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कड़ाके की ठंड में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आदिवासियों का ‘महा-धरना’, सीटू (CITU) और मजदूर एकता यूनियन ने दिया खुला समर्थन – Madhya Pradesh Voice

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कड़ाके की ठंड में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आदिवासियों का ‘महा-धरना’, सीटू (CITU) और मजदूर एकता यूनियन ने दिया खुला समर्थन


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01/01/2026 11:56 PM Total Views: 386253

बुधनी/संदलपुर। विकास की दौड़ में एक बार फिर आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी का मामला गरमा गया है। संदलपुर नेशनल हाईवे के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण के विरोध में आदिवासी संगठन ‘जयेस’ (JAYS) के नेतृत्व में प्रभावित परिवारों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। हाड़ कंपा देने वाली ठंड और खुले आसमान के नीचे बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं और पुरुष अपने ‘जल, जंगल और जमीन’ के हक़ के लिए चट्टान की तरह डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें उचित मुआवजा और स्थायी पुनर्स्थापन नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे।

मजदूर एकता यूनियन और CITU का मिला मजबूत साथ

इस आंदोलन को अब एक व्यापक रूप मिल गया है। आदिवासियों के इस संघर्ष को मजदूर एकता यूनियन मध्य प्रदेश और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) ने अपना पूर्ण और जोरदार समर्थन दिया है। यूनियनों के इस समर्थन से प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।

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कुलदीप राजपूत (अतिरिक्त महासचिव एवं राज्य समिति सदस्य, स्पिनिंग मिल्स मजदूर एकता यूनियन म.प्र.) ने धरना स्थल पर हुंकार भरते हुए कहा “आदिवासियों के साथ हो रहे इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मजदूर एकता यूनियन और सीटू, जयेस के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में प्रभावित परिवारों के साथ आखिरी दम तक कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी। यह लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं, बल्कि अस्तित्व की है।”

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मुआवजे के नाम पर ‘धोखाधड़ी’ के गंभीर आरोप

धरने पर बैठे आदिवासियों का आरोप है कि प्रशासन उनके साथ छल कर रहा है। प्रभावित परिवारों को शासन द्वारा तय गाइडलाइन से भी कम मुआवजा दिया जा रहा है। तालपुरा निवासी आदिवासी महिला ललिता जूठे ने दस्तावेजों के साथ अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने बताया, “प्रशासन ने मुझे जानकारी दी थी कि मेरी जमीन के बदले 32 लाख रुपये मिलेंगे, लेकिन जब वास्तविक भुगतान हुआ तो खाते में केवल 12 लाख रुपये आए। यह सीधे तौर पर हमारे साथ धोखाधड़ी है।” आंदोलनकारियों का कहना है कि इसी तरह अन्य परिवारों को भी कम राशि देकर ठगा जा रहा है, जिससे समुदाय में भारी आक्रोश है। आजीविका और आवास का गंभीर संकट उनके सामने खड़ा हो गया है।

राजनीतिक हलचल: पूर्व मंत्री ने की कलेक्टर से बात

प्रशासन की सुस्ती के बीच राजनीतिक समर्थन भी धरना स्थल पर पहुँच रहा है। प्रदेश कांग्रेस नेत्री कंचन शर्मा ने धरना स्थल पर पहुंचकर आदिवासियों की पीड़ा सुनी और संघर्ष में साथ देने का वादा किया। पूर्व शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजकुमार पटेल ने आंदोलनकारियों के बीच पहुंचकर उनसे सीधा संवाद किया। राजकुमार पटेल ने कहा, “विकास के नाम पर आदिवासियों का शोषण किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने तत्काल कलेक्टर और एसडीएम से फोन पर चर्चा की और स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया। इस हस्तक्षेप के बाद अधिकारियों ने गुरुवार को आंदोलनकारियों से बातचीत करने का आश्वासन दिया है। इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष योगेश राजपूत सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा संघर्ष

जयस संगठन और समर्थन दे रही यूनियनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि प्रशासन केवल आश्वासन न दे, बल्कि ठोस घोषणा करे। जब तक प्रभावित आदिवासी परिवारों को उचित और सम्मानजनक मुआवजा नहीं मिलता, स्थायी पुनर्स्थापन की लिखित गारंटी नहीं दी जाती, तब तक यह आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से और अधिक मजबूती के साथ जारी रहेगा।

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