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डिजिटल मीटर फिटिंग करने बिना सुरक्षा उपकरण खंभे पर चढ़ा कर्मचारी बिजली से बुरी तरह झुलसा – Madhya Pradesh Voice

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डिजिटल मीटर फिटिंग करने बिना सुरक्षा उपकरण खंभे पर चढ़ा कर्मचारी बिजली से बुरी तरह झुलसा


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10/02/2026 5:49 PM Total Views: 385990

बैतूल/सारणी। मुनाफे की अंधी दौड़ और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने आज सारणी में एक और गरीब परिवार की खुशियों को ग्रहण लगा दिया। करोड़ों का ठेका लेने वाली कंपनियों के लिए एक कर्मचारी की जान की कीमत महज कुछ मुआवजे की रकम बनकर रह गई है। मामला सारणी के वार्ड क्रमांक-1 का है, जहाँ मंगलवार दोपहर बिजली के खंभे पर चढ़ा एक ठेका कर्मचारी कंपनी की लापरवाही के चलते जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।

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क्या है पूरा मामला?

घटना मंगलवार दोपहर लगभग 12:00 बजे की है। सारणी के वार्ड क्रमांक-1 में सेंट्रल बैंक के पीछे स्थित जिओ टावर के पास लगे ट्रांसफार्मर पर ‘एजी शॉप कंपनी’ (AG Shop Company) के कर्मचारी डिजिटल मीटर लगाने का काम कर रहे थे। इसी दौरान कंपनी का एक कर्मचारी, शिवकुमार मसकोले उम्र- 33 वर्ष (निवासी ग्राम धसेड़, थाना सारणी), ट्रांसफार्मर के खंभे पर चढ़ा।

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बताया जा रहा है कि लाइन को पूरी तरह से डिस्कनेक्ट किए बिना और बिना यह पुष्टि किए कि करंट बंद हुआ है या नहीं, शिवकुमार को ऊपर चढ़ा दिया गया। जैसे ही वह ऊपर पहुँचा, वह हाई-वोल्टेज करंट की चपेट में आ गया। झटका इतना जबरदस्त था कि वह तारों से चिपक गया। इस दर्दनाक हादसे में उसका कमर के नीचे का हिस्सा और बायां पैर बुरी तरह झुलस गया और 30 फीट की ऊंचाई से नीचे गिर पड़ा।

बिना सुरक्षा उपकरण मौत के मुंह में धकेला

प्रत्यक्षदर्शियों और बिजली वितरण कंपनी के सूत्रों के अनुसार, एजी शॉप कंपनी ने क्षेत्र में डिजिटल मीटर लगाने का करोड़ों रुपये का ठेका लिया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कंपनी ने अपने कर्मचारियों को सुरक्षा के नाम पर न तो सेफ्टी बेल्ट दिए हैं, न ही डिस्चार्ज रॉड और न ही रबर के दस्ताने।

एक अनुभवहीन कर्मचारी को बिना किसी सीनियर सुपरविजन और बिना सुरक्षा उपकरणों के इतने खतरनाक काम (HV लाइन) ट्रांसफार्मर पर चढ़ाना सीधे-सीधे उनकी जान से खिलवाड़ करना है। यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि कंपनी की ओर से की गई ‘आपराधिक लापरवाही’ है।

मुआवजे का मरहम या जिम्मेदारी से पल्ला?

घटना के बाद साथी कर्मचारियों ने आनन-फानन में शिवकुमार को मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के चिकित्सालय पहुँचाया, जहाँ उसकी हालत गंभीर देखते हुए उसे निजी अस्पताल बैतूल रेफर कर दिया गया।

शर्मनाक पहलू यह है कि घटना के बाद कंपनी के टीम लीडर ने रटा-रटाया बयान दिया कि “युवक का पूरा इलाज कंपनी कराएगी, उसे आर्थिक मदद दी जाएगी और पेंशन भी मुहैया कराई जाएगी।” यह बयान सुनने में भले ही राहत भरा लगे, लेकिन यह साबित करता है कि कंपनी के लिए सुरक्षा मानकों का पालन करने से ज्यादा आसान हादसे के बाद पैसे फेंकना है। सवाल यह है कि क्या वह आर्थिक मदद उस युवक को उसका पैर या उसकी सामान्य जिंदगी वापस दे पाएगी?

जिम्मेदार कौन?

इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या करोड़ों का टेंडर जारी करते समय प्रशासन यह सुनिश्चित नहीं करता कि कंपनी के पास सुरक्षा संसाधन हैं या नहीं? बिना यह चेक किए कि ‘डिस्कनेक्टिंग स्विच’ (GO Switch) पूरी तरह कटा है या नहीं, कर्मचारी को ऊपर चढ़ने की अनुमति किसने दी? क्या अब प्रशासन इस कंपनी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करेगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

फिलहाल शिवकुमार अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है, और उसका परिवार इस लापरवाही का खामियाजा भुगत रहा है।

इनका कहना है:-

  • घायल युवक शिवकुमार मर्सकोले का इलाज का सारा खर्चा कंपनी द्वारा किया जाएगा। पेंशन भी मुहैया कराया जाएगा कर्मचारी की आगे की सारी जवाबदारी कंपनी की होगी।

प्रकाश व्यापारी, टीम लीडर एजी कंपनी

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