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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती बाकूड़ पंचायत: सरकारी खजाने की खुली लूट और फर्जी बिलों का गोरखधंधा – Madhya Pradesh Voice

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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती बाकूड़ पंचायत: सरकारी खजाने की खुली लूट और फर्जी बिलों का गोरखधंधा


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20/02/2026 11:48 AM Total Views: 359494

प्रवीर कुमार, 7489579303

बैतूल/सारणी। घोड़ाडोंगरी जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली बाकूड़ (बकरीद) पंचायत इन दिनों विकास के बजाय भ्रष्टाचार और घोटालों का नया केंद्र बन चुकी है। पंचायत स्तर पर ग्रामीण विकास के लिए आने वाले सरकारी धन की किस तरह बेखौफ होकर ‘बंदरबांट’ की जा रही है, बाकूड़ पंचायत इसका जीता-जागता उदाहरण है।

पिछले दो वर्षों से यह पंचायत लगातार अपने कारनामों और वित्तीय अनियमितताओं के कारण विवादों के केंद्र में रही है। कभी कागजों पर इमारतें खड़ी कर दी जाती हैं, तो कभी बंद कमरों के नाम पर हजारों के बिल पास कर लिए जाते हैं।

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इस पंचायत में सरकारी पैसों की लूट के कुछ प्रमुख और हैरान करने वाले मामले में भ्रष्टाचार की शुरुआत यहीं से नहीं हुई। इससे पहले भी पंचायत के जिम्मेदारों ने कागजों पर ही आंगनबाड़ी भवन का निर्माण दिखाकर लाखों रुपयों का गबन कर लिया। धरातल पर कोई काम नहीं हुआ, लेकिन सरकारी रजिस्टर में इमारत बनकर तैयार हो गई और पैसों की बंदरबांट कर ली गई। हफ्ते में एक दिन खुलने वाली पंचायत में 14 हजार का इंटरनेट बिल: हाल ही में जो सबसे अजीबोगरीब और हास्यास्पद मामला सामने आया है, वह है इंटरनेट के उपयोग का। पंचायत द्वारा 14 महीनों का 14,000 रुपये का भारी-भरकम इंटरनेट बिल लगाया गया है। ग्रामीण भली-भांति जानते हैं कि बाकूड़ पंचायत बमुश्किल हफ्ते में एक या दो दिन ही खुलती है। ऐसे में बंद पंचायत भवन में हर महीने 1000 रुपये का इंटरनेट कौन चला रहा है, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है।

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स्टेशनरी के नाम पर फर्जीवाड़े का खेल

इंटरनेट ही नहीं, बल्कि पंचायत का खजाना खाली करने के लिए फर्जी बिलों का एक पूरा रैकेट चल रहा है। स्टेशनरी की खरीदी के नाम पर भी कई फर्जी और बेबुनियाद बिल लगाए गए हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।

आम जनता के हक पर डाका

यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ कुछ हजार रुपयों के हेरफेर का मामला नहीं है, यह उस व्यवस्था पर तमाचा है जो ग्रामीणों के उत्थान के लिए बनाई गई थी। जो पैसा गांव की सड़क, पानी, और बुनियादी सुविधाओं पर खर्च होना चाहिए था, वह पंचायत के भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जेबों में जा रहा है।

अक्सर बंद रहने वाली बाकुड़ पंचायत में इंटरनेट का बिल और कागजों पर खड़ी आंगनबाड़ी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि बाकूड़ पंचायत में कोई भी नियम-कानून मायने नहीं रखता। अब देखना यह है कि क्या उच्च अधिकारी इस खुली लूट का संज्ञान लेकर कोई निष्पक्ष जांच बिठाते हैं, या फिर भ्रष्टाचारियों को सरकारी खजाने को यूं ही दीमक की तरह चाटने की खुली छूट मिलती रहेगी।

इनका कहना है:—

  • रिचार्ज के बिल में मेरे ही हस्ताक्षर है लेकिन मैने बिल नहीं देखा मुझसे हस्ताक्षर करवाया गया है।

भैयालाल बैठे, सरपंच ग्राम पंचायत बाकुड़

  • ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक को प्रावधान है कि वह रिचार्ज कर अपना ऑनलाइन कार्य कर सकते है, लेकिन इतना ज्यादा अमाउंट का कौनसा रिचार्ज है में दिखवाता हु।

प्रपंज आर, शाहपुर एसडीएम

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