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‘नल जल योजना’ या ‘नल सूखा योजना’? सारणी की फॉरेस्ट कॉलोनी में सिर्फ हवा उगल रहे नल! – Madhya Pradesh Voice

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‘नल जल योजना’ या ‘नल सूखा योजना’? सारणी की फॉरेस्ट कॉलोनी में सिर्फ हवा उगल रहे नल!


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31/05/2026 10:47 PM Total Views: 461986

सरकारी दावों की पोल खोलता ठेकेदार, 3 महीने से पानी न मिलने के कारण प्राइवेट टैंकरों के भरोसे बुझ रही वार्ड क्रमांक-2 के लोगों की प्यास।

सारणी। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नल जल योजना’, जिसका मुख्य उद्देश्य लाखों की लागत से हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, सारणी में पूरी तरह से दम तोड़ती नजर आ रही है। सरकार के दावों और वादों को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी जिस ‘लक्ष्मी इंजीनियरिंग फर्म’ को सौंपी गई थी, वह अपने काम में पूरी तरह से विफल साबित हुई है। इस ठेका कंपनी की कार्यप्रणाली ने सरकार की योजना को पलीता लगा दिया है, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।

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नल हैं, पर जल नहीं: फॉरेस्ट कॉलोनी का बुरा हाल

सारणी के वार्ड क्रमांक-2 (राधा कृष्ण वार्ड) स्थित फॉरेस्ट कॉलोनी इस प्रशासनिक और कार्यदायी संस्था की लापरवाही का सबसे बड़ा और जीता-जागता उदाहरण बन गई है। पिछले लगभग तीन महीनों से यहां के रहवासी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। विडंबना यह है कि नल जल योजना के तहत घर-घर पाइपलाइन बिछाकर कनेक्शन तो दे दिए गए हैं, लेकिन ये नल आज तक प्यासे हैं और शोपीस बनकर रह गए हैं।

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शिकायतों का अंबार, लेकिन मिला सिर्फ ‘आश्वासन’

इस गंभीर जल संकट को लेकर फॉरेस्ट कॉलोनी के निवासियों ने हर मुमकिन दरवाजा खटखटाया, लेकिन उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं निकला। स्थानीय निवासियों ने नगर पालिका परिषद सारणी के आला अधिकारियों से लेकर नगर पालिका अध्यक्ष तक को इस समस्या से कई बार अवगत कराया। हर बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा केवल ‘दिलासा’ और जल्द व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया गया, लेकिन धरातल पर जल आपूर्ति बहाल करने का एक भी प्रयास सफल नहीं हो पाया।

भीषण गर्मी में छलक रहा दर्द, प्राइवेट टैंकरों का सहारा

इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी में जब पानी की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है, तब यह जल संकट और भी विकराल रूप ले चुका है। सरकारी तंत्र और लक्ष्मी इंजीनियरिंग फर्म के पूरी तरह फेल हो जाने के बाद अब आम जनता को दोहरा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। मजबूरन कॉलोनी वासियों को भारी कीमत चुकाकर प्राइवेट टैंकरों के जरिए अपने घरों में जलापूर्ति करनी पड़ रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस ‘लक्ष्मी इंजीनियरिंग फर्म’ की लापरवाही से जनता बेहाल है, उस पर प्रशासन मेहरबान क्यों है? क्या नगर पालिका प्रशासन एसी कमरों से बाहर निकलकर फॉरेस्ट कॉलोनी की प्यास बुझाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर सरकारी पैसे की यूं ही बर्बादी होती रहेगी और जनता निजी टैंकरों के भरोसे ही दिन काटेगी? प्रशासन को जल्द से जल्द इस दिशा में सख्त कदम उठाते हुए ठेकेदार पर कार्रवाई करनी चाहिए और सुचारू जल व्यवस्था बहाल करनी चाहिए।

इनका कहना है:—

नल जल योजना में पाइपलाइन फाल्ट के चलते नगर की कई वार्डों में 6 दिन तक जलापूर्ति नहीं की जा सकी थी। लेकिन अगर तीन माह से फॉरेस्ट कॉलोनी में नल जल योजना कनेक्शन का पानी नहीं आ रहा है तो मैं उसको दिखवाता हूं। 

कमलेश पटेल, उपयंत्री नगर पालिका परिषद सारणी

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