशदान का पारदर्शी हिसाब दिया जाए और श्रम कानूनों के तहत मजदूरों और उनके परिवारों को चिकित्सा सुविधा एवं दुर्घटना मुआवजा सुनिश्चित किया जाए और मजदूरी वापस मांगने या डराने-धमकाने वाले ठेकेदारों पर तत्काल प्रभाव से आपराधिक मामला दर्ज हो।

पुलिस और प्रशासन का आश्वासन

श्रम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ठेकेदार और प्रबंधन श्रम कानूनों का पालन करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं। सारनी थाना प्रभारी जयपाल इवनाती ने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि अगले दो दिनों के भीतर सभी संबंधित ठेकेदारों को तलब कर बैठक की जाएगी और हर एक मजदूर को उसका हक दिलाया जाएगा। डब्ल्यूसीएल प्रबंधन ने भी ठेकेदारों से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनके खिलाफ लिखित कार्रवाई आगे बढ़ा दी गई है और उन पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल: क्या सिर्फ नोटिस काफी है? 

“इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर मुद्दा ठेकेदारों का वह दुस्साहस है, जिसके तहत वे सरकारी उपक्रम के सुचारू संचालन में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। डब्ल्यूसीएल जैसी महत्वपूर्ण खदानों में मजदूरों को हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर करना, सीधे तौर पर शासकीय कार्य और औद्योगिक शांति को भंग करने का अपराध है।

इन खदानों से देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी होती हैं। ऐसे में जो ठेकेदार मजदूरों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं, महिला श्रमिकों को धमका रहे हैं और सीएमपीएफ जैसे वैधानिक कोष में सेंधमारी कर रहे हैं, उन पर सिर्फ जुर्माना या चेतावनी काफी नहीं है। प्रशासन और डब्ल्यूसीएल को चाहिए कि ऐसे दागी ठेकेदारों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें हमेशा के लिए ‘ब्लैकलिस्ट’ (काली सूची में दर्ज) किया जाए। जब तक शासकीय सिस्टम को अपनी जागीर समझने वाले इन ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट कर खदानों से बाहर का रास्ता नहीं दिखाया जाता, तब तक पाथाखेड़ा में मजदूरों का न्याय अधूरा रहेगा। प्रशासनिक टीम के पहुंचने से उम्मीद की किरण जरूर जगी है, लेकिन अब देखना यह है कि यह आश्वासन जमीनी हकीकत बनता है या कागजों में दफन हो जाता है। “

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