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‘साइबर बवंडर’: 9 करोड़ 84 लाख का फ्रॉड, मृतकों के खातों से भी करोड़ों का लेनदेन, बैंक का अंदरूनी शख्स निकला मास्टरमाइंड! – Madhya Pradesh Voice

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‘साइबर बवंडर’: 9 करोड़ 84 लाख का फ्रॉड, मृतकों के खातों से भी करोड़ों का लेनदेन, बैंक का अंदरूनी शख्स निकला मास्टरमाइंड!


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20/11/2025 9:21 PM Total Views: 363661

मध्य प्रदेश/बैतूल। आमतौर पर अपनी शांति और सादगी के लिए जाना जाने वाला बैतूल शहर आज एक ऐसी सनसनीखेज वारदात से हिल गया है, जिसने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पूरे प्रदेश को साइबर सुरक्षा की नई चुनौतियों पर सोचने पर मजबूर कर दिया है। बैतूल पुलिस और साइबर सेल ने मिलकर एक संगठित साइबर ठगी के विशाल नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसमें चौंकाने वाले 9 करोड़ 84 लाख रुपये की हेराफेरी सामने आई है। पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमला जोशी के सीधे निर्देशन में, हाई-टेक जांच और साइबर टीम के अथक प्रयासों से यह बड़ी सफलता हासिल हुई है।

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एक मजदूर की शिकायत से खुला करोड़ों का राज:

इस महाठगी का खुलासा खेड़ी सावलीगढ़ (थाना कोतवाली क्षेत्र) निवासी 40 वर्षीय बिसराम इवने की एक साधारण सी शिकायत से हुआ। मजदूरी करके अपना जीवन यापन करने वाले बिसराम ने कलेक्टर और एसपी कार्यालय बैतूल में एक लिखित आवेदन देकर बताया कि उसके जन-धन खाते में करीब 2 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन हुए हैं, जिनकी उसे बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। यह चौंकाने वाली सच्चाई तब सामने आई जब वह बैंक में अपनी KYC कराने गया। शिकायत की गंभीरता को समझते हुए, एसपी के निर्देश पर साइबर सेल बैतूल ने तत्काल जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि जून 2025 से अब तक बिसराम के खाते से लगभग 1.5 करोड़ रुपये का अवैध ट्रांज़ैक्शन किया जा चुका था।

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मृतक के खाते से भी ठगी का काला खेल: ₹9 करोड़ 84 लाख की वित्तीय हेराफेरी

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, ठगी के इस भयावह मकड़जाल की परतें खुलने लगीं। पता चला कि एक ही बैंक की शाखा में 7 अलग-अलग व्यक्तियों के खातों को निशाना बनाया गया था। इन खातों से कुल ₹98,495,212 रुपये की भारी-भरकम राशि की हेराफेरी की गई थी। ठगी का शिकार हुए खाताधारकों में बिसराम इवने, नर्मदा इवने, मुकेश उइके, नितेश उइके, राजेश बर्डे, अमोल और चंदन शामिल थे। लेकिन जांच टीम तब स्तब्ध रह गई जब पता चला कि इस गिरोह ने मृत व्यक्ति राजेश बर्डे के खाते का भी उतनी ही सक्रियता से उपयोग किया था, जैसे कोई जीवित ग्राहक करता है। यह खुलासा पूरे मामले का सबसे वीभत्स पहलू बनकर सामने आया।

