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मुलताई नगर पालिका में 4.5 लाख के काऊ कैचर खरीदी में अनियमितता, तत्कालीन सीएमओ सहित 4 अधिकारी जांच के घेरे में – Madhya Pradesh Voice

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मुलताई नगर पालिका में 4.5 लाख के काऊ कैचर खरीदी में अनियमितता, तत्कालीन सीएमओ सहित 4 अधिकारी जांच के घेरे में


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21/10/2025 6:54 PM Total Views: 387742

मुलताई। नगर पालिका मुलताई में लगभग दो साल पूर्व तत्कालीन सीएमओ नितिन बिजवे के कार्यकाल में नियमों को ताक पर रखकर जेम (GeM) पोर्टल से की गई खरीददारी का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। साढ़े चार लाख रुपये के काऊ कैचर (हाइड्रोलिक पशुवाहन) की खरीद में गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद, आयुक्त ने तत्कालीन सीएमओ नितिन बिजवे सहित चार अधिकारियों को आरोप पत्र जारी कर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

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तत्कालीन सीएमओ पर गाज, विभागीय जांच प्रस्तावित:

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, भोपाल द्वारा जारी किए गए आरोप पत्र के अनुसार, तत्कालीन सीएमओ नितिन बिजवे, तत्कालीन सब-इंजीनियर पंकज धुर्वे, तत्कालीन अकाउंटेंट भागचंद अहिरवार और सहायक राजस्व निरीक्षक अमरलाल कावडे के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा जारी किए गए आदेश (क्रमांक शि./6/मुलताई/2025/2/137) में इन अधिकारियों को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है।

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जांच में खुलासा: नियमों की अनदेखी, 15वें वित्त आयोग के फंड का गलत इस्तेमाल:

आरोप पत्र में बताया गया है कि ये अधिकारी फरवरी 2020 से नगर पालिका परिषद मुलताई में विभिन्न पदों पर कार्यरत थे। इसी अवधि के दौरान, उन्होंने नगर परिषद क्षेत्र में घूमने वाले मवेशियों को पकड़ने के लिए हाइड्रोलिक पशुवाहन (काऊ कैचर) की खरीद का प्रस्ताव तैयार किया था। जांच में यह पाया गया कि इस वाहन की खरीद 15वें वित्त आयोग की राशि से की गई, जबकि भुगतान का समायोजन निकाय निधि से किया जाना था। यह प्रक्रिया मध्यप्रदेश नगरपालिका (लेखा एवं वित्त) नियम 2018 के नियम 86 का सीधा उल्लंघन है। नियम के अनुसार, एक लाख रुपये से अधिक की किसी भी खरीददारी के लिए खुली निविदा प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।

खुली निविदा के बजाय जेम पोर्टल से खरीद, लाखों का भुगतान:

इसके बावजूद, अधिकारियों ने नियम-कायदों को दरकिनार करते हुए, यह खरीददारी मेसर्स ज्योति इंडस्ट्रीज, भोपाल से सीधे जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से पूरी कर ली। विभागीय अभिलेखों के अनुसार, खरीद प्रक्रिया 2021 से 2022 के बीच संपन्न हुई और बिना किसी खुली निविदा के ही 4.60 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। शासन ने इस पूरी प्रक्रिया को एक गंभीर वित्तीय अनियमितता करार दिया है और इसमें संबंधित अधिकारियों को सीधे तौर पर उत्तरदायी ठहराया है।

आयुक्त का सख्त निर्देश: 15 दिनों में प्रस्तुत करें लिखित प्रतिवाद:

आयुक्त संकेत भोंडवे ने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आरोप पत्र प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर सभी संबंधित अधिकारी अपना लिखित प्रतिवाद प्रस्तुत करें। इसके बाद ही मामले की आगे की जांच और कार्रवाई की जाएगी।

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