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WCL खदानों में ठेकेदारों की मनमानी से भड़का मजदूरों का आक्रोश, जिला श्रम पदाधिकारी कार्यालय के घेराव और ‘ब्लैक लिस्ट’ करने की तैयारी – Madhya Pradesh Voice

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WCL खदानों में ठेकेदारों की मनमानी से भड़का मजदूरों का आक्रोश, जिला श्रम पदाधिकारी कार्यालय के घेराव और ‘ब्लैक लिस्ट’ करने की तैयारी


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13/02/2026 6:27 PM Total Views: 385977

आरोप:‘कमीशन’ न देने पर ठेकेदार कर रहे मानसिक प्रताड़ना, प्रबंधन के आदेशों की भी उड़ाई जा रही धज्जियां

सारनी। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के पाथाखेड़ा क्षेत्र की भूमिगत खदानों में कार्यरत असंगठित ठेका श्रमिकों और ठेकेदारों के बीच का विवाद अब एक विस्फोटक रूप लेता जा रहा है। शोषण, वेतन रोकने और मानसिक दबाव बनाने वाले ठेकेदारों के खिलाफ अब मजदूरों ने ‘आर-पार’ की लड़ाई का मन बना लिया है। श्रमिकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे न केवल अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे, बल्कि जिला श्रम पदाधिकारी कार्यालय का घेराव कर भ्रष्ट ठेकेदारों को ‘ब्लैक लिस्ट’ कराने की मांग करेंगे।

9 फरवरी के समझौते को ठेकेदारों ने दिखाया ठेंगा

श्रमिक संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि बीती 9 फरवरी 2026 को प्रबंधन और मजदूरों के बीच एक अहम समझौता हुआ था, जिसके बाद मजदूर विश्वास के साथ काम पर लौटे थे। लेकिन ठेकेदारों ने इस समझौते की धज्जियां उड़ा दी हैं। आरोप है कि समझौते के विपरीत, ठेकेदार अब बदले की भावना से काम कर रहे हैं। मजदूरों को फोन कर डराया जा रहा है, ड्यूटी से वापस भेजा जा रहा है और कई कामगारों का खदानों में प्रवेश तक वर्जित कर दिया गया है।

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“मेहनत हमारी, पैसा तुम्हारा क्यों?” – कमीशनखोरी का बड़ा खेल

इस पूरे विवाद की जड़ में ठेकेदारों का ‘लालच’ और ‘कमीशनखोरी’ है। प्रबंधन ने हाल ही में मजदूरों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि “आपके बैंक खाते में आया पैसा आपकी मेहनत का है, उसे किसी भी ठेकेदार को वापस न करें। यदि कोई दबाव बनाता है, तो थाने में शिकायत करें।”

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मजदूरों का आरोप है कि जैसे ही उन्होंने प्रबंधन की बात मानकर ठेकेदारों को अपना पैसा (कमीशन के रूप में) वापस देने से मना किया, ठेकेदारों ने अपना असली रूप दिखाना शुरू कर दिया। अब उन मजदूरों को निशाना बनाया जा रहा है जो अपना पूरा पेमेंट मांग रहे हैं और पैसे वापस करने से इनकार कर रहे हैं।

आर्थिक तंगी से जूझते परिवार, वेतन पर लगी रोक

जनवरी और फरवरी माह का वेतन अब तक मजदूरों के खातों में नहीं पहुंचा है। नियमानुसार हर महीने की 7 तारीख तक भुगतान हो जाना चाहिए, लेकिन वेतन रोककर मजदूरों की आर्थिक कमर तोड़ी जा रही है। घर चलाना मुश्किल हो गया है, लेकिन ‘दलाल’ प्रवृत्ति के ठेकेदारों को मजदूरों की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है। उन्हें न तो प्रशासन की चेतावनी का डर है और न ही कानून का भय।

दलाल ठेकेदारों को ‘ब्लैक लिस्ट’ कराने की तैयारी

श्रमिक नेताओं प्रदीप नागले और संतोष देशमुख ने कड़े शब्दों में कहा है कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। मजदूरों का समूह अब जिला श्रम विभाग और प्रशासन से गुहार लगाने की बजाय सीधे जिला श्रम अधिकारी कार्यालय का घेराव करने की रणनीति बना रहा है।

मजदूरों की प्रमुख मांगें है कि शोषण करने वाले और ‘कमीशन’ मांगने वाले लालची ठेकेदारों को तत्काल प्रभाव से ब्लैक लिस्ट (काली सूची में) डाला जाए, रोका गया जनवरी और फरवरी का पूरा वेतन तत्काल जारी हो, जिन मजदूरों को बिना कारण काम से निकाला गया है, उन्हें ससम्मान वापस लिया जाए, मानसिक प्रताड़ना बंद हो और कार्यस्थल पर रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

7 दिन का अल्टीमेटम नहीं तो नहीं रुकेगा आंदोलन

श्रमिकों ने महाप्रबंधक को सौंपे गए लिखित शिकायत पत्र में 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि समय सीमा के भीतर समाधान नहीं निकला, तो क्षेत्र में होने वाले उग्र आंदोलन और कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए पूरी तरह से प्रबंधन और संबधित ठेकेदार जिम्मेदार होंगे।

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