बैंक के अंदरूनी शख्स ने खोली राह: शातिराना ‘किट ट्रांसफर’ नेटवर्क

पुलिस जांच में जो सामने आया, वह किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं था। इस गिरोह का मुख्य सहयोगी कोई और नहीं, बल्कि बैंक में पासबुक एंट्री करने वाला एक अस्थायी कर्मचारी राजा राजपूत था। राजा ने बैंक में काम करते हुए ग्राहकों की संवेदनशील और गोपनीय जानकारी अवैध रूप से हासिल की। उसने ग्राहक दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर खातों में फर्जी मोबाइल नंबर लिंक कराए, नए ATM कार्ड जारी करवाए, पासबुक/चेकबुक का अनधिकृत उपयोग किया, और इंटरनेट/मोबाइल बैंकिंग का एक्सेस लेकर OTP पर कब्जा जमाया। इस अंदरूनी पहुंच के जरिए ही गिरोह ने मृत व्यक्ति के खाते से भी लगातार ऊंची रकम के लेन-देन को अंजाम दिया।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि राजा राजपूत के तार जिले से बाहर बैठे बड़े साइबर अपराधियों से जुड़े हुए थे। गिरोह प्रत्येक लक्षित खाते की एक पूरी “किट” तैयार करता था, जिसमें लिंक की गई सिम, ATM कार्ड, पासबुक और चेकबुक शामिल होती थी। यह गोपनीय किट बाकायदा बस के माध्यम से इंदौर भेजी जाती थी, जहाँ से बाहरी फ्रॉडिस्टर इन खातों से बड़े-बड़े ट्रांज़ैक्शन को अंजाम देते थे।

पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई: इंदौर में दबिश, तीन गिरफ्तार, करोड़ों का सामान जब्त

इस जटिल और हाई-टेक साइबर धोखाधड़ी को सुलझाने के लिए बैतूल पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण का सहारा लिया। सटीक सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने इंदौर में आरोपियों के दो ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश दी। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई, जिसमें 15 मोबाइल फोन (जिनमें 25 सिम कार्ड लगे थे), 21 ATM कार्ड, 28 हजार रुपये नकद (एक काले बैग में), 11 बैंक पासबुक, 7 चेकबुक, 2 POS मशीन, 69 ATM जमा रसीदें (कुल 21 लाख रुपये जमा दर्शाती), 48 हजार रुपये की जमा पर्ची, 2 लैपटॉप, 1 Extreme Fiber राउटर, 4 रजिस्टर व डायरी (वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड) के साथ, मुख्य अपचारी राजा उर्फ आयुष चौहान (28 वर्ष, निवासी खेड़ी, सावलीगढ़), अंकित राजपूत (32 वर्ष, निवासी इंदौर) और नरेंद्र सिंह राजपूत (24 वर्ष, निवासी इंदौर) को गिरफ्तार किया गया।

बैतूल पुलिस और साइबर सेल की ऐतिहासिक सफलता:

इस बड़ी कार्रवाई में बैतूल पुलिस की तकनीकी रूप से दक्ष साइबर सेल टीम का योगदान अतुलनीय रहा। टीम में कोतवाली टीआई नीरज पाल सहित अनुभवी SI और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे। साइबर सेल से SI अश्विनी चौधरी, SI नवीन सोनकर, राजेंद्र धाड़से, बलराम राजपूत, दीपेंद्र सिंह, पंकज नरवरिया और सचिन हनवते की टीम ने डिजिटल साक्ष्य जुटाने, बैंकिंग ट्रेल ट्रैक करने और आरोपियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अतिरिक्त, दो विशेष SIT टीमें भी गठित की गईं, जिसमें साइबर टीम के साथ SI राकेश सरेयाम, SI रवि शाक्य, SI छत्रपाल धुर्वे, SI उत्तम नंदन मस्तकार, प्रआर तरुण, प्रआर शिव उईके, आरक्षक दीपक कटियार, आरक्षक विकास जैन, आरक्षक अनिरुद्ध यादव, आरक्षक विवेक टेटवार, म.आर. निर्मला ऊईके और आरक्षक उज्ज्वल जैसे अनुभवी सदस्य शामिल रहे। इस टीम ने समन्वित प्रयास से इस बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया।

इनका कहना है:—

  • “इस जटिल साइबर ठगी को टीम ने तकनीकी दक्षता और बेहतरीन तालमेल के साथ उजागर किया। जिले के बाहर की गई कार्रवाई में भी टीम ने शानदार प्रोफेशनलिज़्म का प्रदर्शन किया है।”

वीरेंद्र जैन, पुलिस अधीक्षक, बैतूल

  • “जप्त डिजिटल सामग्री के विश्लेषण से गिरोह का नेटवर्क और स्पष्ट हो रहा है।”

कमला जोशी, सहायक पुलिस अधीक्षक, बैतूल

 

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