नमस्कार मध्यप्रदेश वॉइस न्यूज पोर्टल मे आपका स्वागत हैं, खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे  7489579303, 👉बैतूल जिले के हर तहसील में संवाददाता चाहिए। 📞 संपर्क करें।
बैतूल में यूजीसी के नए ‘समानता कानून’ पर संग्राम: सर्व समाज के युवाओं ने भरी हुंकार – Madhya Pradesh Voice

Madhya Pradesh Voice

Latest Online Breaking News

बैतूल में यूजीसी के नए ‘समानता कानून’ पर संग्राम: सर्व समाज के युवाओं ने भरी हुंकार


WhatsApp Icon

27/01/2026 7:43 PM Total Views: 352754

बैतूल। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ बैतूल में आक्रोश की ज्वाला भड़क उठी है। ‘सर्व समाज’ के बैनर तले सैकड़ों युवाओं ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट का घेराव किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। युवाओं का साफ कहना है कि यह नया नियम कॉलेज परिसरों में सौहार्द बढ़ाने के बजाय छात्रों को जातियों में बांटने और निर्दोषों को झूठे मुकदमों में फंसाने का काम करेगा।

सौरभ सिंह राघव के नेतृत्व में एकजुट हुए युवाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा और इस कानून को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की।

ताजा खबरों को देखने के लिए , यहाँ क्लिक करके हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें

क्या है विवादित नियम? (विशेषज्ञों की राय)

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ता कलश दीक्षित और रजनीश जैन ने इस नए कानून की तकनीकी खामियों को उजागर किया। उन्होंने बताया कि यह नियम 15 जनवरी 2026 से पूरे देश में लागू हो चुका है। इसके तहत हर उच्च शिक्षण संस्थान में एक ‘समानता समिति’ (Equality Committee) का गठन अनिवार्य है। इस समिति में ओबीसी, महिला, एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। आरक्षित वर्ग के छात्र जातिगत भेदभाव की शिकायत सीधे इस समिति से कर सकेंगे। समिति को हर 6 महीने में अपनी रिपोर्ट यूजीसी को भेजनी होगी। नियम का पालन न करने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।

Read Our Photo Story
यहाँ क्लिक करके हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

“भाईचारा खत्म कर, खौफ का माहौल बनाएगा यह कानून”

युवा नेता रफी अहमद और आशीष देशमुख ने इस कानून के दूरगामी दुष्प्रभावों पर चिंता जाहिर की। उनका कहना है कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी वह जगह होती है जहां छात्र जाति-धर्म भूलकर एक साथ पढ़ते और बढ़ते हैं। लेकिन यह कानून कैंपस में “अविश्वास की दीवार” खड़ी कर देगा।

युवाओं ने अपनी चिंताओं को प्रमुखता से रखते कि अगड़ी जातियों (General Category) के छात्रों के मन में यह डर बैठ गया है कि आपसी रंजिश में इस कानून का दुरुपयोग कर उन्हें फंसाया जा सकता है, जिससे उनका करियर बर्बाद हो जाएगा। यह नियम समाज को जोड़ने के बजाय उसे जातियों के आधार पर और अधिक बांट देगा। प्रदर्शनकारी युवाओं ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल शिक्षा के मंदिरों को भी अपनी ‘वोट बैंक की राजनीति’ का अखाड़ा बना रहा है।

सरकार को सीधी चेतावनी: “सड़क से लेकर चुनाव तक दिखेगा असर”

ज्ञापन सौंपते समय माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। सर्व समाज के युवाओं ने सरकार को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है। सौरभ सिंह राघव ने कहा, “यदि सरकार ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस काले कानून को वापस नहीं लिया, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। अभी तो यह सिर्फ ज्ञापन है, आगे सड़कों पर उग्र आंदोलन होगा।”

प्रदर्शनकारियों ने यह भी साफ कर दिया कि अगर उनकी मांगें अनसुनी की गईं, तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों में देखने को मिलेगा, जहां युवा शक्ति अपनी नाराजगी वोट के माध्यम से जाहिर करेगी।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से क्या आप संतुष्ट हैं? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


लाइव कैलेंडर

February 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
232425262728